वाराणसी में गंगा नदी पर इफ्तार पार्टी करने वाले युवकों की जमानत याचिका खारिज हो गई. सीजेएम कोर्ट में सोमवार, 23 मार्च को 14 गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनी. इंडिया टुडे से जुड़े बृजेश यादव की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान आरोपियों को लेकर कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया और उन्हें जेल में ही रखने की बात कही.
गंगा पर इफ्तारी करने वाले लड़के रो दिए, कोर्ट ने कहा- 'बेल खारिज, जेल में ही रहो'
वाराणसी में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ मुस्लिम युवक गंगा में नाव पर सवार होकर इफ्तार कर रहे थे. ये वीडियो देखकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने पुलिस में शिकायत कर दी.


क्या है मामला?
ये मामला 16 मार्च का है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ मुस्लिम युवक गंगा में नाव पर सवार होकर इफ्तार कर रहे थे. ये वीडियो देखकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने पुलिस में शिकायत की कि मुस्लिम युवकों ने गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी की. इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर चिकन बिरयानी खाकर हड्डियां गंगा में फेंकी.
शिकायत के बाद मामले में पहले तो अज्ञात लोगों के खिलाफ BNS की धाराओं 298, 299,196(1)(b), 270, 279, 223(b) और जल (प्रदूषण का निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत केस दर्ज किया गया. बाद में आरोपियों की तलाश शुरू हुई. पुलिस ने वीडियो के आधार पर 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया.
डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपी दशाश्वमेध थाने के मुस्लिम बहुल मदनपुरा इलाके के रहने वाले हैं. इनमें मो.अव्वल, आजाद अली, मो.समीर, अहमद उर्फ राजा, नूर इस्माइल, मो.फैजान, मो.अहमद, मो.तहसीम, महफूज आलम, मो तौसीफ अहमद, आमिर कैफी, नेहाल अफरीदी, मो. अनस और दानिश सैफी शामिल हैं.
आरोपियों की पहचान हो जाने के बाद सभी के नाम एफआईआर में शामिल किए गए. जिस मोटरबोट पर ये सब हुआ, उसके मालिक और चालक विनोद के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई. गिरफ्तारी के बाद सभी 14 आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया. कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी मुस्लिम युवक रोते नजर आए. कोर्ट रूम में उन्होंने कान पकड़कर माफी भी मांगी, लेकिन कोर्ट ने गंभीर धाराओं के बढ़ जाने की वजह से उनकी पुलिस रिमांड मंजूर कर ली.
आरोपियों की जमानत याचिका सुनते हुए कोर्ट ने उनकी क्रिमिनल हिस्ट्री मांगी थी. सोमवार, 23 मार्च 2026 को इसी पर सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें बेल देने से इनकार कर दिया.
'मजहब के साथ मजाक'
बता दें कि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने भी आरोपी युवकों की इस हरकत की निंदा की थी. कमेटी के संयुक्त सचिव सैयद मो.यासीन ने कहा कि इफ्तार कोई सैर या पिकनिक नहीं है. यह एक शुद्ध धार्मिक कार्य है. युवकों ने जो किया वो जहालत है और मजहब के साथ मजाक है.
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