शाहरुख और आलिया की फिल्म जो आ रही है. डियर ज़िंदगी, उसका दूसरा टेक आया. माने टीजर. आलवेज रिसाइकल. इसमें होता क्या है कि आलिया भट्ट बड़े बुरे से पीजे मार रही होती हैं और शाहरुख कुढ़ते हैं. उनसे गुज़ारिश करते हैं कि वो कुछ भले जोक्स मार सकती हैं. हम जोक्स की बात करने वाले हैं, क्योंकि ये वो समय चल रहा है. जब चुटकुला सुनाना और एक अच्छा चुटकुला स्वीकारा जाना सबसे मुश्किल होता जा रहा है. बुरा समय नहीं है, सरकारे नहीं होती लोग होते जा रहे हैं.
पहले तो ये बता दें पीजे क्या है. पीजे माने पुअर जोक. जो किसी खास मौके, खास आदमी या खास वर्ग को केन्द्रित रख कहा, बोला जाए. इसे वही समझ सकता है, जिसे पहले की कुछेक बातें पता हों. या कभी तो ये इतने 'पुअर' होते हैं कि यूं ही समझ आ जाते हैं. पुअर जोक में सबसे भला ये होता है कि उनका BPL कार्ड नहीं बना होता. पुअर जोक में सबसे भला ये होता है कि ये इतने बुरे होते हैं कि हंसी आ जाती है या इतने बुरे होते हैं कि खिसयाहट हो पड़े, और आदमी मजबूरी में बस हंस सके.
ये कोई कहानी हो सकती है. जिसमें किसी की बातचीत हो और जिसका अंत एक पंच से हो. किसी भी जोक में पंच जितना अच्छा, छोटा और सलीके से आता है जोक उतना मजेदार हो जाता है. पंच आने पर जनता को पता चलता है कि इस किस्से का ये मतलब भी था. इसमें ये विडंबना थी, या इसमें ये एंगल भी था.
एक अच्छा जोक आपको बेवजह की डीटेल्स नहीं देता, कई बार एक लाइन के जोक बहुत मजा दे जाते हैं. इनको वनलाइनर कहते हैं. ट्विटर पर ये खूब चलते हैं. जोक कितना बड़ा होगा या छोटा ये कोई तय नहीं कर सकता. जोक एक शब्द का भी हो सकता है, लंबी सी कहानी भी हो सकती है. कई बार जोक सिर्फ इसलिए हंसाते हैं कि वो बड़ी सही तुकबंदी होते हैं.
हिंदी में चुटकुले को चमत्कारपूर्ण और विलक्षण उक्ति कहा गया है. वो बढ़िया और मज़ेदार बात जिसमें से हंसी छूटे. इसको लतीफ़ा भी कहा जाता है. अंग्रेजी परिभाषा के हिसाब से जाओ तो ये ह्यूमर का प्रदर्शन है. जिसमें शब्दों को इतने अच्छे और क्रमबद्ध तरीके से पेश किया जाए कि लोगों को हंसी आ जाए. आलिया भट्ट की बात चली तो हम कुछ उन मजाकों की बत करते हैं, जो बहुत चाट होते हैं.
ऑटो में कोई टकली औरत जा रही हो, उसे क्या कहेंगे? हाल ठीक है चाल खराब! तुम्हारे घर में टट्टी बनी है? हमारे घर में दाल-चावल बना है. एक हाथी और चींटी एक बार कहीं जा रहे थे... एक औरत बस में बहुत काला सा बच्चा ले जा रही थी...
धर्म में चुटकुले
चुटकुलों और जोक्स का जिक्र धर्म में भी है. पांडवों का नया महल बना था. फर्श की जगह पानी दिख रहा था. पानी की जगह जमीन. दुर्योधन संभल-संभलकर चल रहा था. द्रौपदी ने हंसी में कह दिया. अंधे का बेटा अंधा होता है. बाद में इसी को लेकर मर हो गई. जिसे महाभारत कहते हैं.
एक बार नारद जी के साथ मजाक हो गया. एक नगर था. उस नगर में शीलनिधि नाम का राजा रहता था. उस राजा की विश्व मोहिनी नाम की बहुत ही सुंदर बेटी थी. उसका स्वयंवर हुआ. नारद उससे शादी करना चाहते थे, विष्णुजी से कहे हमको सुंदर बना दो. विष्णु जी ने मजाक किया. उनको उनकी लिमिट बताने के लिए कुरूप कर दिया. लड़की की शादी किसी और से हुई. और नारद जी को पता लगा तो विष्णु जी को श्राप दे दिए.
ऐसा ही मजाक किया था, सांब ने. वो ऋषियों के पास पेट में कपड़ा बांध पहुंचे और उनके साथियों ने कहा ये औरत गर्भवती है, इसके क्या होगा. ऋषि-मुनि थे. गुस्सा के कहे कुल का नाश करने वाला मूसल जनेगी. फिर उसी मूसल को घिसकर फेंका तो एरका घास हुई. उसी से यदुवंशी लड़ भिड़े. और उसी लौहखंड से कृष्ण जी की मौत हुई.
जोक्स से कैसा सुलूक करें?
जोक सुनाने का एक कायदा होता है. उसके लिए तनिक होमवर्क की जरूरत होती है. अव्वल तो जोक को उठाना होता है. कभी भी बेजा जोक बन मारें. जबरन जोक न घुसाएं. जोक को फ्रेम करें. यहां से कभी शुरू न करें कि 'एक चुटकुला सुनाता हूं...' ऐसा कहकर यकीन मानिए आपने आधे ह्यूमर का क़त्ल कर दिया. जोक हमेशा नया हो तो मजा दे जरुरी नहीं, कई बार औसत सा जोक सुनाने या फ्रेमिंग एक तरीके पर मजा दे जाता है.
सुनाने के तरीके में ये भी आता है कि आप तत्काल कैसे जोक्स रीफ्रेम करते हैं. आपने सुनाना शुरू किया. खाका आपके पास है लेकिन अगले का भी ख्याल रखना होता है. आपको मौके पर भी ऐसे बदलाव करने होते हैं. जो जोक को न मारें लेकिन अगले को मजा दे जाएं. और ये बात मोटे अक्षरों में लिखकर रख लीजिए. कभी भी जोक को समझाना नहीं चाहिए. आप जहर खाकर मर जाइए लेकिन जोक को समझाइए नहीं. जोक मारना जरुरी नहीं होता, बेवजह न हंसने-हंसाने वाला आदमी बुरा नहीं माना जाता लेकिन जोक को समझाना सबसे खतरनाक होता है
सबसे अच्छा जोक वो होता है, जिसका पंच अंत तक बचा रहे और भली भांति डिलीवर हो. साथ ही उसका रिस्पांस भी ढंग का आ जाए.
जोक क्रैक करते वक़्त हम भारतीयों को क्या दिमाग में रखना चाहिए?
हमारे जोक्स पॉलिटिकली बहुत गलत होते हैं, सेक्सिस्ट होते हैं रेसिस्ट होते हैं. हम धर्म पर मजाक बर्दाश्त नहीं करते. जोक्स पर ऑफेंड हो जाते हैं. लेकिन जहां ऑफेंड होना हो वहां हंसते हैं. तमाम मजाकिया चीजों पर हमें गुस्सा आता है, और जहां फर्क पड़ना चाहिए वहां हम खीसे निपोरते हैं. तो जो चंद चीजें हमें ध्यान में रखनी चाहिए वो ये हैं. किसी के रंग का, बीवी का या बोलने के तरीके का मजाक उड़ाना कभी सही नहीं होता. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वो चुटकुला नहीं होता. जोक तो मरे हुए बच्चों पर भी होते हैं और बलात्कार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी. और हमें ये स्वीकारना चाहिए कि उन्हें सुन हंसी भी आती है. ये हमें तय करना होता है कि हमें कैसे चुटकुलों को स्वीकारना है.