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I-PAC रेड: SC ने ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगाई, ममता सरकार से जवाब मांगा

I-PAC रेड मामले में सुनवाई करते हुए Supreme Court ने कहा कि ED को चुनावी या राजनीतिक गतिविधियों में दखल देने का अधिकार नहीं है. लेकिन राज्य सरकार की एजेंसियों को भी केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.

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ईडी ने ममता बनर्जी पर I-PAC रेड में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया है. (इंडिया टुडे)

I-PAC रेड मामले में ED की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसी के आरोपों को ‘गंभीर’ बताते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है. साथ ही ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर स्टे लगा दिया है.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ED के पास चुनावी कामों या पार्टी गतिविधियों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है. लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा कि राज्य सरकार की एजेंसियों को भी केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं हैं. कोर्ट के अनुसार यह मामला देश में कानून के शासन और संवैधानिक संस्थाओ के स्वतंत्र कामकाज पर गंभीर सवाल उठाता है. 

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा,

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 इस मामले में कुछ बड़े सवाल हैं जिनका जवाब नहीं मिला तो अराजकता फैल सकती है. अगर केंद्रीय एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की जांच के लिए ईमानदारी से अपना काम कर रही हैं तो क्या राजनीति करके उन्हें रोका जा सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ईडी की रेड की CCTV फुटेज और सर्च की रिकॉर्डिंग करने वाले दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे की सुनवाई में कोई साक्ष्य प्रभावित न हो. कोर्ट ने 3 फरवरी को अगली सुनवाई होने तक ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर भी रोक लगा दी है. 

ED ने क्या-क्या दलीलें दीं?

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ED की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने दावा किया कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहुंचीं और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डॉक्यूमेंटस अपने साथ ले गईं. ममता के साथ बंगाल DGP राजीव कुमार भी पुलिस टीम के साथ पहुंचे थे. पुलिस ने ED अफसरों के मोबाइल छीन लिए. सीएम मीडिया के सामने भी गईं. इस तरह से ED के काम में रुकावट आती है और उसका मनोबल गिरता है. 

ED की ओर से पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा को तुरंत निलंबित करने और उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई. केद्रीय जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया,

 हम 14 जनवरी को हुई सुनवाई से संतुष्ट नहीं हैं. हमें काफी परेशानी हुई. सुनवाई के दौरान बार-बार माइक बंद हो रहा था. कोर्ट में भीड़ इकट्ठा करने के लिए बस और गाड़ियों की व्यवस्था की गई थी. एक्टिंग चीफ जस्टिस को आदेश देना पड़ा कि वकीलों के अलावा किसी को भी एंट्री नहीं दी जाएगी.

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि ED आर्टिकल 21 के तहत अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग करने के लिए सुप्रीम कोर्ट आई है. ED के अधिकारियों को धमकी मिली थी. हम चाहते हैं कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए. मामला सीबीआई के पास गया तो इसे राज्य से बाहर ट्रांसफर किया जा सकता है.

2742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा छापा

ED ने कोयला तस्करी से जुड़े 2742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस को लेकर I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था. CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी. और ED ने 28 नवंबर 2020 को इस मामले में जांच शुरू की थी.

वीडियो: छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के हाथ में कौन सी फाइल थी? कोर्ट तक बात पहुंच गई

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