जानिए, आपको कब लगेगी कोरोना की वैक्सीन?
स्वास्थ्यकर्मियों और फ़्रंटलाइन वर्कर्स के बाद आएगा आम जनता का नम्बर.
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कोरोना की वैक्सीन की कमी क पूरा करने के लिए भारत सरकार ने विदेशों में पहले से इमरजेंसी इस्तेमाल का अप्रूवल पा चुकी वैक्सीन को भारत लाने का मन बना लिया है. सांकेतिक तस्वीर.
इस सप्ताह के ख़त्म होते होते देश के कई हिस्सों में कोरोना की वैक्सीन लोगों को लगनी शुरू हो जाएगी. नरेंद्र मोदी ने 11 जनवरी को देश के नाम संदेश में इस बारे में बताया. कहा कि सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना का टीका लगाया जाएगा, और उसके बाद ये सफ़ाईकर्मियों को लगाया जाएगा. सनद रहे कि कोरोना का वैक्सीनेशन प्रोग्राम भारत का पहला और सबसे व्यापक वैक्सीनेशन प्रोग्राम है, जिसमें वयस्कों को वैक्सीन लगाई जाएगी. इसके पहले के टीकाकरण कार्यक्रमों में बच्चों को भिन्न-भिन्न वैक्सीन लगाई गई थी.
तो देश में तैयारियां क्या हैं? किस राज्य में वैक्सीन को लेकर क्या बहस चल रही है? क्या किसी राज्य का वैक्सीन प्रोग्राम यूनिक है? क्या वैक्सीन प्रोग्राम किसी राजनीतिक बहस के साये में है? आइए देखते हैं.
पश्चिम बंगाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया है कि पश्चिम बंगाल में सभी लोगों को कोरोना की वैक्सीन बिना पैसे के उपलब्ध कराई जाएगी. इसके साथ ही फ़्रंटलाइन वर्करों और स्वास्थ्य कर्मियों को ममता बनर्जी ने खुला ख़त लिखा है. कहा है कि उन्हें सबसे पहले कोरोना की वैक्सीन लगाई जाएगी.
बंगाल में चंद महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. बिहार चुनाव 2020 के समय बीजेपी ने कोरोना की फ़्री वैक्सीन देने का दावा करके बहुत हेडलाइन बटोरी थी. ऐसे में जानकार मानते हैं कि ममता बनर्जी का फ़्री वैक्सीन का दांव ऐन टीकाकरण कार्यक्रम के समय आया है, जिसका ममता बनर्जी फ़ायदा उठाने की ज़रूर कोशिश करेंगी.
दिल्ली
दिल्ली के स्वास्थ्यमंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि दिल्ली में 89 जगहों को चिन्हित किया गया है. इन सभी 89 जगहों पर कोरोना की वैक्सीन 16 जनवरी से लगायी जाएगी. ये 89 जगहें केंद्र सरकार द्वारा देशभर में बनाए गए 5 हज़ार टीकाकरण केंद्रों में शामिल हैं. 89 जगहों में 40 सरकारी अस्पताल हैं, तो 49 प्राइवेट अस्पताल.
दिल्ली में भी सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों और फ़्रंटलाइन वर्करों को टीके लगाए जायेंगे. ये संख्या लगभग 9 लाख के आसपास बनती है. ख़बरें बताती हैं कि 12 और 13 जनवरी को दिल्ली में वैक्सीन की एक खेप आ जाएगी. शुरुआती ट्रेनिंग और मैनेजमेंट के बाद वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
राजस्थान
स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा. उन्होंने बताया है कि प्रदेश में कुल 282 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं. और सारी तैयारियां कर ली गई हैं. केंद्र सरकार द्वारा बनाई SOP के मुताबिक़, राजस्थान में भी सबसे पहले कोरोना की वैक्सीन स्वास्थ्यकर्मियों को लगाई जाएगी. और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या बैठती है लगभग 4.5 लाख के आसपास. इसके अलावा रघु शर्मा ने ये भी जानकारी दी है कि कोरोना की वैक्सीन को जयपुर, उदयपुर और जोधपुर में स्टोर किया जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इन तीन जिलों में एयरपोर्ट और हवाईयात्रा की सुविधा उपलब्ध है. सरकार ने ये भी जानकारी दी है कि 5 हज़ार से ज़्यादा वैक्सीनकर्मियों को ट्रेनिंग दे दी गई है. साथ ही सभी पात्रों का COWIN पर रजिस्ट्रेशन भी करा दिया गया है.
गुजरात
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी. उन्होंने जानकारी दी है कि केंद्र सरकार के SOP के मुताबिक़, सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों और फ़्रंटलाइन वर्करों को वैक्सीन लगायी जाएगी. और सरकार ने ये भी दावा किया है कि प्रदेश के सवा करोड़ लोगों का डेटाबेस भी तैयार कर लिया गया है.
इस काम में कुल लगेंगे 16 हज़ार लोग. उन्होंने बताया है कि प्रांत में कुल छह जगहों पर कोरोना की वैक्सीन को स्टोर करने की व्यवस्था बनायी जा रही है.
यूपी
यूपी में एक के बाद एक ड्राई रन हो रहे हैं. इस ड्राई रन में बनारस से एक बड़ी प्रशासनिक चूक सामने आयी थी. चूक ये कि इस ड्राई रन में एक साइकिल सवार डमी वैक्सीन लेकर वैक्सीन केंद्र तक जा रहा था. कुल तीन ड्राई रन प्रदेश में किए जा चुके हैं. सरकारी दावे बताते हैं कि यूपी देश में अकेला ऐसा राज्य है, जहां टीकाकरण को लेकर 3 ड्राई रन किए गए हैं. बहरहाल यूपी में भी वैक्सीनेशन की प्रक्रिया 16 तारीख़ से शुरू हो जाएगी. ख़बरों की मानें तो प्रदेश में कुल 1500 केंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों को वैक्सीन लगाई जाएगी. इन 1500 में से अकेले सूबे की राजधानी लखनऊ में ही 61 वैक्सीन केंद्र हैं.
बिहार
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने जानकारी दी है कि प्रदेश में मौजूद 4.68 लाख स्वास्थ्यकर्मियों को सबसे पहले कोरोना की वैक्सीन लगायी जाएगी. 14 जनवरी तक वैक्सीन की खेप पटना पहुंच जाएगी. इसके बाद जगह-जगह पर मौजूद टीकाकरण केंद्रों तक वैक्सीन भेजी जाएगी. हर वैक्सीन केंद्र पर रोज़ 100 लोगों को वैक्सीन लगायी जाएगी. और बिहार सरकार ने कहा है कि हर टीकाकरण केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से पांच स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती रहेगी. और बिहार में कुल मिलाकर ऐसे 300 टीकाकरण केंद्रों की स्थापना की गयी है. इन राज्यों के अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गोवा, पूर्वोत्तर, दक्षिण भारत के राज्य भी हैं, जहां वैक्सीन को लेकर तमाम तैयारियां की जा रही हैं.
पहला फ़ेज़ कब तक चलेगा?
5 हज़ार टीकाकरण केंद्र. और हर केंद्र पर रोज़ 100 लोगों को वैक्सीन का पहला डोज़ दिया जाएगा. कुल वैक्सीन लेने वाले लोग 3 करोड़. ऐसे में पहले फ़ेज़ का टीकाकरण पूरा होते-होते लगभग 60 दिनों का समय लग जाएगा. ये तो मोटामोटी गणित है. ख़बरें बताती हैं कि इन 3 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगवाने का केंद्र सरकार ने अगस्त तक का लक्ष्य रखा हुआ है. केंद्र सरकार ने साफ़ किया है कि वो पहले फ़ेज़ के टीकाकरण का ही मूल्य चुकाएगी. बाद के वैक्सीन के डोज़ राज्यों को मैनेज करने होंगे.
स्वास्थ्यकर्मियों के बाद कौन आएगा?
स्वास्थ्यकर्मियों और फ़्रंटलाइन वर्करों के बाद 50 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जाएगी. ध्यान रहे कि ये वैक्सीन देश में इमरजेंसी अप्रूवल के तहत लगायी जा रही है. यानी वैक्सीन सबसे पहले अर्ह लोगों को दी जाएगी. जनरल पब्लिक का नंबर बहुत बाद में आएगा. संभवत: वैक्सीन के जनरल यूज का परमिशन मिलने के बाद. और क़यास लगाए जा रहे हैं कि ये समय सीमा एक साल तक जा सकती है.
कौन-सी वैक्सीन लगायी जाएगी?
भारत में दो वैक्सीन इस समय केंद्र में हैं. एक है ऑक्सफर्ड और Astrazeneca द्वारा विकसित और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा निर्मित कोविशील्ड. और दूसरी वैक्सीन है भारत बायोटेक द्वारा विकसित की गयी कोवैक्सीन. जहां कोविशील्ड अपने सारे ट्रायल और परीक्षणों में सफल रही है, कोवैक्सीन के बारे में ऐसा साफ़गोई से नहीं कहा जा सकता है. बहुत विवाद हुए हैं. ह्यूमन ट्रायल के तीसरे फ़ेज़ के नतीजे सामने नहीं आए हैं, फिर भी भारत सरकार ने इस्तेमाल की इजाज़त दे दी है. ऐसे में इस वैक्सीन की सेफ़्टी पर सवाल उठ रहे हैं. भोपाल के कई सारे लोगों ने आरोप लगाए हैं कि वो अस्पताल में अपना इलाज कराने गए थे, और उन्हें धोखे से ट्रायल की वैक्सीन लगा दी गयी. एक वालंटियर की मौत की ख़बर आने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इन मामलों पर जांच बिठा दी है.
फिर भी दोनों वैक्सीन लाइन में हैं. जहां सरकारी सूत्रों का कहना है कि लोगों को सबसे पहले कोविशील्ड लगायी जाएगी, और भारत बायोटेक की वैक्सीन बैकअप के लिए रखी जा रही है. लेकिन Economic Times की ख़बर मानें तो ये व्यवस्था कुछ दिनों तक ही रहेगी. ख़बर के मुताबिक़, जब तक भारत बायोटेक वैक्सीन की प्रचुर मात्रा पैदा नहीं कर लेता है, तब तक सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड लगायी जाएगी. कुछेक हफ़्तों के भीतर भारत बायोटेक की वैक्सीन भी शेल्फ़ पर आ जाएगी. तब ये वैक्सीन भी लोगों को लगायी जाएगी. लेकिन ख़बर में ये भी दावा किया गया है कि जिन्हें भारत बायोटेक की वैक्सीन लगायी जाएगी, उन्हें इसके बारे में बताया जाएगा. उनके आंकड़े इकट्ठा किए जायेंगे. शीशी पर भी कोवैक्सीन का नाम लिखा होगा. और टीकाकरण के बाद भी व्यक्ति पर नज़र रखी जाएगी.
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