इंस्टाग्राम खोलो तो एक चीज हमको पक्का नज़र आती है. 'ये हैं मोहब्बतें' के छोटे-छोटे वीडियो और फोटोज. वो जो एक बच्ची है और उसकी मम्मी की फोटो. ऐसा ही टीवी के सास बहू और समवन वाले जो खबरिया शो आते हैं. उनमें भी एक चीज पक्का दिखती है. इशिता मां. और इशिता मां कौन है. दिव्यांका त्रिपाठी. अभी कुछ दिन पहले जब उनकी शादी हुई, तो पूरा सोशल मीडिया उनकी कलरफुल फोटोज से पट गया था. दिव्यांका का 14 दिसंबर को जन्मदिन होता है. उनको हमने सबसे पहले 'बनूं मैं तेरी दुल्हन' में देखा था. तब हम बहुत छोटे थे. वो भी बहुत कम उम्र की थीं. धीरे-धीरे उनने बहुत काम किया मिसेज शर्मा भी बनीं थीं. चिंटू चिंकी वाले शो में भी तो आती थीं. हमने उनसे कुछ सवाल पूछे थे. उनका जवाब भी आ गया.
पहले तो हमने पूछा, बचपन का नाम लेते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है?
दिव्यांका ने कहा, "बचपन का नाम लूं तो मेरी दीदी प्रियंका, भाई ऐश्वर्य, मम्मी-पापा. हम पांच लोग साथ में जो वक़्त बिताते थे, उसमें मजा आता था. मैं कभी बहुत दोस्तों के साथ नहीं रहती थी, हमेशा से फैमिली पर्सन थी. फैमिली के साथ वक़्त बिताना अच्छा लगता था. मैं अब भी अपने परिवार को बहुत याद करती हूं, बचपन के नाम से तो बस घर वाले याद आते हैं."
फिर हमको लगा ये भी पूछना चाहिए कि दिव्या नाम तो बहुत सुना है, दिव्यांका के पीछे क्या राज़ है. ये किसने रखा?
दिव्यांका बोलीं. "दिव्यांका प्रियंका के साथ राइम करता था, प्रियंका मेरी बड़ी बहन का नाम था. वो सबकी फेवरेट थी. पापा पांच भाई थे, उन पांच पांडवों के बाद वो पहली लड़की घर में आई थी. और पापा के सारे भाइयों के नाम नरेंद्र, नागेंद्र, बृजेंद्र मतलब इंद्र वाले थे. तो इस चक्कर में हमारे नाम भी ऐसे थे कि राइमिंग ही हों. तो मेरे चाचा जी ये नाम लेकर आए. उन्होंने कहा वो प्रिय थी इसलिए प्रियंका थी, ये दिव्य होगी इसलिए इसका नाम दिव्यांका. मेरी मां ने भी उनका साथ दिया. घर के बड़े-बुजुर्गों का सोचना था कि एक बेटी पहले से है, तो दूसरा बेटा होना चाहिए. लेकिन मां ने कहा, नहीं बेटी है तो क्या, वो कुछ बड़ा करेगी, भव्य करेगी. ये और बात है कि मैं बचपन में कुछ खास नहीं थी, न सबकी फेवरेट थी. लड़कों जैसी थी. लेकिन मम्मी को बड़ी आशाएं थीं, उनने इस नाम के लिए हां कर दी और नाम पड़ गया दिव्यांका."
इसके बाद दिव्यांका ने इस नाम का मतलब भी बताया.
दिव्यांका का अर्थ है, एक शख्स जो दिव्य हो या जिसकी गोद दिव्य हो.
एक्टिंग के बारे में कभी सोचा था?
दिव्यांका ने बताया एक्टिंग को तो बस एक ज्ञान की तरह लेना चाहती थीं, भोपाल में जब वो थीं तो काफी एक्स्ट्रा एक्टिविटीज में पार्ट लेती थीं. NCC में थी. पर्वतारोहण सीखा है. रायफल शूटिंग में बहुत अच्छी रही हैं. पैरासेलिंग, वॉटरस्कीइंग. ये बहुत सारी चीजें सीखीं, उसमें एक्टिंग भी थी. भोपाल से ही बड़े ऑफर आने लगे थे. एक-दो रियलिटी शो थे, मिस भोपाल भी बन गईं थीं. दिव्यांका बताती हैं, "ज़ी टीवी का ज़ी क्वीन टीन कॉन्टेस्ट था. वहां मिस ब्यूटीफुल का खिताब मिल गया. दूरदर्शन भोपाल की कई टेलीफिल्म्स कर लीं. ऑल इंडिया रेडियो में सिर्फ सीखने के लिए खूब फ्रीलांस एंकरिंग कर ली. ज़ी सिने स्टार्स की खोज और सहारा का एक रियलिटी शो भी कर लिया. पर सीन ये था कि भोपाल में रहकर आप एक्टिंग कर नहीं सकते थे, और मुंबई आने का सोचा नहीं था, भोपाल से इतना प्यार था." जब ये सबक किया तो ये सारे एक्सपीरियंस एक्टिंग की ओर धकेलते गए. वर्ना तो मैं आर्मी ऑफिसर बनना चाहती थी. कॉलेज में तीसरे साल ही आर्मी और UPSC के एक्जाम देना चाहती थी. लेकिन तब तक यहां मुंबई से 'बनूं मैं तेरी दुल्हन' का ऑफर आ गया. इन्होंने मेरी टेलीफिल्म देखीं थीं. पहले तो हमें मुंबई शहर पर भरोसा नहीं था, लेकिन हमने जब यहां आकर अनुभव लिया. तो पता चला लोग बहुत अच्छे हैं, हम अच्छे हैं तो दुनिया हमारे साथ अच्छी है. और इस तरह से अपना करियर शुरू कर दिया. ये सोचकर कि छह महीने काम करने के बाद भोपाल वापस जाकर शादी-वादी कर लूंगी. लेकिन वो हो ही नहीं पाया. वो सीरियल तीन साल चला और काम का तांता लगा रहा."
अरे ओ निशानची, वो आ रही है वो, इशिता मॉम