इसके साथ-साथ सुपर सीरीज़ के फाइनल में पहुंचने वाले भी वो दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं. किदांबी श्रीकांत 2014 में चायना ओपन के फाइनल में पहुंचे थे और जीते थे. सुपर सीरीज़ साल में होने 12 टूर्नामेंटों की श्रृंखला है जिसमें टॉप-32 खिलाड़ी खेलते हैं.
समीर वर्मा : ये तो बस शुरूआत है
समीर और सौरभ दोनों भाई इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं



सौजन्य: @sameerv2210 ट्विटर
महाराष्ट्र के रहने वाले समीर वर्मा 16 साल की उम्र में ही गोपीचंद की अकेडमी पहुंच गए थे. इसके ठीक अगले साल 2011 में समीर को एशियन जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप और फिर कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में दोनों में सिल्वर मेडल के साथ पहली कामयाबियां मिली. 2 साल बाद 2013 में बहरीन इंटरनेशनल सीरीज़ के साथ समीर को पहला सीनियर इंटरनेशनल खिताब मिला.
2015 तक समीर वर्मा की रैंकिंग 250 भी नहीं थी. उस साल समीर वर्मा ने टाटा ओपन और उसके बाद बांग्लादेश ओपन का खिताब जीता. फिलहाल नंबर 43 रैंक समीर इस साल अपने करियर की श्रेष्ठ रैंकिंग 35 तक पहुंच गए थे. इस साल इंडियन सीनियर नेशनल चैंपियनशिप अपने नाम करने के अलावा समीर जर्मनी में खेले गए बिटबर्गर ओपन के सेमीफाइनल तक भी पहुंचे थे.
समीर के स्मैश अनियमित माने जाते हैं और वो बाकी भारतीय खिलाड़ियों की तरह ताकत के साथ खेल भी नहीं खेलते. बल्कि उनकी ताकत कलाईयों के इस्तेमाल में है.
22 वर्षीय समीर के बड़े भाई 24 वर्षीय सौरभ वर्मा भी इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी हैं. सौरभ वर्मा ने इसी साल चीनी ताइपे ओपन का खिताब जीता है और रैंकिंग में सिर्फ एक खिलाड़ी दोनों भाईयों के बीच में है. सौरभ की रैंकिंग 45 है.
गोपीचंद की अकेडमी से पूरी फौज निकली है. पुरूषों के टॉप 50 खिलाड़ियों में से 6 खिलाड़ी - के. श्रीकांत, अजय जयराम, प्रणॉय कुमार, बी साई प्रणीत और समीर-सौरभ वर्मा भारत के हैं. धीरे-धीरे भारत बैडमिंटन में चीन के नजदीक आता जा रहा है. अगले ओलंपिक में भारत के पुरूष और महिला दोनों वर्गों के खिलाड़ी ओलंपिक मेडल लेकर आएं इसकी तैयारी सही ट्रैक पर है.














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