
बक्सर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अश्विनी चौबे का घेराव किया था.
छात्र राजनीति से मंत्री तक का सफ़र
अश्विनी पटना यूनिवर्सिटी में 1971 में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं. जब जेपी ने आंदोलन शुरू किया तो इसमें अश्विनी चौबे भी शामिल हो गए. मीसा के तहत 23 महीने तक जेल में रहे. पहली बार 1995 में बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर भालपुर से चुनाव लड़े और जीते. उसके बाद लगातार 2014 तक भागलपुर से विधायक बने रहे. मोदी लहर में 2014 में बक्सर लोकसभा से चुनाव लड़ा और जीत गए.बिहार में संभाले हैं कई मंत्रालय

अश्विनी चौबे का बीजेपी के शीर्ष नेताओं से तालमेल हमेशा अच्छा रहा है.
अश्विनी चौबे बिहार सरकार में 8 साल तक स्वास्थ्य, शहरी विकास और जनस्वास्थ्य, इंजीनियरिंग विभागों की जिम्मेदारी संभाली है. 'घर-घर में हो शौचालय का निर्माण, तभी होगा बिटिया का कन्यादान' का नारा दिया था. इसके अलावा अश्विनी ने 11,000 महादलित परिवारों के लिए शौचालय बनवाए.
संंघ से नजदीकी का फायदा
जूलॉजी से ग्रेजुएट अश्विनी बिहार के बड़े ब्राह्मण नेताओं में गिने जाते हैं. संघ से नजदीकी है. माना जा रहा है कि बिहार और झारखंड में संघ का चेहरा होंगे. वो योग में भी रुचि रखते हैं.बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं

बयानों के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अश्विनी चौबे पर केस दर्ज करवाया था.
अश्विनी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पूतना करार दिया था. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को विदेशी तोता कहा था. 2015 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से बक्सर में उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया गया था.
हाथ काटने की दी थी धमकी
अश्विनी चौबे जब नीतीश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे, तो उन्होंने डॉक्टरों को चेतावनी भरा बयान दिया था. चौबे ने सरकारी अस्पतालों के जूनियर डॉक्टरों से हड़ताल की स्थिति में हाथ काटने तक की धमकी दे डाली थी.मुस्लिम से नहीं मिलाया हाथ
अश्विनी चौबे ने मुस्लिमों से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था. बक्सर में ही एक कार्यक्रम के दौरान अश्विनी को मुस्लिम बहुल इलाके की स्थानीय जनता से मिलना था. लोगों ने जब हाथ बढ़ाया तो चौबे ने हाथ झटकते हुए कहा था कि हम हाथ नहीं मिलाते हैं, यहां से जाइए.केदारनाथ त्रासदी में खो दिए थे दोस्त

केदारनाथ में 2013 में हुई तबाही में सैकड़ों लोग मारे गएे थे.
अश्विनी चौबे जब 2013 में परिवार के साथ केदारनाथ का दर्शन करने गए थे, तो उस समय वहां भयानक बाढ़ आ गई थी. हादसे में 700 से अधिक लोग मारे गए थे. इस हादसे में उनके कई साथियों की भी मौत हो गई थी. वो इस हादसे में बाल-बाल बच गए थे. हादसे के बाद जब वो लौटे तो उन्होंने केदारनाथ त्रासदी नाम से एक किताब लिखी.
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