स्कॉटलैंड के एक सैनिक डॉनी मैकरे की द्वितीय विश्व युद्ध में मृत्यु हो गई थी. उन्हें जर्मनी द्वारा बंदी बनाया गया था. साल 1941 में एक युद्धबंदी अस्पताल में उनकी मौत हो गई. इस घटना के 80 साल बाद उनके परिवार को पता चला है कि उनके दिमाग को निकाल लिया गया था. और उन्हें बिना दिमाग के ही दफनाया गया था.
द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक का निकाला गया था दिमाग, परिवार को 80 साल बाद पता चला
33 साल के मैकरे की मौत गिलियन-बैरे सिंड्रोम के कारण हुई थी. जो एक प्रकार का लकवा है. उनकी मौत के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम किया गया. इस दौरान उनके शरीर से उनका दिमाग और रीढ़ की हड्डी को जांच के लिए निकाल लिया गया था.
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BBC की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय 33 साल के मैकरे की मौत गिलियन-बैरे सिंड्रोम के कारण हुई थी. यह एक प्रकार का लकवा है. उनकी मौत के बाद उनके शव का पोस्टमार्टम किया गया. इस दौरान उनके शरीर से उनका दिमाग और रीढ़ की हड्डी को जांच के लिए निकाल लिया गया. और उनके इन अंगों को रिसर्च के लिए म्यूनिख स्थित कैसर विल्हेम रिसर्च सेंटर भेजा गया. जिसे अब मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर साइकियाट्री के नाम से जाना जाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक डॉनी के शव को जर्मनी में दफनाया गया था. बाद में मित्र राष्ट्रों द्वारा बर्लिन के एक कब्रिस्तान में फिर से दफनाया गया. हालांकि उनके परिवार को इसकी भनक तक नहीं थी कि उनके शरीर से अंगों को निकाला गया है.

साल 2020 में ऑक्सफोर्ड ब्रूक्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पॉल वेइंडलिंग ने मैकरे की भतीजी लिब्बी मैकरे से संपर्क किया. उन्होंने पूरे मामले की जानकारी दी. इस दौरान बताया कि डॉनी मैकरे का दिमाग और रीढ़ की हड्डी के 160 छोटे टुकड़े सुरक्षित रखे गए हैं. प्रोफेसर वेइंडलिंग एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च का एक हिस्सा हैं. वह इस समय मैक्स प्लैंक सोसायटी में रखे हजारों मस्तिष्कों के रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों की पहचान करना है.
साल 1941 में डॉनी मैकरे की मृत्यु लकवे के कारण हुई थी. उन्हें बोलने में दिक्कत थी. उनके इस रोग के कारण वैज्ञानिकों ने इस बीमारी की जांच करनी चाही थी. इस कारण उनके दिमाग को निकाला गया. अब डॉनी मैकरे के दिमाग को उनके शरीर से फिर से जोड़ने का प्रयास चल रहा है. कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव कमीशन ने मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के इस कदम को स्वीकार करने पर सहमति जताई है. इसके बाद उन्हें दोबारा दफनाया जाएगा. वहीं, लिब्बी मैकरे ने इस खबर को सुनकर खुशी जताई.
डॉनी मैकरे का जन्म स्कॉटलैंड में हुआ था. वह गेरलोच में पले-बढ़े. उनका परिवार एक दर्जी था. साल 1939 में जब देश युद्ध के कगार पर था, तो डॉनी अपने देश की सेना में शामिल हो गए. वह सीफोर्थ हाईलैंडर्स के साथ एक प्राइवेट सैनिक थे. उन्हें जून 1940 में फ्रांस के सेंट वैलेरी में लड़ते समय बंदी बना लिया गया था.
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