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क्या है गिलगित-बल्तिस्तान, जिसे पाकिस्तान हड़पना चाह रहा है?

पाकिस्तान और भारत के बीच विवाद की एक वजह, जिसमें चीन की भी बदमाशी शामिल है.

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फोटो - thelallantop
इन दिनों एक शब्द हम बार-बार सुन रहे हैं गिलगित-बल्तिस्तान. हम में से ज़्यादातर लोग इस लफ्ज़ के बारे में थोड़ा-बहुत जानते हैं. जानते ये हैं कि ये जम्मू कश्मीर का कोई इलाका है जिसे पाकिस्तान अपना पांचवां प्रांत बनाने जा रहा है. भारत को लाज़मी तौर पर ये रास नहीं आ रहा है. लेकिन फुल डीटेल की कमी है. इसलिए हम गिलगित-बल्तिस्तान के बारे में वो सब कुछ ले आए हैं जो आपके जानने लायक हैः

मैप पर कहां ढूंढें इसे?

इस इलाके को मैप पर ढूंढना बहुत आसान है. भारत के मैप पर सबसे ऊपर है जम्मू-कश्मीर. अब जम्मू कश्मीर के सबसे ऊपर ध्यान लगाएं. पश्चिम (अंग्रेज़ी वालों का वेस्ट) में पाकिस्तान की तरफ भारत का एक सिरा निकला हुआ है. यही गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका है. उपर गिलगित का इलाका है, उस से थोड़ा दक्षिण में बल्तिस्तान.
इस नक्शे में 'PAKISTAN-OCCUPIED KASHMIR' के उपर का इलाका गिलगित बल्तिस्तान है
इस नक्शे में 'PAKISTAN-OCCUPIED KASHMIR' के उपर का इलाका गिलगित बल्तिस्तान है.

तकनीकी रूप से ये जम्मू कश्मीर का इलाका है. लेकिन 4 नवंबर 1947 से पाकिस्तान के कब्ज़े में है. 'पाकिस्तान का कब्ज़ा' सुनकर लगता है कि पाक अधिकृत कश्मीर में पड़ता होगा. लेकिन याद रखें कि गिलगित-बल्तिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर से बिलकुल अलग इलाका है. भूगोल में भी, और प्रशासनिक तौर पर भी. क्यों और कैसे, आगे बताएंगे.

अंग्रेज़ अफसरों की गद्दारी से पाकिस्तान में गया

जिन इलाकों को पाक अधिकृत कश्मीर के नाम से जाना जाता है, उन्हें पाकिस्तान ने 1947-48 में हमला कर के अपने कब्ज़े में लिया था. लेकिन गिलगित-बल्तिस्तान का किस्सा थोड़ा अलग है. हुआ ये था कि गिलगित का इलाका अंग्रेज़ों ने जम्मू कश्मीर के महाराज से लीज़ पर ले रखा था. ताकि यहां की उंची पहाड़ियों से आस-पास के पूरे इलाके पर नज़र रखी जा सके. 'गिलगित स्काउट्स' नाम की एक फोर्स यहां तैनात रहती थी. अंग्रेज़ भारत से जाने को हुए, तो लीज़ खत्म कर के इलाका महाराज को लौटा दिया गया. महाराज ने ब्रिगेडियर घंसार सिंह को यहां का गर्वनर बना दिया.
महाराज को गिलगित स्काउट्स के जवान भी मिले, जिनके अफसर अंग्रेज़ होते थे. मेजर डब्लयू. ए. ब्राउन और कैप्टन ए. एस. मैथीसन महाराज के हिस्से आई फौज के अफसर थे. जब पाकिस्तान के कबायली लोगों की आड़ में पाकिस्तानी फौज ने जम्मू कश्मीर पर हमला किया, महाराज ने अपना राज्य भारत में मिला दिया. 31 अक्टूबर को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर दस्तखत हुए.
गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तानी फौज की काफी मौजूदगी रहती है
गिलगित-बल्तिस्तान में पाकिस्तानी फौज की काफी मौजूदगी रहती है.

इससे गिलगित-बल्तिस्तान हिंदुस्तान का इलाका बन गया. लेकिन मेजर डब्लयू. ए. ब्राउन ने महाराज से गद्दारी की. ब्रिगेडियर घंसार सिंह को जेल में डालकर पेशावर में अपने अंग्रेज़ सीनियर लेफ्टिनेंट कर्नल रौजर बेकन को खबर की कि गिलगित पाकिस्तान का हिस्सा बनने जा रहा है. 2 नवंबर को ब्राउन ने पाकिस्तान का झंडा फहरा दिया. इसके दो हफ्ते बाद पाकिस्तान सरकार की तरफ से सदर मोहम्मद आलम गिलगित के पॉलिटिकल एजेंट बनाए गए. इस तरह एक अंग्रेज़ अफसर की गद्दारी से गिलगित-बल्तिस्तान पाकिस्तान का इलाका बन गया.
पाकिस्तान में पाक अधिकृत कश्मीर के लिए एक अलग संविधान है. यहां इस्लामाबाद के इशारे पर एक कठपुतली सरकार भी चलती है. लेकिन गिलगित-बल्तिस्तान सीधे इस्लामाबाद के नियंत्रण में रहा. पाकिस्तान की सरकार ने इलाके को नार्दन एरियाज़ कहना शुरू किया. इलाके पर ज़्यादातर फौज का नियंत्रण रहा. यहां 2009 में जाकर चुनाव हुए लेकिन यहां की असेंबली अपने बूते कोई कानून नहीं बना सकती. सारे फैसले एक काउंसिल लेता है, जिसके अध्यक्ष पाकिस्तान के प्रधानमंत्री होते हैं. 2009 में नार्दन एरियाज़ का नाम बदलकर गिलगित-बल्तिस्तान कर दिया.

चीन की बदमाशी

चीन का इलाके में बड़ा निवेश है.
चीन का इलाके में बड़ा निवेश है.

चीन पाकिस्तान का बिग ब्रदर है. उसने पाकिस्तान में बहुत निवेश कर रखा है. ग्वादर में एक बड़ा सा पोर्ट भी बनाया है. चीन की एक और बड़ी योजना है 'चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर.' इसकी लागत है 3 लाख 51 हज़ार करोड़. माने बहुत पैसा लगा है. ये कॉरिडोर गिलगित-बल्तिस्तान से गुज़रना है. अब चीन नहीं चाहता कि उसकी परियोजना ऐसे इलाके से निकले जिसे लेकर किसी तरह का विवाद हो. जम्मू कश्मीर को दुनिया के कई देश विवादित मानते हैं. भारत इस परियोजना पर अपना विरोध भी जता चुका है. इसलिए पाकिस्तान इलाके को विवादों से दूर ले जाना चाहता है ताकि परियोजना चलती रहे. इसलिए कहा जा रहा है कि गिलगित-बल्तिस्तान को जम्मू कश्मीर से अलग, पाकिस्तान का एक राज्य बनाने में चीन का पक्का कोई न कोई रोल है.

पर भारत इसे 'अभिन्न अंग' मानता है

भारत पूरे जम्मू कश्मीर को अपना 'अभिन्न अंग' मानता है जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बल्तिस्तान दोनों आते हैं. इसलिए भारत जम्मू कश्मीर के किसी भी हिस्से को एक अलग पाकिस्तानी राज्य बनाए जाने के बिलकुल खिलाफ है. 16 मार्च 2017 को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागलय ने साफ-साफ शब्दों में कहा था.
"1947 में जम्मू कश्मीर का भारत में विलय हो गया था. ये हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है, और हमेशा रहेगा. जम्मू कश्मीर के कुछ इलाके पाकिस्तान के अवैध कब्ज़े में हैं. उन इलाकों में किसी भी तरह की एकतरफा हेराफेरी गैरकानूनी है और बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी."
गोपाल यहां एक घिसी हुई लाइन नहीं दोहरा रहे हैं. उनका बयान भारत सरकार की आधिकारिक लाइन है और उसका सिम्बॉलिक (प्रतीकात्मक) महत्व बहुत है. इसलिए गोपाल ने लगे हाथ पाक अधिकृत कश्मीर में मानव अधिकारों के उल्लंघन का मामला भी उठाया था.
गिलगित-बाल्टिस्तान के आम लोग (फोटोःरॉयटर्स)
गिलगित-बल्तिस्तान के आम लोग (फोटोःरॉयटर्स)

गिलगित-बल्तिस्तान को अगर पाकिस्तान सचमुच अपना पांचवां प्रांत बना लेता है तो ये कई सारे अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन होगा. लेकिन ये एक असल संभावना है. क्योंकि पाकिस्तान ने इलाके की डेमोग्राफी को काफी हद तक बदल दिया है. पाकिस्तान के दूसरे इलाकों से आकर काफी लोग यहां बसे हैं. इसलिए यहां हालात काफी बदल गए हैं.
समझौतों के उल्लंघन से बड़ा मुद्दा ये है कि ये इलाका एक ऐसे विवाद का हिस्सा रहा है. जिसने 70 सालों में हज़ारों जानें ली हैं. इसलिए जब तक जम्मू कश्मीर के मसले का कोई पक्का हल नहीं निकल जाता, पाकिस्तान को थोड़े से फायदे के लिए इतिहास से खिलवाड़ करने से बचना चाहिए.


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