सिविक सेंस किसी दुकान पर नहीं मिलती. लोग कार खरीद सकते हैं. कार में बैठकर नारियल भी खरीद सकते हैं. लेकिन सिविक सेंस कहां से खरीदेंगे? वह तो जिम्मेदारी से आता है. एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. कार की पिछली सीट पर बैठी है. साथ में तीन-चार साल की उम्र का बच्चा भी है. बच्चा नारियल के खोल में पेशाब कर रहा है. ठीक है. बच्चे को तेज पेशाब लगा होगा. नारियल का खोल खाली था. मां ने उसमें पेशाब करा दिया. लेकिन इसके बाद जो किया, वो थोड़ी समस्या की बात है.
कार में बच्चे के पेशाब से नारियल भरा, फिर बाहर फेंका, वीडियो जिसने देखना तिलमिला गया!
बच्चे के पेशाब करने के बाद महिला ने पेशाब से भरे नारियल के खोल को गाड़ी की खिड़की से वहीं सड़क पर फेंक दिया. विडंबना ये है कि इसका वीडियो बनाया गया. सोशल मीडिया पर शेयर भी किया गया.


सिविक सेंस की बहस वहीं से शुरू होती है. बच्चे के पेशाब करने के बाद महिला ने पेशाब से भरे नारियल के खोल को गाड़ी की खिड़की से वहीं सड़क पर फेंक दिया. विडंबना ये है कि इसका वीडियो बनाया गया. सोशल मीडिया पर शेयर भी किया गया. वीडियो में एक व्यक्ति बच्चे के नारियल के खोल में पेशाब करते वीडियो बना रहा है. बातचीत में ये बात सामने आती है कि महिला बच्चे के लिए डायपर का इस्तेमाल नहीं करती. नारियल का खोल खाली था इसलिए उसमें पेशाब करा दिया.
वीडियो बनाने वाले और वीडियो में आने वाले इस पूरी घटना पर हंस रहे हैं. लेकिन जब यूजर्स के सामने ये वीडियो आया तो उनकी भौंहें तन गईं. लोग महिला पर बरस पड़े. सोशल मीडिया पर ही सिविक सेंस की पूरी क्लास ही लग गई. National Crime Investigation Bureau ने इसका वीडियो अपने एक्स अकाउंट पर शेयर किया. लिखा,
ये है हमारा सिविक सेंस. एक महिला ने नारियल को ‘चलते-फिरते टॉयलेट’ के रूप में इस्तेमाल करके सही जगह न फेंकने के बजाय सड़क पर ही फेंक दिया और हैरानी की बात ये है कि इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर भी किया गया. मानो यह उनके लिए एक सामान्य बात हो. आखिर इस वीडियो से क्या संदेश देना चाह रहे ये लोग? क्या इस तरह किसी के घर या दुकान के सामने गंदगी फैलाना अब सामान्य व्यवहार बनता जा रहा है?
लोगों ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने महिला को खूब खरी-खोटी सुनाई. किसी ने उनके सिविक सेंस पर सवाल उठाया तो किसी ने सरकार के टॉयलेट-वॉशरूम के इंतजाम पर. किसी ने संस्कार की दुहाई दी तो किसी ने मिडिल क्लास की प्रवृत्तियों पर सवाल उठाया.
‘The Jammu Talks - गल जम्मू दी’ नाम के यूजर ने लिखा,
सिविक सेंस की तो रहने ही दीजिए. इस बच्चे की परवरिश और कैसे मूल्य इसे मिलेंगे? क्या सीखा होगा बच्चे ने? शायद हंसी-मजाक के उद्देश्य से यह वीडियो बनाया गया होगा, लेकिन यह न भूलें. बच्चे कच्ची मिट्टी जैसे होते हैं. जिस सांचे में ढालेंगे. बच्चे वैसा ही आकार लेंगे.
आदित्य सिंह ने कहा, “इसके बाद इन्हें कमियां सरकार में ही निकालनी हैं. इन जैसों को लगता है कि सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है. जनता को बस गंदा करना है. फिर ये विदेशों से तुलना करते हैं. जब तक देश में सख्त कानून नहीं बनेंगे, ऐसे लोगों नहीं सुधर सकते.”
राव ए नाम के यूजर ने सवाल किया कि क्या हमारे यहां सड़कों पर वॉशरूम हैं. क्या हम उन्हें साफ-सुथरा रखते हैं. पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाओ. फिर सिविक सेंस की बात करना.
@iravikaloya ने लिखा, ये वो मिडिल क्लास है, जो दूसरे मिडिल क्लास को शांति से स्वच्छता से जीते हुए देखना नहीं चाहते. विजय कुमार ने सुझाव दिया कि इस महिला के ऊपर 15000 का जुर्माना लगाना चाहिए. यह हमारे वातावरण और समाज को दूषित कर रही है.
मेरा भारत नाम के यूजर का कहना है कि कार में बैठे होने से और केवल पैसे वाले होने से मनुष्य में अक्ल आ जाएगी, ऐसा नहीं है. इस महिला ने यही बताया है.
सोरेन परमाणिक ने भी सामाजिक सवाल उठाया और कहा कि भारत में सार्वजनिक शौचालय ‘न के बराबर’ हैं. साफ शौचालय तो हैं ही नहीं. सिर्फ मॉल और एयरपोर्ट्स के ही टॉयलेट ठीक-ठाक होते हैं. 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए तो काफी समस्या होती है.
पंडित सुधीर शर्मा नाम के यूजर ने NCIB को ही पूरा वीडियो शेयर करने की चुनौती दे दी. उन्होंने कहा कि भ्रामक और अधूरे वीडियो शेयर करना भी सिविक सेंस न होने का उदाहरण है. हो सकता है वहां पहले से ही डस्टबिन हो, जिसमें महिला ने नारियल फेंका हो. पूरी जांच के बिना वीडियो डालकर किसी की इज्जत को उछालना… मानहानि का दावा बनता है.
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