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आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं? सुप्रीम कोर्ट की ये चेतावनी मुसीबत में डाल सकती है

आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को कड़ी चेतावनी दी है. कोर्ट ने मंगलवार 13 जनवरी को कहा कि अगर कुत्तों के काटने की वजह से किसी की मौत होती है तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर भारी मुआवजा लगाएंगे.

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सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले में सरकार को फटकार लगाई है (india today)

आवारा कुत्तों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों पर और ज्यादा सख्त हो गया है. मंगलवार 13 जनवरी को कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कुत्तों के काटने से किसी की मौत होती है तो राज्य और केंद्र सरकारों पर भारी मुआवाजा लगाएंगे. कोर्ट इस बात से नाराज था कि सरकारें एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी ABC नियमों को ठीक तरीके से लागू नहीं करा पा रही हैं. सिर्फ सरकारों को नहीं, कोर्ट ने उन लोगों को भी फटकार लगाई, जो आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं. 

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लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि 'डॉग फीडर्स' को भी जिम्मेदारी लेनी होगी. वो जिन आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें घर लेकर क्यों नहीं जाते? इन कुत्तों को सड़कों पर लोगों का पीछा करने और उन्हें काटने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी. उन्होंने कहा, 

ये समस्या बहुत दिनों से चल रही है. इस पर केंद्र और राज्य सरकारों से सख्ती से जवाब मांगना होगा. कहा गया कि 1950 के दशक से संसद इस पर विचार कर रही है लेकिन राज्य और केंद्र सरकारों की लापरवाही से यह समस्या हजार गुना बढ़ गई है. 

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कोर्ट ने आगे कहा कि ये पूरी तरह से सरकार की नाकामी है और अगर किसी भी व्यक्ति की या बच्चे की कुत्ते के काटने से जान गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार सरकार से भारी मुआवजा वसूला जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसका मकसद सिर्फ कानून का सही तरीके से पालन कराना है. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा,

जब एक 9 साल के बच्चे पर कुत्ते हमला करते हैं तो जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या उन संगठनों की जो उन्हें खाना खिला रहे हैं? क्या हम इस समस्या से आंख मूंद लें?

उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई कुत्ता किसी की निगरानी में है तो उसे पालतू माना जाएगा और इसके लिए लाइसेंस होना चाहिए. सड़क पर घूमने वाले कुत्तों की कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती. पीठ ने वकीलों से अनुरोध किया कि उन्हें केंद्र, राज्य और अन्य एजेंसियों से जवाबदेही तय करने दें. उन्होंने कहा,

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हमें आदेश पारित करने दीजिए. हमें राज्यों और केंद्र के साथ आधा दिन बैठकर देखना है कि उनके पास कोई ठोस योजना है या नहीं. 

बेंच ने कहा कि समस्या हजार गुना बढ़ चुकी है और वो सिर्फ कानून का पालन चाहते हैं. 

डॉग फीडर्स को फटकार

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों यानी डॉग फीडर्स को भी निशाने पर लिया. ऐसे लोगों को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा,

कुत्तों को अपने घर ले जाइए. वहीं रखिए. उन्हें खुले में घूमने, काटने और लोगों का पीछा करने क्यों दिया जाए? कुत्ते के काटने का असर जीवन भर रहता है.

जो लोग खुद को 'डॉग लवर्स' कहते हैं, ऐसे लोगों से भी सुप्रीम कोर्ट खफा दिखा. सुनवाई के दौरान बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक वकील राधेश व्यास को कुत्ते ने काट लिया था. इस घटना के बाद नगर निगम के लोग जब आवारा कुत्तों को पकड़ने गए तब कथित तौर पर बार काउंसिल के कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब गुजरात में एक वकील को कुत्ते ने काटा और नगर निगम के लोग कुत्तों को पकड़ने पहुंचे तो उन्हें पीटा गया. किसने पीटा? वकीलों ने. यही तथाकथित डॉग लवर्स हैं.

कुत्तों के पक्ष में वकीलों की दलील 

डॉग लवर्स की ओर से कोर्ट में पेश होने वाले वकीलों ने जजों के सामने दलील दी कि सरकारों के पास इतना पैसा नहीं है कि वह आवारा कुत्तों को रखने की स्थायी व्यवस्था कर पाएं. उन्होंने कुत्तों के संदर्भ में जीवित प्राणियों के साथ दया और करुणा से पेश आने की वकालत की और कहा कि कुत्तों को हटाने से समस्या हल नहीं होगी. एक वकील ने तो आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए मोटिवेट करने वाली राष्ट्रीय नीति लाने की मांग कर दी. इस पर जस्टिस संदीप मेहता भड़क गए. उन्होंने वकील को फटकार लगाते हुए कहा,

तो फिर सड़कों पर रहने वाले अनाथ बच्चों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहन क्यों न दिया जाए?

बहस के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 20 जनवरी 2026 की दी है. बता दें कि इस मसले पर पिछले हफ्ते भी सुप्रीम कोर्ट में चर्चा हुई थी. तब भी सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि वो ये नहीं कह रहा कि सभी आवारा कुत्तों को हटा दिया जाए, बल्कि वो सिर्फ नियमों को सही तरीके से लागू करने की बात कर रहा है.

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