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झुकते हैं ट्रंप, झुकाने वाला चाहिए, यूरोप ने कैसे कर दिखाया कारनामा!

Europe पर Donald Trump के सुर पूरी तरह बदल गए हैं. उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगाया गया tariffs वापस लेने की घोषणा कर दी. ऐसे में सवाल है कि आखिर ऐसा हुआ क्या अचानक, जो ट्रंप के तेवर ढीले पड़ गए. आखिर यूरोप ने ट्रंप को मनाया कैसे. या फिर यूं कहें कि टैरिफ पर ट्रंप को झुका कैसे लिया.

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ट्रंप ने यूरोप पर लगाया गया 10% एक्स्ट्रा टैरिफ वापस ले लिया है. (Photo: ITG/File)

पूरी दुनिया को टैरिफ से धमकाने वाले ट्रंप इन दिनों यूरोप के पीछे पड़े थे. ग्रीनलैंड हथियाने की सनक पाले ट्रंप ने पूरे यूरोप में उथल-पुथल मचा दी. ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कई यूरोपीय देशों पर 10% की टैरिफ लगा दी. इसे 25% तक करने की भी बात कही. यहां तक कि ट्रंप के तेवर देखकर लग रहा था कि कहीं वह ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए हमला न कर दें.

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लेकिन पिछले 24 घंटे में ट्रंप के सुर अचानक से बदल गए. उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगाया गया टैरिफ वापस लेने की घोषणा कर दी. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में बोलते हुए यह भी साफ कर दिया कि वह ग्रीनलैंड पर सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे. यानी वहां हमला करने की उनकी कोई योजना नहीं है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ऐसा हुआ क्या अचानक, जो ट्रंप के तेवर ढीले पड़ गए. आखिर यूरोप ने ट्रंप को मनाया कैसे. या फिर यूं कहें कि टैरिफ पर ट्रंप को झुका कैसे लिया.

यूरोप ने ट्रेड डील रोकी 

इसके 2 कारण फिलहाल समझ आ रहे हैं. पहला है ट्रेड डील पर रोक. बुधवार, 21 जनवरी को यूरोप ने अमेरिका के साथ जुलाई 2025 में हुई ट्रेड डील को लागू करने पर रोक लगा दी. रॉयटर्स के मुताबिक यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने इसका ऐलान करते हुए कहा,

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ट्रंप की नए टैरिफ की धमकियों ने Turnberry Deal (अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ट्रेड डील का नाम) को तोड़ दिया है. इसलिए इसे अगली सूचना तक रोक दिया जाएगा.

रॉयटर्स के अनुसार यूरोपीय संसद में अमेरिकी सामानों पर इम्पोर्ट ड्यूटी हटाने के प्रस्तावों पर बहस चल रही थी. जैसा कि दोनों के बीच ट्रेड डील में समझौता हुआ था. कई सांसद इसे एकतरफा बता रहे थे. इसी मुद्दे पर यूरोपीय संसद में 26-27 जनवरी को वोटिंग होनी थी. लेकिन इस बीच ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप के कई देशों पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया. इससे नाराज कई सदस्यों ने फिलहाल इस वोटिंग को स्थगित करने का फैसला लिया.

माना जा रहा है कि इस प्रस्तावित ट्रेड डील से यूरोप अगर पीछे हटता है तो अमेरिका को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. क्योंकि डील में अमेरिका के हित में कई प्रावधान थे. इसके अलावा गॉर्जियन के अनुसार यूरोप के देश इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि अमेरिकी एक्सपोर्ट पर जवाबी टैरिफ लगा दिया जाए. या फिर अमेरिका के खिलाफ एंटी-कोर्सियन इंस्ट्रूमेंट एक्टिवेट कर दिया जाए. इसके तहत यूरोप में अमेरिकी सामानों पर एंट्री पर रोक लग जाती. इन कदमों ने ट्रंप को अपने टैरिफ वाले फैसले से पीछे हटने पर मजबूर किया होगा.

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ग्रीनलैंड पर डील

ट्रंप के सुर बदलने की दूसरी सबसे बड़ी वजह है कि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर NATO और यूरोप के साथ डील कर ली है. इसकी घोषणा खुद ट्रंप ने की. ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट के साथ बातचीत के बाद ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र में भविष्य की डील का फ़्रेमवर्क बनाया है. ट्रंप ने पोस्ट में लिखा,

NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूट के साथ हुई बहुत ही प्रोडक्टिव मीटिंग के आधार पर, हमने ग्रीनलैंड और, असल में, पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य की डील का फ़्रेमवर्क बनाया है. अगर यह समाधान पूरा होता है, तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका और सभी NATO देशों के लिए बहुत अच्छा होगा. इस समझ के आधार पर, मैं 1 फरवरी को लागू होने वाले टैरिफ नहीं लगाऊंगा. गोल्डन डोम के संबंध में अतिरिक्त चर्चाएं की जा रही हैं, क्योंकि यह ग्रीनलैंड से संबंधित है. जैसे-जैसे चर्चाएं आगे बढ़ेंगी, और जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़, और ज़रूरत के हिसाब से अन्य लोग, बातचीत के लिए ज़िम्मेदार होंगे. वे सीधे मुझे रिपोर्ट करेंगे.

यानी कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप को उनकी मनचाही कोई डील मिल गई है, इसीलिए यूरोप पर भी तेवर उन्होंने नरम कर दिए हैं. यह डील असल में होगी क्या, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी ज्यादा नहीं दी गई है. लेकिन ब्रिटेन की मीडिया टेलीग्राफ ने एक आर्टिकल में संभावित कदम जरूर बताए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दावोस में हुए एक प्रस्तावित समझौते के तहत, अमेरिका ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों पर अमेरिका का कंट्रोल हो जाएगा और अमेरिका वहां अपना मिलिट्री बेस बनाएगा.

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द टेलीग्राफ ने बताया कि यह ड्राफ्ट फ्रेमवर्क, ब्रिटेन और साइप्रस के बीच हुए समझौते जैसा ही होगा, जहां ग्रीनलैंड में अमेरिकी बेस को अमेरिकी क्षेत्र माना जाएगा. फ्रेमवर्क पर बुधवार, 21 जनवरी की शाम को डोनाल्ड ट्रंप और नाटो के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रूट ने सहमति जताई. हालांकि ट्रंप ने कुछ इंटरव्यूज में समझौते की शर्तों को बताने से इनकार कर दिया. 
 

वीडियो: दुनियादारी: डॉनल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड प्लान उल्टा पड़ जाएगा?

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