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अमेरिकी चुनाव के कैंडिडेट देखकर उल्लू याद आते हैं

कैलिफोर्निया वाले भइया बता रहे हैं कि हिलेरी क्लिंटन और डॉनल्ड ट्रंप में कौन ज्यादा घटिया है.

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फोटो - thelallantop

sachin-devसचिन देव वर्मा. उरई के हैं. अरवाइन, कैलीफोर्निया में रहते हैं. जेएनयू से भौतिकी पढ़ गए हैं. और अभी पोस्टडॉक्टोरल स्कॉलर हैं यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया में. तो सचिन कैलीफोर्निया से हमारे लिए वहां के मजेदार किस्से, इतिहास, राजनैतिक हालात लिख भेजेंगे. साथ में हर वो चीज जो आप पढ़ना चाहें. ये उनकी दूसरी किस्त में है, जिसमें वो अमेरिका में होने जा रहे चुनाव का पोस्टमॉर्टम कर रहे हैं. बांचिए.

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मंगलवार, 08 नवम्बर को चुनाव होना है अमेरिका के प्रेसिडेंट का. ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. दिलचस्पी रखने वालों के लिए बहुत रोमांचकारी समय होगा. तो आइए इलेक्शन से पहले एक बार आपको रूबरू करा देते हैं कि दोनों मुख्य उम्मीदवारों में से कौन कितने पानी में है.

हिलेरी डेमोक्रेटिक पार्टी से ताल्लुक रखती हैं. नीला रंग अमूमन रिप्रेसेंट करता है इस पार्टी को, लेकिन किन्तु परंतु बसपा से कोई लेना-देना न समझ लें, वरना हाथी गुस्सिया जाएगा. जोक्स अपार्ट, हिलेरी 2009 से 2013 के दौरान 67वीं यूनाइटेड स्टेट्स सेक्रेटरी ऑफ स्टेट, जो कि एक सरकारी रुतबा है, रह चुकी हैं. उसके पहले 2001 से 2009 के बीच न्यू यॉर्क से यूनाइटेड स्टेट्स सेनेटर भी रह चुकी हैं. बिल क्लिंटन की पत्नी तो हैं हीं. बाकी कुछ ज्यादा जरूरी नहीं लगा हमको.

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दूसरे छोर पर ट्रंप साहब हैं. इनके बारे में लिखने की सोचकर ही हंसी आने लगती है. कोई जाती दुश्मनी नहीं है. उनका कैरेक्टर ही जरा मजाकिया है. एक नज़र डालते हैं. ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी से हैं. पार्टी को लाल रंग से प्रदर्शित करते हैं. कम्युनिस्ट समझने की गलती न कर देना, वो वाला लाल नहीं है. 'ट्रंप ऑर्गनाइजेशन' के प्रेसिडेंट हैं ट्रंप और राजनीति का औपचारिक अनुभव नहीं है. लेकिन, ये तो सोचने वाली बात ही है कि बिना 'राजनीति' किए कोई एक ऑर्गनाइजेशन कैसे चला सकता है. पर ये भी समझना होगा कि वो 'राजनीति' अलग है. उसके अलावा इवाना और मारला के पति रह चुके हैं. वर्तमान में मेलानिया के पति हैं.

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अब देखते हैं कि कुछ मुख्य मुद्दों पर दोनों की क्या राय हैं.

व्यक्तिगत अधिकार:

गर्भपात महिला का एक अप्रतिबंधित अधिकार है? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक सहमत ट्रंप: असहमत

कानूनी तौर पर महिलाओं और अल्पसंख्यकों को काम पर रखने की आवश्यकता होती है? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक सहमत ट्रंप: असहमत

EPA (एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी) के नियम बहुत प्रतिबंधात्मक हैं? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक असहमत ट्रंप: दृढ़तापूर्वक सहमत

घरेलू समस्याएं:

बंदूक ओनरशिप का पूरा अधिकार हो? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक असहमत ट्रंप: सहमत

​​ग्रीन एनर्जी को प्राथमिकता दी जाए? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक सहमत ट्रंप: दृढ़तापूर्वक असहमत

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आर्थिक मुद्दे:

अमीरों पर ज्यादा टैक्स हो? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक सहमत ट्रंप: दृढ़तापूर्वक असहमत

अवैध एलियंस के लिए नागरिकता के लिए मार्ग हो? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक सहमत ट्रंप: दृढ़तापूर्वक असहमत

सोशल सिक्यॉरिटी को प्राइवेटाइज करें? हिलेरी: दृढ़तापूर्वक असहमत ट्रंप: सहमत

रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे:

मिलिट्री का विस्तार हो? हिलेरी: तटस्थ ट्रंप: सहमत

अमेरिकन एक्सेप्शनलिज्म का समर्थन हो? हिलेरी: असहमत ट्रंप: सहमत

विदेशों में उलझनों से बचें? हिलेरी: असहमत ट्रंप: सहमत

तो ये थे कुछ मुख्य बिंदुओं पर दोनों के मत. बाकी पोल्स वगैरह तो होते ही रहते हैं.

जैसे इन दोनों के अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग मत हैं, वैसे ही वोटर्स के भी अपने अलग मत हैं दोनों को लेकर. आम लोग ही नहीं, सिलेब्रिटीज भी पार्टी-पॉलिटिक्स को लेकर बंटे हुए हैं. बिल गेट्स, टॉम हैंक्स, लियोनार्डो डिकैप्रियो, स्कारलेट जॉनसन, केटी पेरी और रॉबर्ट डी नीरो वगैरह डेमोक्रेटिक व्यूज रखते हैं. माइक टाइसन, अर्नाल्ड श्वार्जनेगर, ब्रूस विलिस, सिल्वेस्टर स्टेलोन, निकी मिनाज और जेसिका सिंपसन इत्यादि रिपब्लिकन पार्टी के सपोर्टर्स हैं. सिलेब्रिटीज की पूजा करने के मामले में अमेरिका बहुत आगे है. आम लोग सिलेब्रिटीज को बहुत फॉलो करते हैं यहां.

डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स सिर्फ अलग-अलग तरह से वोट ही नहीं करते, वो दुनिया को अलग-अलग तरह से देखते भी हैं. उनकी सूचनाएं और मनोरंजन भी अलग-अलग तरह के स्रोतों से आते हैं. न्यूज चैनल्स भी अपने-अपने खेमे का ही बखान करते हैं. अगर आपने कभी गौर नहीं किया है, तो हम बताए देते हैं कि फॉक्स न्यूज डेमोक्रेटिक पार्टी का खुलकर विरोध करता है और रिपब्लिकन पार्टी का बखान करता है. इसी तरह एनबीसी और सीबीएस का झुकाव डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ है.

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सीएनएन इकलौता ऐसा चैनल है, जो हमको बहुत हद तक निष्पक्ष न्यूज देने वाला लगता है. वैसे आजकल हर न्यूज चैनल किसी न किसी पॉलिटिकल पार्टी की तरफ झुकाव रखता ही है. ईमानदारी से निष्पक्ष खबरें परोसने का जमाना कब का बीत गया. तो अगर आप इंडिया के न्यूज चैनल देख-देखकर फ्रस्ट्रेट होते हैं, तो दुखी मत होइए. अमेरिका में भी जर्नलिज्म कोई बहुत श्रेष्ठतर नहीं है. चैनल्स अपने विरोधियों के विरुद्ध खबरें प्रसारित करके अपनी रोटियां सेंकते हैं ज्यादातर देशों में. अफवाहें तो बहुत उड़ती हैं, पर कौन जाने क्या कितना सच है. सब पैसे का खेल है. जब-तब सुनने में आता रहता है कि जीते कोई भी, सरकार वॉलस्ट्रीट की ही रहेगी. शायद है भी यही. ये किस्सा फिर कभी पढ़ाएंगे.

खैर, हम और हमारे जैसे बहुत सारे लोग, जो नॉन-इमिग्रेंट वीसा पर आए हैं, वो तो वोट नहीं कर सकते. वोट करने के लिए परमानेंट रेसिडेंसी चाहिए. लेकिन, हम उम्मीद करते हैं कि जो लोग वोट करेंगे, वो अफवाहों पर नहीं जाएंगे और अपनी अकल लगाएंगे. और आशा यही रहेगी कि जो भी जीते, बस दुनिया का विनाश न करे. और आप से भी यही गुजारिश है. प्रार्थना करें कि सही-सलामत रहें. आप भी और बाकी सब भी.

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वैसे तो बहुत ज्यादा अंतर नहीं लगता है, लेकिन हिलेरी का पड़ला ट्रंप की तुलना में कुछ फ़ीसद भारी दिखाई पड़ता है. हिलेरी के पहली महिला प्रेसिडेंट बनने वाले पत्ते के पास तुरुप के इक्के वाली ताकत नहीं है, इसलिए वो भी कोई कारीगरी नहीं दिखा पाएगा. डेमोक्रेसी उस भैंस की तरह है, जिसको आप देखकर कह नहीं सकते कि किस करवट बैठेगी. इसीलिए अभी से कोई भी नतीजा पूरी तरह से नहीं आंका जा सकता. बहरहाल, इस बार के US प्रेसिडेन्सियल इलेक्शन के उम्मीदवारों को देखकर याद आता है:

बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी था, हर शाख पे उल्लू बैठे हैं, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा.


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