The Lallantop

कौन हैं बलवीर गिरि, जिन्हें नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी घोषित किया गया है?

बलवीर गिरि कभी आनंद गिरि के करीबी थे.

Advertisement
post-main-image
बलवीर गिरि महंत नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट में उत्तराधिकारी के रूप में लिया गया है. (फोटो-आज तक)
बलवीर गिरि, महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी होंगे. निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने गुरुवार 30 सितंबर को इसकी घोषणा की. यानी अब बलवीर गिरि बाघंबरी मठ की गद्दी संभालेंगे. पंचों की बैठक में हुआ फैसला तय कार्यक्रम के तहत 30 सितंबर को निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर की बैठक हुई. इसी में बलवीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी बनाए जाने का निर्णय लिया गया है. ये भी तय किया गया कि मठ के संचालन के लिए 5 सदस्यों वाले बोर्ड का गठन किया जाएगा. ये बोर्ड मठ की मर्यादा को बनाए रखने का काम करेगा. आजतक संवाददाता पंकज श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड अखाड़े के महंत की निगरानी भी करेगा. बोर्ड के 5 सदस्य अखाड़े से ही होंगे और देखेंगे कि महंत अखाड़े की जमीन ना बेच पाएं और परंपरा का निर्वहन करें.
बलवीर गिरि पर किसी तरह का आपराधिक मामला होने को लेकर भी चर्चा की गई. आजतक से जुड़े मुदित अग्रवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, अखाड़े का कहना है कि अगर बलवीर गिरि पर कोई आपराधिक मामला पाया गया तो 'परंपरा अनुसार कार्रवाई' की जाएगी. नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट में था नाम महंद नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट में बलवीर गिरि का नाम था. इसमें कहा गया था कि बलवीर गिरि को ही उनका उत्तराधिकारी बनाया जाए. खबरों के मुताबिक, नोट में लिखा था,
प्रिय बलवीर गिरि. मैंने तुम्हारे नाम एक रजिस्टर वसीयत की है. इसमें मेरे ब्रह्मलीन हो जाने के बाद तुम बड़े हनुमान मंदिर एवं मठ बाघंबरी गद्दी के महंत बनोगे. तुमसे मेरा एक अनुरोध है कि मेरी सेवा में लगे विद्यार्थियों का ध्यान रखना.
हालांकि अखाड़े के कुछ पदाधिकारियों ने कहा था कि अगला महंत कौन होगा, इसका फैसला हरिद्वार में संतों की बैठक में लिया जाएगा, चिट्ठी के आधार पर नहीं. हालांकि अब पंच परमेश्वर ने भी बलवीर के नाम पर मुहर लगा दी है. तो अब जानते हैं कि बलवीर गिरि कौन हैं, उनका नरेंद्र गिरि से क्या कनेक्शन है? कौन हैं बलवीर गिरि? अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कथित तौर पर 20 सितंबर को आत्महत्या कर ली थी. उन्हें 22 सितंबर को बाघंबरी मठ में भू-समाधि दी गई. इससे जुड़े सभी संस्कार बलबीर गिरि ने पूरे किए थे. वो नरेंद्र गिरि के पुराने शिष्य हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महंत नरेंद्र गिरि को श्रद्धांजलि देने जब प्रयागराज आए थे तो उन्होंने बलवीर गिरि से बातचीत की थी. उस दौरान बलवीर गिरि सीएम योगी आदित्यनाथ की बगल में बैठे थे.
Narendra Giri Maharaj Dead: Yogi Pays Tribute CM योगी के बगल में बलवीर गिरि. (फोटो-PTI)

बलवीर गिरि इस समय निरंजनी अखाड़े के उपमहंत हैं. वो हरिद्वार स्थित बिल्केश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्था का संचालन करते हैं. महंत नरेंद्र गिरि ने 10 साल पहले एक वसीयत तैयार की थी और उसे आनंद गिरि के नाम कर दिया था. वही आनंद गिरि जो इस समय अपने गुरु कि आत्महत्या के मामले में गिरफ्तार हैं, उनसे नाराजगी के बाद नरेंद्र गिरि ने वो वसीयत रद्द कर दी थी. बाद में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने बलवीर गिरि के नाम वसीयत कर दी थी.
दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बलवीर 1998 में निरंजनी अखाड़े के संपर्क में आए थे. नरेंद्र गिरि से उनका संपर्क साल 2001 में हुआ. उस वक्त नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े के कारोबारी महंत थे. उनके दीक्षा ग्रहण कर बलवीर उनके शिष्य हो गए.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलवीर गिरि उत्तराखंड के रहने वाले हैं. वो 2005 में संत बने थे और 2019 से बिल्केश्वर महादेव मंदिर की व्यवस्था देख रहे हैं. बलबीर गिरि और आनंद गिरि करीब-करीब एक ही समय के दौरान महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य बने थे.
महंत नरेंद्र गिरि ने बलबीर गिरि को हरिद्वार आश्रम का प्रभारी बनाया हुआ था. इन्हीं बलबीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि ने अपना उत्तराधिकारी भी घोषित किया है. एक समय बलबीर गिरि और आनंद गिरि के सबसे करीब माने जाते थे, लेकिन उनके निष्कासन के बाद बलबीर ही मठ का पूरा कामकाज संभाल रहे थे. किसी भी प्रमुख आयोजन या वार्ता में वह महंत नरेंद्र गिरि के साथ होते थे.
नरेंद्र गिरि की उन पर निर्भरता और विश्वास इस कदर था कि कुंभ और बड़े पर्व के दौरान अखाड़े और मठ की ओर से खर्च के लिए आने वाले लाखों रुपये उनके पास ही रहते थे. उन्हीं की देखरेख में खर्चा किया जाता था. इस साल हुए हरिद्वार कुंभ के दौरान भी उन्होंने इस भूमिका को निभाया. 2019 में हुए प्रयागराज अर्धकुंभ में भी बलवीर ने अखाड़े की तरफ से अहम भूमिका निभाई थी. नाम सामने आते ही विवाद महंत नरेंद्र गिरि की मौत से पहले बलवीर गिरि को कम ही लोग जानते थे. लेकिन अपने गुरु की मौत के बाद वो अचानक से लाइमलाइट में आ गए. अब उनके एक बयान को लेकर ही विवाद हो रहा है. पहले बलवीर गिरि ने सुसाइड नोट को लेकर कहा था कि ये नरेंद्र गिरि का लिखा हुआ है. आजतक से बातचीत में बलवीर गिरि ने कहा था,
महंत नरेंद्र गिरि के साथ जिन लोगों ने ये सब किया है, उनको हम लोग अंदर भिजवा के ही रहेंगे. हमें कानून पर पूरा भरोसा है. गुरु विष पी जाता है, शिष्य को कुछ नहीं बताता है. मैं गुरुजी के साथ रहा हूं. मैं जानता हूं कि ये उन्हीं की हैंड राइटिंग है. ये सुसाइड लेटर उन्होंने ही लिखा है.
Balbir1 बलवीर गिरि की फाइल फोटो

लेकिन अगले दिन बलवीर अपने बयान से पलटते नजर आए. उन्होंने ABP से बातचीत में कहा,
मैं नहीं पहचानता. और मैंने सरकार को और सभी को यही बोला है कि जो जांच का विषय हो उसकी जांच हो. जांच का विषय एजेंसियों का काम है. फालतू बोलने से कोई अर्थ नहीं निकलता.
इस बीच महंत रामविलास वेदांती ने बलवीर पर ही गंभीर आरोप लगा दिए. न्यूज चैनल ने जब उनसे पूछा कि सुसाइड नोट में लिखा है कि बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बना दिया जाए तो उन्होंने कहा,
बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बना दिया जाए. इसका मतलब ये हुआ कि जिसका नाम इन लोगों ने महंत बनाने के लिए लिखा है, उन लोगों की साजिश है, षड्यंत्र है. इसलिए CBI जांच होनी जरूरी है. स्वयं महंत बनने के लिए दूसरों को फंसाने का ये षड्यंत्र किया गया है.
हालांकि इन आरोपों पर बलवीर गिरि ने जवाब भी दिया. उन्होंने कहा.
जो परमात्मा ने निर्धारित कर रखा है, जो पंचपरमेश्वर निर्धारित करेगा, उसके अनुसार होगा. मैं हमेशा से हर तरीके से तैयार हूं. कोई बात नहीं. मैं जांच के लिए तैयार बैठा हूं.
वहीं निरंजनी अखाड़ा के प्रमुख रविंद्र पुरी ने आजतक से बात करते हुए कहा कि पत्र नरेंद्ग गिरि की ओर से नहीं लिखा गया है और अध्यक्ष पद का फैसला 16 दिन बाद ही होगा. उन्होंने कहा,
बलवीर गिरि नहीं पुरी हैं, जबकि पत्र में गिरि लिखा है. नरेंद्र गिरि ऐसी गलती नहीं कर सकते.
वहीं महंत हरी गिरि महाराज, जो अखाड़ा परिषद के महासचिव हैं, उन्होंने भी बलवीर गिरि पर सवाल उठाते हुए कहा कि वो ऐसे कैसे अध्यक्ष बन जाएंगे. ये फैसला अखाड़े का है और सर्वसम्मति से फैसला लिया जाएगा.
फैसला ले लिया गया है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement