बोगेनविल की आज़ादी अभी पूरी नहीं हुई है. लेकिन इसके बहाने देश बनने की प्रक्रिया समझ लेते हैं. इस तस्वीर में बायीं ओर बोगेनविल के निवासी हैं, जो नए देश की मांग पिछले कई दशकों से करते आ रहे हैं. दायीं ओर 1997 में शान्ति समझौता साइन करते पापुआ न्यू गिनी और बोगेनविल के नेता हैं. (दोनों तस्वीरें: रायटर्स)
पापुआ न्यू गिनी. ऑस्ट्रेलिया के ठीक ऊपर स्थित एक देश. कॉमनवेल्थ देशों की लिस्ट में इसका नाम भी आता है. बस अंतर यही है कि इसकी मुखिया क्वीन एलिज़ाबेथ-2 (इंग्लैण्ड की रानी) हैं. इस देश के पास टापुओं का एक झुण्ड है. इसका नाम है बोगेनविल. पिछले कई सालों से ये पापुआ न्यू गिनी से आज़ाद होने की मांग कर रहे थे. 2001 में पापुआ न्यू गिनी ने वादा किया था कि इनको नया देश बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे.
अब यहां वोटिंग हुई है, और इस क्षेत्र के 98 फीसद लोगों ने नया देश बनने के पक्ष में वोट दिया है. हालांकि एक नया देश बनने में बोगेनविल को अभी भी बहुत समय लगेगा.
बोगेनविल के लोगों ने पिछले कई दशकों से अपनी अलग पहचान के लिए संघर्ष किया है. इस वोटिंग के बाद भी यह पक्का नहीं है कि बोगेनविल को आज़ादी मिलेगी ही पापुआ न्यू गिनी से. (तस्वीर: रायटर्स)अप सोच रहे होंगे कि आखिर कैसे बनता है कोई भी देश. क्या कल को कोई भी क्षेत्र खुद को देश घोषित कर सकता है? हाल में ही आपने पढ़ा होगा कि भारत से फरार हुए स्वघोषित बाबा नित्यानंद ने भी नया टापू खरीद कर देश बनाने की बात कही है. उसका नाम कैलासा रखा जाएगा. क्या इस तरह देश बनाए जा सकते हैं?
जवाब है, नहीं. देश बनना इतना आसान नहीं होता. वैसे इसका कोई सेट फ़ॉर्मूला नहीं है कि नया देश बनने के लिए किसी एक ख़ास प्रक्रिया को ही फॉलो करना होगा. लेकिन हाल में बने जो देश हैं, उनको देखकर समझा जा सकता है कि आखिर ये प्रक्रिया कैसे पूरी होती है. आइये, समझते हैं कैसे बनता है कोई भी देश.
देश की परिभाषा.कोई भी क्षेत्र जिसकी अपनी सीमारेखा हो, उसकी राष्ट्रीयता से अपनी पहचान जोड़ने वाले लोग हों, जो इतिहास, संस्कृति, भाषा में से किसी एक कॉमन फैक्टर के ज़रिए आपस में जुड़े हों, जिसकी अपनी सरकार हो, उसे देश कहा जा सकता है.
26 दिसंबर 1933 को साइन किए गए मोंटेवीडियो कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय कानून किसी भी देश को तब देश के रूप में स्वीकार करता है जब उसके पास ये चार चीज़ें हों:
# एक स्थायी जनसंख्या
# दूसरे देशों के साथ संबंध स्थापित कर सकने की क्षमता
अब अगर किसी भी क्षेत्र को अपने आप को नया देश घोषित करना है, तो ज़ाहिर सी बात है कि जिस देश से अलग वो होना चाहता है, उसे अपने टेरिटरी का एक हिस्सा नए देश के निर्माण के लिए देना होगा. तो उसकी स्वीकृति मिलनी ज़रूरी है. जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश के बनने में भारत के उत्तर पश्चिम और उत्तर पूर्व के हिस्से अलग हुए. तो भारत की स्वीकृति के बिना नया देश नहीं बनता. क्योंकि आखिर नई टेरिटरी इसी देश से जो जानी थी.
सबसे पहले क्या करना होता है?सबसे पहले जिस क्षेत्र को अपनी संप्रभुता चाहिए होती है, वो इस बात की घोषणा करता है. कि हमें अलग होना है, और हम एक नए देश के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहेंगे. और ये साबित करने के लिए कि उस क्षेत्र में पड़ने वाले वाले लोग चाहते हैं कि नया देश बने, रिफ्रेंडम लिया जाता है. यानि लोगों से वोट कराते हैं. जैसा हमने अभी खबर में पढ़ा ऊपर कि बोगेनविल के 98 फीसद लोगों ने नया देश बनाने के पक्ष में वोट डाला. 181,067 कुल वोटों में से सिर्फ 3,043 लोगों ने बोगेनविल के अलग होने के खिलाफ वोट डाला. ये वो लोग हैं जो चाहते हैं कि बोगेनविल पापुआ न्यू गिनी के साथ ही बना रहे, बस उसे थोड़ी ज्यादा स्वायत्तता दे दी जाए.
बोगेनविल का मैप. (तस्वीर: विकिमीडिया कॉमन्स)आपके पास एक चुनी हुई सरकार होनी चाहिए. अब आपने घोषित कर दिया कि आप आज़ाद होना चाहते हैं. अपनी स्वतंत्रता क्लेम करने के बाद अब ये दूसरे देशों पर निर्भर करता है कि वो आपको रिकग्नाइज करते हैं या नहीं.
उदाहरणअपनी स्वतंत्रता घोषित करने के बावजूद फिलिस्तीन या कोसोवो जैसे क्षेत्रों को दूसरे देश पहचान देने को तैयार नहीं हैं. इसलिए जब कोई नया देश घोषित किया जाता है, तो दूसरे देशों द्वारा उसे रिकग्निशन देना बेहद ज़रूरी हो जाता. जब तक ये नहीं होगा, नया देश उनके साथ किसी भी तरह की रिलेशनशिप नहीं रख सकता. जबकि देश कहलाने के लिए क्वालीफाई करने को ये शर्त पूरी करनी बेहद ज़रूरी है.
स्वतंत्रता घोषित कर दी, उसके बाद संप्रभुता भी ले ली. यानी ऐसा देश घोषित कर दिया खुद को जो बाहरी किसी भी प्रभाव से मुक्त है. जिसके अंदरूनी मामलों में किसी भी दूसरे देश/ संस्था का कोई हस्तक्षेप नहीं है. उसके बाद यूनाइटेड नेशंस का सदस्य बनना अगला स्टेप होता है. किसी कानून में ये नहीं लिखा. लेकिन उसका सदस्य बनने से वैलिडेशन की तरफ एक कदम और बढ़ जाता है, किसी भी देश के लिए. ऐसा इंटरनेशनल रिलेशंस के जानकारों का कहना है.
न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में शान्ति समझौता साइन करते पापुआ न्यू गिनी (सबसे बाएं) और बोगेनविल रिवोल्यूशन आर्मी (सबसे दाएं) के लीडर्स. बीच में न्यूजीलैंड के प्रतिनिधि बैठे हैं. ये साल 1997 की तस्वीर है. (तस्वीर: रायटर्स)हाल में ही बने नए देश रहे एरिट्रिया (इथियोपिया से अलग होकर), ईस्ट तिमोर (इंडोनेशिया से अलग होकर) और साउथ सूडान (सूडान से अलग होकर). इनमें से अधिकतर इसलिए अलग हो पाए क्योंकि इनके देश में काफी हिंसा चल रही थी इनके अलगाव को लेकर. इन सभी देशों में अलग होने की हामी भरने वाले देशों ने ऐसा इसलिए किया ताकि अलगाव के बदले शान्ति समझौते किए जा सकें.
ऐसा ही कुछ हाल बोगेनविल का भी रहा. जब 1975 में पापुआ न्यू गिनी ने ऑस्ट्रेलिया से स्वतंत्रता लेकर खुद को नया देश घोषित किया, तभी से बोगेनविल के लोग अपने लिए एक अलग देश की मांग करते आए हैं. बोगेनविल के टापुओं में पंगुआ नाम की खदान है. सोने और ताम्बे की. इस खदान से पापुआ न्यू गिनी की अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा चलता था. बोगेनविल के लोगों का मानना था कि उनकी इस खदान का फायदा उन्हें होना चाहिए. पापुआ न्यू गिनी को नहीं. इसको लेकर बोगेनविल के लोगों और पापुआ न्यू गिनी की सरकार के बीच लड़ाई छिड़ गई. इस गृह युद्ध में बोगेनविल के तकरीबन 20,000 लोग मारे गए. पूरी जनसंख्या का दस फीसद.
बोगेनविल रिवल्यूशन आर्मी के गुरिल्ला योद्धा. (तस्वीर: Getty Images)इसे रोकने के लिए दोनों तरफ के लीडरों ने एक समझौता किया. समझौते में ये कहा गया कि बोगेनविल को एक अलग सरकार बनाने का मौका दिया जाएगा. इसके बनने के 10 से 15 साल बाद रिफ्रेंडम होगा. उस रिफ्रेंडम के आधार पर फिर पापुआ न्यू गिनी की सरकार निर्णय लेगी कि बोगेनविल को नया देश बनने के लिए अलग होने दिया जाएगा या नहीं. यानी इस वोटिंग के रिजल्ट बाध्य करने वाले नहीं हैं. अब पापुना न्यू गिनी की सरकार के ऊपर निर्भर करता है कि बोगेनविल को वो अलग होने की स्वीकृति देती है या नहीं. अगर ऐसा होता है तो बोगेनविल दुनिया का सबसे नया देश बन जाएगा.
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