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सुरक्षा के मोर्चे पर भारत 'लकी नहीं', राजनाथ सिंह के इस बयान के क्या मायने हैं?

रक्षा मंत्री Rajnath Singh मध्य प्रदेश के महू आर्मी कैंटोनमेंट (Mhow Cantonment) में सेना के जवानों को संबोधित कर रहे थे.

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महू कैंटोनमेंट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फोटो- X/Rajnath Singh)

'भारत सुरक्षा के फ्रंट पर कभी 'लकी' नहीं रहा'. ये बयान है भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का. रक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के महू में आर्मी कैंटोनमेंट (Mhow Cantonment) में सेना के जवानों को संबोधित कर रहे थे. उसी दौरान उन्होंने ये बयान दिया. महू, इंदौर से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां आर्मी वॉर कॉलेज, मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन और इंफैंट्री स्कूल है. इसके साथ ही यहां आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट भी है जहां स्नाइपर बनने के लिए चुने गए सैनिकों की भी ट्रेनिंग होती है.

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इसी दौरान रक्षा मंत्री ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा,

“अगर सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो भारत कभी लकी नहीं रहा. वजह, हमारे उत्तर और पश्चिम की सरहदों पर हमेशा चुनौतियां बनी रहती हैं.”

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रक्षा मंत्री ने आगे कहा

"इस देश का रक्षा मंत्री होने के नाते मैं आपसे कहना चाहता हूं कि हमें हमेशा चौकन्ना रहना. ये समय शांतिकाल का है. पर जब मैंने आपके अनुशासन और ट्रेनिंग को देखा, मुझ पर इसका गहरा असर हुआ. जिस समर्पण के साथ आप ट्रेनिंग कर रहे हैं, वो अपने आप में किसी युद्ध से कम नहीं है."

इस कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री के साथ सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी मौजूद रहे. उन्होंने पहले डॉ भीमराव आंबेडकर मेमोरियल का उद्घाटन किया. इसके बाद उन्होंने सेना के जवानों को संबोधित किया. अब यहां उठता है एक सवाल कि देश के रक्षा मंत्री के इस बयान के मायने क्या हैं? क्या फौज, खासकर एयरफोर्स के लिए हथियारों, जहाजों की देरी हमारी चुनौती बढ़ा रही है?

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इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 में ही रक्षा मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई है. ये कमेटी इंडियन एयरफोर्स में विमानों, हथियारों और उपकरणों की कमी पर काम करेगी. इस कमेटी के चेयरमैन भारत के रक्षा सचिव होंगे. साथ ही इस कमेटी में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) के चेयरमैन डॉ समीर वी कामत और एयरफोर्स के प्रतिनिधि शामिल होंगे. यानी रक्षा मंत्रालय भी ये मान रहा है कि हथियार, जहाज और उपकरण मिलने में देरी हो रही है. तभी ये कमेटी बनाई गई है. 

अपने बयान में रक्षा मंत्री ने उत्तर और पश्चिम की सीमाओं का जिक्र किया. ये बताने की जरूरत नहीं कि उत्तर की सीमा पर चीन और पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान है. पाकिस्तान से भारत 4 बार जंग लड़ चुका है. वहीं चीन से 1962 के बाद जंग तो नहीं हुई, पर सीमा पर अक्सर तनाव की ख़बरें सामने आती रहती हैं. गलवान घाटी गतिरोध की यादें तो अब तक ताज़ा हैं. 

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चीन का J 26 विमान  (PHOTO- X/Social Media)

भारत के ये दोनों पड़ोसी देश लगातार अपनी सैन्य क्षमता में वृद्धि कर रहे हैं. 26 दिसंबर, 2024 को चीन ने अपने सबसे उन्नत फाइटर जेट J-36 को दुनिया के सामने रखा है. ये दुनिया में छठी पीढ़ी का पहला फाइटर जेट है. वहीं भारत को देखें तो इंडियन एयरफोर्स के पास सबसे एडवांस फाइटर जेट, फ्रेंच कंपनी डसॉल्ट द्वारा बनाया गया राफेल है. राफेल एक 4.5 जेनरेशन का जहाज है. और कुछ दिनों पहले ही मीडिया रिपोर्ट्स आई हैं कि पाकिस्तान, चीन से उसके 5th जेनरेशन फाइटर जेट, J-35 को खरीदने वाला है.

अगर पाकिस्तान J-35 खरीदता है तो निश्चित तौर पर भारत के लिए ये बड़ी चुनौती होगी. भारत का पांचवीं पीढ़ी का जेट एडवांस मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) अब भी निर्माणाधीन है. किसी भी सूरत में इसकी पहली उड़ान 2027 से पहले संभव नहीं है. साथ ही भारत के जहाजों की स्क्वाड्रन में गिरावट और नए जेट्स की खरीद में देरी भारत को रेस में स्लो कर सकती है.

इन दोनों देशों की चुनौतियों के अलावा एक और नई चुनौती भी सिर उठा रही है जिसके बारे में रक्षा मंत्री ने सीधे तो कुछ नहीं कहा. हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश की. बीते कुछ महीनों से बांग्लादेश में आई राजनीतिक अस्थिरता में पाकिस्तान को एक मौका दिख गया है. खबर आई है कि 1971 के बाद पहली बार पाकिस्तान की सेना, बांग्लादेश की सेना को ट्रेनिंग देगी. लिहाजा 1971 के बाद बांग्लादेश के अस्तित्व में आने के बाद से पहली बार पाकिस्तान की प्रत्यक्ष रूप से मौजूदगी, भारत के लिए चिंता का विषय है. 

(यह भी पढ़ें:भारत की फौजों को इन हथियारों की सख्त दरकार, फिर क्यों देरी कर रही है मोदी सरकार?)

हमारे सैनिकों के हौसले में निश्चित तौर पर कोई कमी नहीं है. कारगिल जैसी मुश्किल लड़ाई को भी उन्होंने बखूबी लड़ा. पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सफल सर्जिकल स्ट्राइक की. पर जैसा कि रक्षा मंत्री कह रहे हैं, भारत बहुत 'लकी' नहीं रहा है. अगर ऐसा है तो भारत के को अपनी मिलिट्री क्षमता में इजाफा करने के लिए अटकी हुई मिलिट्री डील्स पर तेजी से काम करना होगा. अगर रफ्तार ऐसी ही रही तो भारत के सामने चुनौतियां और बढ़ सकती हैं.  

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