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अब बंगाल में ममता बनर्जी के नेता की रैली में गूंजा- ‘गोली मारो ** को’

जानिए BJP का क्या रिएक्शन रहा.

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जब BJP के एक नेता ने मंत्री रहते हुए ये नारा लगाया था तो उनकी तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया था. क्या ममता बनर्जी उदाहरण पेश कर पाएंगी? (फाइल फोटो- PTI)
BJP Bengal के ट्विटर हैंडल से 20 जनवरी को एक वीडियो ट्वीट किया गया. वीडियो में कुछ लोग नारा लगा रहे हैं – बंगला के गद्दारों को, गोली मारो ** को. वही नारा जो साल 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में सुनाई दिया था. तब आरोप भाजपा समर्थकों पर था. अबकी आरोप भाजपा ने लगाया है, तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों पर. वीडियो ट्वीट करने के साथ भाजपा ने लिखा –
“TMC एक शांतिपूर्ण रैली कह रही थी, लेकिन इसके दौरान हिंसा हुई, BJP के झंडे-पोस्टर फाड़े गए. दक्षिण कोलकाता की ‘शांतिपूर्ण रैली’ के दौरान ‘गोली मारो ** को’ के नारे लगाए गए.”
वीडियो सामने आते ही बंगाल के मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहा –
“हम इसका बिल्कुल भी समर्थन नहीं करते. हर रैली में कुछ युवा अतिउत्साही समर्थक रहते हैं, लेकिन उनके इस तरह के काम का हम समर्थन नहीं करते. ये BJP का नारा है, जो उनके केंद्रीय मंत्री ने भी लगाया था. मैं ये पता लगवा रहा हूं कि क्या वे वाकई में TMC समर्थक थे या कहीं से रैली में घुसपैठ की थी.”
वहीं TMC नेता मदन मित्रा तो अभी भी आक्रामक मोड में हैं. उन्होंने कहा –
“क्या गोली मारो का नारा? कल तो मेरे ऊपर फायरिंग की गई. कोई नारा नहीं, असली फायरिंग. जय श्री राम के नारे लगाकर कौन हिंसा कर रहा है? अगर वो इतनी हिंसा कर सकते हैं तो मुझे भी तो सेल्फ डिफेंस का अधिकार है.”
वहीं कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी का कहना है –
“मैंने तो हमेशा कहा है कि TMC और BJP एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दोनों की राजनीति एक जैसी है. दोनों पार्टियों के DNA में कोई अंतर नहीं है. अनुराग ठाकुर ने मंत्री रहते हुए ये नारा लगाया था और BJP ने उन्हें हटाया तक नहीं था. यही काम अब कोलकाता में TMC कार्यकर्ताओं ने किया है.”
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले राज्य से राजनीतिक हिंसा की तमाम छोटी-बड़ी ख़बरें आ रही हैं. ऐसे में इस तरह के उन्मादी नारे माहौल को और भी बिगाड़ने का काम कर सकते हैं. दिल्ली में जब अनुराग ठाकुर ने मंत्री रहते हुए एक सभा में ये नारा लगाया था तो उन पर पार्टी ने या सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की थी. वो ग़लत था. लेकिन उस वाकये को बाकी पार्टियां एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर सकतीं. कि उनकी रैली में कोई भी आकर उन्मादी नारे लगाए और वो पार्टी के मुखिया इस बहाने की आड़ लेकर उसे बख़्श दें. वो भी ग़लत था. ये भी ग़लत है.

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