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UN की रिपोर्ट ने बांग्लादेश सरकार की खोली पोल, साफ लिखा- हिंदुओं पर हमले बढ़े...

बांग्लादेश की अंतिरम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इन हमलों को लगातार नकारते रहे हैं. वे इसे बढ़ाचढ़ाकर पेश किया गया ‘प्रोपेगेंडा’ कहते हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की 12 फरवरी को सामने आई एक रिपोर्ट ने यूनुस के दावों की पोल खोल दी है.

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UN की रिपोर्ट ने यूनुस सरकार के दावों की खोली पोल, बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़े हमले. (तस्वीर:आजतक)

बांग्लादेश में पिछले साल हुए तख्तापलट के बाद अल्पसंख्यक, खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों में लगातार इजाफा हुआ है. हालांकि, बांग्लादेश की अंतिरम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस इन हमलों को लगातार नकारते रहे हैं. वे इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया ‘प्रोपेगेंडा’ कहते हैं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार (UNHRC) की 12 फरवरी को सामने आई एक रिपोर्ट ने यूनुस के दावों की पोल खोल दी है.  

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संयुक्त राष्ट की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद शेख हसीना को सत्ता से बेदखल होना पड़ा. वे अपना मुल्क छोड़कर अगस्त, 2024 में भारत आ गईं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार (UNHRC) की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने 16 सितंबर को बांग्लादेश जाकर वहां की स्थिति को देखा. टीम में फोरेंसिक, हथियार, जेंडर से जुड़े एक-एक एक्सपर्ट शामिल थे. जांच टीम ने यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल सहित प्रदर्शन स्थलों का दौरा किया. इस दौरान 900 से अधिक लोगों के बयान लिए गए.

रिपोर्ट के मुताबिक, हसीना के सत्ता से बेदखल होने के पहले ही हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की शुरुआत हो गई थी. न केवल हिंदू बल्कि अहमदिया मुसलमानों और चटगांव के पहाड़ी इलाकों के समूहों को भी इन हमलों का सामना करना पड़ा.

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रिपोर्ट में उन जगहों के बारे में भी बताया गया है, जहां हिंदुओं के खिलाफ हिंसा हुई थी. इसके मुताबिक, हसीना सरकार के जाने के बाद हिंदुओं के घरों, व्यवसायों और पूजा स्थलों पर बड़े पैमाने पर हमले हुए. ठाकुरगांव, लालमोनिरहाट और दिनाजपुर जैसे ऐतिहासिक रूप से तनावग्रस्त इलाकों के अलावा सिलहट, खुलना और रंगपुर जैसी जगहों पर भी हमले हुए हैं.

हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में संपत्ति का नुकसान, आगजनी और धमकियां शामिल थीं. पुलिसिया कार्रवाई सही से नहीं होने के कारण इनमें और इजाफा हो गया.  

यह भी मालूम पड़ा कि हिंदुओं के खिलाफ हमलों का कारण धार्मिक और नस्लभेदी भेदभाव, स्थानीय समुदायों के बीच चल रही जमीन को लेकर लड़ाई जैसे पारस्परिक मुद्दे शामिल हैं. रिपोर्ट में जमात ए इस्लामी और बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) के सदस्यों का जिक्र है. कहा गया है कि इन संगठनों के अलावा कुछ स्थानीय नेता धार्मिक समूहों के खिलाफ हिंसा में शामिल थे.

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अन्य संस्थानों की रिपोर्ट में भी यही बात

बांग्लादेश की 17 करोड़ जनसंख्या में 8 प्रतिशत हिंदू अल्पसंख्यक हैं. अगस्त 2024 में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के एक हफ्ते बाद इंडिया टुडे डिजिटल ने कई रिपोर्टों की जांच की और बांग्लादेश में सूत्रों से बात की. इसमें सामने आया कि शेख हसीना शासन के पतन के बाद तीन दिनों तक चली अराजकता में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ 200 से अधिक घटनाएं सामने आईं.  

नवंबर 2024 में, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (TIB) की एक रिपोर्ट से मालूम पड़ा कि बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस सरकार के पहले 100 दिनों में हिंदुओं सहित अल्पसंख्यकों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था. रिपोर्ट में हसीना के बाद के शासन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा की 2010 घटनाओं का हवाला दिया गया है. इस दौरान प्रशासन ने अपराधियों की पहचान करने और उन्हें दंडित करने के प्रयासों में पूरी तन्मयता से मुस्तैदी नहीं दिखाई.

इसके अलावा पिछले सप्ताह संसद में विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री (MoS) कीर्ति वर्धन सिंह ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमले से जुड़े आंकड़े सामने रखे. इसके मुताबिक, 26 नवंबर, 2024 से 25 जनवरी, 2025 के बीच बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हमलों के 76 मामले सामने आए हैं. रिपोर्ट में अगस्त के बाद से बांग्लादेश में 23 हिंदुओं की मौत और 152 हिंदू मंदिरों पर हमले की घटनाओं का जिक्र किया गया है.

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