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आशुतोष नहीं होंगे अगले कुमार, संजय ने उनकी पिछली तनख्वाह बताई...

आशुतोष के भी कुमार विश्वास होने की बात. संजय सिंह पर नए जोक्स. आशुतोष की तनख्वाह. ईटीसी.

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संजय सिंह, आशुतोष और दिलीप पांडे (बाएं से दाएं, फाइल फोटो)

इस स्टोरी में आप जानेंगे. आशुतोष के भी कुमार विश्वास होने की बात. संजय सिंह पर नए जोक्स. आशुतोष की तनख्वाह. संजय सिंह का नया पैंतरा... ईटीसी

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3 जनवरी, दोपहर.

राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी के कैंडिडेट का ऐलान. संजय सिह पर सब शांत. बाकी दो एनडी गुप्ता और सुशील गुप्ता पर बवाल. सुशील पर ज्यादा, क्योंकि 40 रोज पहले वह कांग्रेस में थे. कुमार विश्वास की तंज भरी बाइट. उसका टाइटल. 'मेरी लाश पर तो रहम खाओ केजरीवाल'

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राज्यसभा कैंडिडेट फाइनल होने के बाद केजरीवाल पर तंज कसने के दौरान कुमार

3 जनवरी, शाम.

आम आदमी पार्टी के कई विधायकों के सुशील के नाम पर ऐतराज की खबर. मगर सब मसट्ट मारे हैं. मीडिया में जाकर कोई कपिल नहीं होना चाहता. फिर खबर आती है कि PAC मेंबर और पूर्व पत्रकार आशुतोष ने सुशील गुप्ता के नाम पर खूब विरोध किया.

3 जनवरी, रात.

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खबर आने लगती है कि आशुतोष अगले कुमार विश्वास हो सकते हैं. उन्हें भरोसा था कि केजरीवाल उनकी निष्ठा का इनाम राज्यसभा के रूप में देंगे. कुमार का टिकट कटा तो उन्हें क्या, मगर उनका क्यों कटा. और सोशल मीडिया पर तो कोई उन्हें सहानुभूति भी नहीं दे रहा. आशुतोष के करीबी कुछ पत्रकारों ने ट्वीट भी कर दिए. 100 करोड़ में टिकट बिकने के.


पत्रकार अनंत विजय का ट्वीट
पत्रकार अनंत विजय का ट्वीट

4 जनवरी, सुबह-दोपहर-शाम.

सब ठीक हो गया. आशुतोष के स्वर बदल गए. संजय सिंह ने उनकी तनख्वाह बताई. पिछली. नौकरी की. और बताया कि आशुतोष भाई ने कितना त्याग किया पार्टी के लिए. आशुतोष ने संजय सिंह के बारे में जोक्स सुनाए.

आगे की कहानी, उन्हीं के हवाले से.

संजय सिंह टिकट कटने वाली बात गलत है. हमने कभी टिकट मांगा ही नहीं. 2017 में पंजाब में कहा गया कि चुनाव लड़ने आए हैं. मैंने कहा सरपंच का भी चुनाव नहीं लड़ूंगा. (शायद संजय राज्यसभा चुनाव को चुनाव नहीं मानते. कच्ची लोई है क्या)


संजय सिंह: चलते पुर्जे
संजय सिंह: चलते पुर्जे

आशुतोष पार्टी में चुटकुला हो गया है कि गूगल भी संजय सिंह को नहीं खोज पाता. ये रहते कहां हैं. क्योंकि सात साल से ये पार्टी के लिए कहां-कहां भटक रहे हैं. घर-परिवार भी नहीं देख रहे.


आज खुशी का मौका है.

दो गुप्ता तो गुप्त क्या

संजय दिल्ली की कई सीटों पर एक तय कास्ट इक्वेशन थी. मगर अरविंद केजरीवाल ने उसकी परवाह न करते हुए दूसरे लोगों को टिकट दिया. हमने 18 काबिल लोग खोजे. इसमें रघुराम राजन भी थे. जब सबने मना कर दिया, तो ये नाम आए. ये देश के अलग-अलग क्षेत्रों के ख्याति प्राप्त लोग हैं. (लोल ध्वनि के साथ पढ़ें) आशुतोष (जो कभी गुप्ता थे) की मेहनत की किसी से तुलना मत करिए. 7 लाख रुपए महीने की नौकरी पर लात मारकर इन्होंने दिन-रात मेहनत की.


आशुतोष: कौन सी कमी छोड़ी
आशुतोष: कौन सी कमी छोड़ी

आशुतोष मैं जुबान नहीं खोलूंगा... बाहर. पैसों के लेन-देन की बात अफवाह है. मैं निंदा करता हूं. (कड़ी करते तो राजनाथ मुस्काते)




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तो इस तरह बहुत पहले ही तय हो गया था कि केजरीवाल सुशील गुप्ता को चुनेंगे!

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