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पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की बेल अर्जी रिजेक्ट, कोर्ट ने कहा- 'धोखाधड़ी का 'क्लासिक उदाहरण'

पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने OBC और विकलांगता कोटा का गलत तरीके से लाभ उठाया और निर्धारित सीमा से ज्यादा अटेम्प्ट देकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की. उनके खिलाफ यह भी आरोप है कि उन्होंने यह लाभ उठाने के लिए झूठे दस्तावेज और प्रमाणपत्र दिखाए थे.

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पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर (तस्वीर : इंडिया टुडे)

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. उनकी याचिका पहले ट्रायल कोर्ट में खारिज हो चुकी थी, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. अगस्त में उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी गई थी, लेकिन अब कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.

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क्या आरोप है पूजा खेडकर पर?

पूर्व ट्रेनी IAS पूजा खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने OBC और विकलांगता कोटा का गलत तरीके से लाभ उठाया और निर्धारित सीमा से ज्यादा अटेम्प्ट देकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की. उनके खिलाफ यह भी आरोप है कि उन्होंने यह लाभ उठाने के लिए झूठे दस्तावेज और प्रमाणपत्र दिखाए थे.

UPSC ने जांच के बाद उनकी अफसरी छीन ली. मामला कोर्ट तक पहुंचा. पूजा खेडकर ने ट्रायल कोर्ट में बेल की अर्जी दायर की जो कि अगस्त 2024 में ही खारिज कर दी गई थी. इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.

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क्या कहा दिल्ली हाईकोर्ट ने?

इंडिया टुडे से जुड़ीं सृष्टि ओक्षा की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट ने पूजा खेडकर की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में इस तरह की धोखाधड़ी मेहनती और योग्य उम्मीदवारों को हतोत्साहित करती है.

कोर्ट का कहना है, “खेडकर ने जो कदम उठाए हैं, वो एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं. अगर उन्हें बेल दी जाती है, तो जांच प्रभावित हो सकती है, और गवाहों व सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा है. यह घटना न केवल एक संवैधानिक संस्था के साथ धोखाधड़ी का उदाहरण है, बल्कि समाज के साथ भी एक बड़ा धोखा है. इसकी गहराई से जांच जरूरी है ताकि इस साजिश के हर पहलू को उजागर किया जा सके.” 

यही नहीं, कोर्ट ने इसे संवैधानिक संस्था और समाज के खिलाफ धोखाधड़ी का ‘क्लासिक उदाहरण’ बताया.

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इसे भी पढ़ें - पूजा खेडकर अब IAS अधिकारी नहीं, UPSC ने उम्मीदवारी वापस ली

कोर्ट ने खेडकर के खिलाफ क्या पाया?

याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा-

 - खेडकर का नाम बदलने का मकसद साफतौर पर दुर्भावनापूर्ण से भरा था, जो उनके पैरेंट्स के मैरिटल स्टेटस से जुड़ा हुआ नहीं था.
- उन्होंने न तो अपना नाम पासपोर्ट में बदला, न ही बैंक अकाउंट्स में.
- जांच में सामने आया है कि खेडकर के सरकारी विभागों में गहरे कनेक्शन हैं, जो जांच को प्रभावित कर सकते हैं.
- उनके परिवार के पास 23 अचल संपत्तियां और 12 गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं.
- खेडकर के पास खुद तीन लग्जरी कारें (BMW, Mercedes, Mahindra Thar) हैं, जो उनके परिवार की छह लाख रुपये की सालाना आमदनी से मेल नहीं खाता.

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