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यूएई के राष्ट्रपति 3 घंटे के लिए भारत आए, PM मोदी से मिले और पाकिस्तान को बड़ा झटका दे दिया

UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान पिछले हफ्ते तीन घंटे के लिए दिल्ली में थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर जोर दिया. इसके बाद वो वापस लौटे और पाकिस्तान को एक डील के लिए न बोल दिया.

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पाकिस्तान ने सोचा न होगा कि UAE उसके साथ ऐसा करेगा (फोटो- PTI)

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को संचालित करने की योजना से पीछे हटने का फैसला किया है. ये खबर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के बाद सामने आई है. नया डेवलपमेंट UAE-पाकिस्तान संबंधों में खींचतान और भारत के साथ मजबूत होती साझेदारी की ओर इशारा करता है.

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दरअसल, अगस्त 2025 में UAE और पाकिस्तान के बीच इस्लामाबाद एयरपोर्ट के संचालन को आउटसोर्स करने की बातचीत शुरू हुई थी. UAE को एयरपोर्ट का प्रबंधन सौंपा जाना था. जो पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलों के बीच बड़े निवेश और एक्सपर्टीज का सौदा माना जा रहा था. लेकिन अब पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ने इस डील से पूरी तरह किनारा कर लिया है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इसका कारण ये बताया गया है कि UAE स्थानीय पार्टनर चुनने में असफल रहा और प्रोजेक्ट में उसकी रुचि खत्म हो गई है. UAE राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की दिल्ली यात्रा भी इसकी वजह बताई जा रही है. पिछले हफ्ते राष्ट्रपति जायद तीन घंटे के लिए दिल्ली में थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर जोर दिया. इस दौरान एक स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप की दिशा में समझौता हुआ और डिफेंस कोऑपरेशन पर लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया गया.

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UAE-पाकिस्तान संबंधों में तनाव

यात्रा के बाद UAE ने 900 भारतीय कैदियों की रिहाई को मंजूरी दी, जिसे भारत के प्रति सद्भावना के तौर पर देखा जा रहा है. दूसरी ओर, UAE-पाकिस्तान संबंधों में लंबे समय से तनाव बढ़ रहा है. पहले UAE पाकिस्तान का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर था, लाखों पाकिस्तानी वहां काम करते थे और रेमिटेंस भेजते थे. दोनों देशों ने डिफेंस, एनर्जी और इन्वेस्टमेंट में सहयोग किया. लेकिन हाल के वर्षों में पाकिस्तान में सुरक्षा चिंताएं, लाइसेंसिंग विवाद, पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी उद्यमों में खराब गवर्नेंस ने उसका भरोसा कम किया है.

पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का प्राइवेटाइजेशन भी इसी संकट का हिस्सा रहा. UAE ने अफगानिस्तान जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में एयरपोर्ट मैनेज किए हैं, फिर भी इस्लामाबाद प्रोजेक्ट से हटना उसके घटते भरोसे को दिखाता है.

ये घटना रीजनल बैलेंस में बदलाव को भी उजागर करती है. पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस डील की है और 'इस्लामिक NATO' जैसी पहल में शामिल होने की बात भी कही है. वहीं UAE ने भारत के साथ नए डिफेंस टाई-अप किए हैं. UAE और सऊदी अरब के बीच यमन जैसे मुद्दों पर मतभेद भी बढ़े हैं. ऐसे में UAE की प्राथमिकताएं भारत की ओर ज्यादा झुकती दिख रही हैं.

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पाकिस्तान सरकार ने कुछ रिपोर्ट्स में डील कैंसल होने से इनकार किया है और एयरपोर्ट को प्राइवेटाइजेशन प्लान में शामिल करने की बात कही है. लेकिन कई रिपोर्ट्स का मानना है कि UAE का ये फैसला पाकिस्तान की इकोनॉमिक और डिप्लोमेटिक चुनौतियों को और गहरा कर सकता है. भारत-UAE की बढ़ती नजदीकी से क्षेत्रीय संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहे हैं. 

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