जब तक ख़बरों को उनकी खबर होती. 2012 में उनने लगभग 25 नेशनल चैंपियनशिप जीत लीं थीं. शुरुआत की की बात है. उनकी नातिन जोहड़ी के फायरिंग रेंज में फायरिंग सीखने जाना चाहती थी. लेकिन अकेले जाने में सकुचा रही थी. डर रही थी. चंद्रो उसका साथ देने चली गईं. शूटिंग रेंज में चंद्रो ने भी पिस्तौल उठाई कुछ निशाने लगाए. नजर पड़ी फारुक पठान की 20वीं शताब्दी के आखिरी सालों में उनने ही ये जोहड़ी रायफल क्लब शुरू किया था. यहां से सैकड़ों बच्चे निकले. जिनने देश भर में निशाना साधा. झंडे गाड़ना पुराना हो चुका है. वहीं कोच भी थे. वो चंद्रो की स्किल्स देख चउआ ही गए. सधे हाथ थे, जमी नजर थी. एक शूटर होने के लिए जो चाहिए होता था, सब था. फारुक ने उन्हें क्लब ज्वाइन करने को कहा. दादी शूटर हो गई.

Source - mea.gov.in
दिल्ली में एक बार मुकाबला हुआ दिल्ली के डीआईजी से, दादी से डीआईजी भी हारे. दादी ने सोना जीता. डीआईजी फोटो खिंचाने के नाम से भाग गए. बार-बार कहा, कैसी फोटो? मैं एक औरत के हाथों हार गया. चंद्रो दादी ने वेटरन कैटेगरी के टोकरों मैडल जीते हैं.
सिर पर पल्लू, हाथ में मोटे कड़े, हरियाणे के पारंपरिक कपड़े और आंख में काला चश्मा लगाए, दादी जब फायर करती है तो कई-कई भरम टूटते हैं. फिर चाहे वो उम्र को लेकर हों या औरतों को लेकर. ऐसा भी नहीं कि हर कोई चंद्रो की कोशिशों के साथ खड़ा था. शुरू में लोग खिल्ली उड़ाते. कहते बुढ़िया इस उम्र में अब क्या कारगिल जाएगी. लेकिन कुछ करने के लिए हमेशा कारगिल जाने की जरूरत नहीं होती. ये बात कई लोगों को समझ लेनी चाहिए. आप जो कर रहे हैं उसमें बेस्ट होकर भी देश का उतना ही भला करते हैं.दादी के बेटी है. सीमा. वो भी शार्प शूटर. पहली इंडियन महिला थीं, जो शार्प शूटर भईं और राइफल और पिस्टल वर्ल्ड कप में मेडल जीता. साल था 2010. नातिन नीतू सोलंकी इंटरनेशनल शूटर हैं. विदेशों में खेलीं. पीछे 'शूटर दादी' का हाथ था ही.
उनके लिए निशानेबाजी करना सिंपल नहीं था. साथ में देवरानी प्रकाशी तोमर को भी तैयार किया. प्रकाशी 57 साल की थीं. बाद में उनने भी कम कमाल नहीं किए. उनके बारे में और बातें फिर कभी.
दादी कैमरे पर भी कमाल करती है. कलर्स टीवी है. ससुराल सिमर का दिखाता है. सिमर मक्खी हो जाती है. बिग बॉस में बाबा झगड़ता है. उसी कलर्स पर शो आता है. इंडिया गॉट टैलेंट. ये वहां भी दिखीं. जल्द ही हिस्ट्री चैनल पर OMG INDIA में दिखने वाली हैं. सत्यमेव जयते में भी नजर आईं.
उनको ढेरों सम्मान भी मिले. अभी गांव की लड़कियों को निशानेबाजी की ट्रेनिंग भी देती हैं. बाकी कई बच्चों का रास्ता भी उनको देख खुला.























