दास्तानगोई के क्लासिकल अंदाज को समझना हो तो ये किताब पढ़ लीजिए!
शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी की 'क़ब्ज़े ज़मां' का पुस्तक अंश.
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शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी के चर्चित उपन्यास क़ब्ज़े ज़मां का अंश पढ़िए.
शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी. उर्दू जगत के जाने-माने नाम. 25 दिसंबर 2020 को 85 साल की उम्र में इनका निधन हो गया था. सरस्वती सम्मान, साहित्य अकादमी और पद्म श्री से सम्मानित शम्सुर्रहमान की किताब क़ब्ज़े ज़मां की हिंदी अनुवाद आई है. यह उपन्यास उर्दू की क़िस्सागोई की बेहतरीन मिसाल है. इस उपन्यास की मुख्य विषय-वस्तु यह क़िस्सा है कि दिल्ली का एक सिपाही जिसका घर जयपुर के किसी गांव में था, अपनी लड़की की शादी के लिए रुपए-पैसे का बन्दोबस्त करके अपने घर को चला लेकिन रास्ते में उसे डाकुओं ने लूट लिया. फिर आगे कैसे क्या हुआ. इसके लिए आपको किताब पढ़नी होगी. शम्सुर्रहमान के इस उपन्यास में दास्तानगोई अपने क्लासिकल अन्दाज में मौजूद है. उन्होंने तुगलकों और मुग़लों के वक़्त को जीवन्त कर दिया है, बल्कि उस दौर की भाषा की उन तमाम बारीकियों को दर्ज किया है, जिन्हें अन्यत्र पाना मुश्किल है. अभी उसी किताब से अंश पढ़िए.
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