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बाहुबली के माहिष्मती जैसी बन रही है ये राजधानी

ब्रिटेन से बुलाए गए हैं आर्किटेक्ट्स, एसएस राजामौली भी हैं सलाहकार.

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बाहुबली फिल्म के डायरेक्टर एसएस राजामौली बतौर आर्किटेक्ट मदद कर रहे हैं.
बाहुबली फिल्म तो याद ही होगी. माहिष्मती का साम्राज्य भी याद होगा. जिसने भी फिल्म देखी होगी, माहिष्मती की भव्यता और उसकी नक्काशी को भूल भी नहीं सकता. कितनी खूबसूरत दिखती हैं उसकी इमारतें. इमारतों पर लगी मेहराबें, उसकी दीवारें, दरवाजे-खिड़कियां और सीढ़ियां सब बेहद खूबसूरत हैं. अब ऐसी ही खूबसूरती हकीकत में भी देखने को मिल सकती है. इसका जिम्मा भी खुद बाहुबली फिल्म के डायरेक्टर एस.एस. राजामौली ने उठाया है.
बाहुबली फिल्म में दिखाया गया माहिष्मति साम्राज्य.
बाहुबली फिल्म में दिखाया गया माहिष्मति साम्राज्य.

दरअसल आंध्रप्रदेश के बंटवारे के बाद आंध्रप्रदेश और तेलंगाना दो अलग-अलग राज्य बन गए हैं. तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद होगी, जबकि आंध्रप्रदेश के लिए नई राजधानी के तौर पर अमरावती का नाम फाइनल हो गया है. अमरावती को राजधानी का लुक देने के लिए ब्रिटेन की एक आर्किटेक्चर फर्म Foster & Partners की मदद ली जा रही है. ये फर्म अमरावती में विधानसभा, हाई कोर्ट, पुलिस मुख्यालय और इसकी जैसी अन्य इमारतें डिजाइन करेगी.

सिंगापुर मॉडल पर बन रही है राजधानी

Amravati 1 अमरावती के पश्चिमी छोर पर ध्यान में बैठे हुए बुद्ध की मूर्ति है.

आंध्रप्रदेश की नई बनने वाली राजधानी 217 वर्ग किलोमीटर में बनेगी. इसे सिंगापुर की तर्ज पर बनाया जा रहा है. सिंगापुर ने Surbana International Consultants Pte & Jurong कंपनी को अमरावती को बसाने के लिए नियुक्त किया है. हरे और नीले रंग वाले शहर में 51 फीसदी हिस्सा ग्रीन स्पेस यानी पेड़-पौधों का होगा. 10 फीसदी हिस्सा पानी का होगा, जिसमें कृष्णा नदी पर 30 किमी का रिवर फ्रंट भी शामिल है. इसके अलावा 9 थीम सिटी भी बननी हैं, जिसमें विधानसभा, वित्त, हाई कोर्ट, खेल, मीडिया चैनल के ऑफिस शामिल हैं. अमरावती के पास 6 नजदीकी शहर होंगे, जिनमें गुंटुर और विजयवाड़ा शामिल होंगे. इन्हें भी दिल्ली-एनसीआर में बने नोएडा और गुडगांव की तर्ज पर बसाया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने सुझाया है नाम

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इमारतों के आर्किटेक्चर के लिए राजमौली (बाएं) का नाम खुद सीएम नायडू  ने सुझाया है.

इस ब्रिटिश फर्म को इमारतें बनवाने में मदद करने के लिए एस.एस. राजामौली की मदद ली जा रही है. खुद मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू ने राजामौली का नाम सुझाया है और उनकी मदद लेने के निर्देश दिए हैं. राजामौली भी इसके लिए राजी हो गए हैं. वो लंदन जाकर वहां ब्रिटिश फर्म को अमरावती की बिल्डिंगों के संबंध में इनपुट देंगे. खुद मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू भी 25 अक्टूबर को ब्रिटेन जाएंगे. वो भी वहां जाकर हाई कोर्ट और विधानसभा के फाइनल मॉडल्स को देखेंगे.

लोगों की रही है मिली-जुली प्रतिक्रिया

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अभी हैदराबाद में जो विधानसभा है, उसकी नक्काशी भी बेहद खूबसूरत है.

13 सितंबर को इस ब्रिटिश फर्म ने मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को विधानसभा और हाई कोर्ट की बिल्डिंग का फाइनल ड्राफ्ट दिखाया था. नायडू ने उस दौरान कहा कि जो पहली डिजाइन सामने आई थी, उसपर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया थी. अमरावती में वैश्विक स्तर का आर्किटेक्चर होना चाहिए. इसलिए बिल्डिंग की फाइनल डिजाइन के लिए और वक्त लिया जा सकता है. हालांकि सीएम ने राजधानी के तटीय क्षेत्र के ले-आउट और विधानसभा के इंटीरियर की तारीफ की है. नायडू ने विधानसभा के मेन गेट के आर्किटेक्चर को और भी बेहतर बनाने को कहा है.

10 साल का है वक्त

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22 अक्टूबर 2015 को पीएम मोदी ने आंध्र की नई राजधानी अमरावती की नींव रखी थी और 2025 का लक्ष्य है.

फिलहाल हैदराबाद आंध्रप्रदेश और तेलंगाना दोनों की ही राजधानी है. दोनों राज्यों के बंटवारे के बाद आपसी सहमति से हैदराबाद को 10 साल के लिए राजधानी बनाया गया है. इसके बाद आंध्रप्रदेश की राजधानी अमरावती हो जाएगी. अमरावती गुंटुर जिले में है, जो कृष्णा नदी के दक्षिणी छोर पर बसा हुआ है. अमरावती को ऐतिहासिक गांव माना जाता है. इतिहास के मुताबिक अमरावती सातवाहन साम्राज्य की राजधानी थी. सातवाहन साम्राज्य ईसापूर्व 230 से लेकर ईसा के बाद तीसरी सदी तक था, जिसकी सीमाएं केन्द्रीय दक्षिण भारत में थीं. ये मौर्य वंश के पतन के बाद ज्यादा ताकतवर हुआ था.


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