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हॉस्पिटल आने की जगह 'वीडियो कॉल से इलाज' कर रही थी डॉक्टर, जुड़वां बच्चों की गर्भ में ही मौत हो गई

Telangana 'Video Call' Treatment: जब बाद में वीडियो कॉल के ज़रिए इलाज करने वाली डॉक्टर अस्पताल पहुंचीं, तो महिला को बताया गया कि उनके बच्चों की मौत हो चुकी है. ऐसे में महिला के रिश्तेदारों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने क्या मांग की?

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अस्पताल के ख़िलाफ़ मेडिकल लापरवाही की धारा में FIR दर्ज की गई है. (प्रतीकात्मक फ़ोटो - PTI)

तेलंगाना के रंगारेड्डी ज़िले की रहने वाली 26 साल की बत्ती कीर्ति पांच महीने से गर्भवती थीं. थीं इसलिए, क्योंकि अब पेट में ही उनकी जुड़वां बच्चों की मौत हो गई है. आरोप है कि इसकी वजह एक प्राइवेट अस्पताल वालों की लापरवाही है. क्योंकि जिस डॉक्टर को कीर्ति का इलाज करना था, वो कथित तौर पर वीडियो कॉल के ज़रिए नर्सों को इंस्ट्रक्शन दे रही थीं.

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पुलिस ने इब्राहिमपट्टनम के इस विजया लक्ष्मी अस्पताल के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) और धारा 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है. ये धाराएं मेडिकल लापरवाही से जुड़ी हुई हैं.

मामला क्या है?

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़, बत्ती कीर्ति रंगारेड्डी ज़िले के एलिमिनेडु गांव की रहने वाली हैं. उनकी शादी को सात साल हो चुके थे. क़रीब पांच महीने पहले इन विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी IVF के ज़रिए उन्होंने गर्भधारण किया था. बत्ती कीर्ति 6 अप्रैल को चेक-अप कराने विजया लक्ष्मी अस्पताल गई थीं.

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इस दौरान डॉक्टर वी अनुषा रेड्डी ने देखा कि कीर्ति का गर्भाशय ग्रीवा ढीला हो गया था. (गर्भाशय ग्रीवा आमतौर पर दृढ़ होना चाहिए.) ऐसे में डॉक्टर ने गर्भाशय ग्रीवा के आसपास के क्षेत्र को सिल दिया और उसे घर भेज दिया.

लगभग एक महीने बाद यानी 4 मई की सुबह कीर्ति को पेट में असहनीय दर्द होने लगा. ऐसे में उन्हें वापस उसी अस्पताल ले जाया गया. लेकिन उस समय डॉक्टर अनुषा रेड्डी मौजूद नहीं थीं. होना तो ये चाहिए था कि कीर्ति को किसी दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जाता.

‘फ़ोन पर इलाज’

लेकिन इसके बजाए उन्होंने ‘फोन पर ही’ महिला का इलाज करने का फ़ैसला किया. उन्होंने नर्सों को दर्द को कंट्रोल करने के लिए इंजेक्शन लगाने का  ‘निर्देश दिया’. लेकिन ये इंजेक्शंस न सिर्फ़ दर्द को कम करने में विफल रहे. बल्कि उसके गर्भाशय ग्रीवा में टांके भी टूट गए.

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ऐसे में क़रीब 10.30 बजे कीर्ति के गर्भ से जुड़वां बच्चों को निकाला गया. उसका बहुत ज़्यादा खून बह गया था. जब डॉ. अनुषा रेड्डी वहां पहुंचीं, तो कीर्ति को बताया गया कि उनके बच्चों की मौत हो चुकी है. ऐसे में महिला के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने प्रबंधन के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की.

वहीं, परिवार वालों ने शिकायत भी दर्ज कराई है. इधर रंगारेड्डी के जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (DMHO) बी वेंकटेश्वर राव ने कहा कि कीर्ति सुरक्षित है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक़, उन्होंने कहा,

डॉक्टर ने नर्सों से मुश्किल प्रक्रिया को करने को कहा. ये बेहद गैर-पेशेवर था. हम पूरी जांच करेंगे. फिर अपनी रिपोर्ट पुलिस और उच्च अधिकारियों को सौंपेंगे.

पुलिस ने कहा है कि वे स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे.

वीडियो: घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने वाले शख्स ने क्या बताया

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