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'गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं', कानपुर देहात के बाढ़ पीड़ितों को योगी के मंत्री का 'दिव्यज्ञान'

Uttar Pradesh के कई इलाकों में बाढ़ ने तबाही मचाई हुई है. राज्य के 17 जिलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में है. लोग घर गृहस्थी छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. Kanpur Dehat में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. बाढ़ ने हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है.

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संजय निषाद बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा करने पहुंचे थे. (एक्स)

देश के बाकी राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में बहुत समस्याएं हैं. लेकिन उसके 'समाधान' का ऐसा ‘मैकेनिज्म’ कहीं और दुर्लभ है. राज्य के ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा बीते दिनों बिजली मांगने के जवाब में जय श्री राम का नारा लगवा रहे थे. वहीं अब योगी सरकार के एक और मंत्री संजय निषाद बाढ़ में अपना घर गृहस्थी गंवा चुके लोगों को गंगा के पानी के स्पर्श से परलोक सुधारने का मंत्र दे रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ ने तबाही मचाई हुई है. राज्य के 17 जिलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. लोग घर गृहस्थी छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. कानपुर देहात में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. बाढ़ ने हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है. योगी आदित्यनाथ ने अपने कैबिनेट के 11 मंत्रियों को ग्राउंड जीरो पर जाकर बाढ़ की निगरानी का जिम्मा दिया है. इन सभी मंत्रियों को राहत शिविर, बांधों और जलभराव वाले गांवों का दौरा करने को कहा गया है. 

मुख्यमंत्री के आदेश के तहत यूपी सरकार में मत्स्य पालन विभाग संभालने वाले संजय निषाद बाढ़ से जूझ रहे कानपुर देहात का दौरा करने पहुंचे थे. यहां पहुंच कर लोगों की परेशानी समझने और दुख दर्द साझा करने के बजाए मंत्री जी अपना 'दिव्य ज्ञान' बांटने लगे. उन्होंने कहा,

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 गंगा मैया गंगा पुत्रों के पांव धुलने आती हैं. गंगा के पुत्र सीधे स्वर्ग जाते हैं. और विरोधी लोग आपको उल्टा सीधा पढ़ाते हैं. सौभाग्य है सबका कि गंगा जी आ जाती है. गेहूं की फसल अच्छी होती है. भले ही तीन महीने परेशानी होती हो.

संजय निषाद कानपुर देहात के भोगनीपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाके का निरीक्षण करने पहुंचे थे. यहां पहुंच कर मंत्री जी गंगा मैया की महिमा बताने लगे. लेकिन उनको इतना भी पता नहीं था कि वहां गंगा नहीं यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के चलते बाढ़ आया हुआ है. 

हैरत की बात रही कि मंत्री जी के साथ गए सरकारी अमले में से भी किसी ने उनको इसके बारे में नहीं बताया. हालांकि इससे कुछ फर्क पड़ता इसकी उम्मीद कम ही है. लेकिन तब मंत्री जी शायद यमुना के महात्म्य से लोगों को अवगत करा पाते.

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उत्तर प्रदेश में बाढ़ का सितम जारी है. राज्य सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरेया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा और फतेहपुर शामिल है.

इन जिलों की 37 तहसीलों के 402 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी के अनुसार, कुल 84,392 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. इनमें से अब तक 47, 906 पीड़ितों तक राहत सहायता दी जा चुकी है. 

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 493 नावों और मोटरबोट्स की मदद से राहत सामग्री बांटी जा चुकी है. और बाढ़ की वजह से 343 मकानों को नुकसान पहुंचा है. जिसमें से 327 मामलों में पीड़ितों को सहायता राशि दी जा चुकी है. इसके अलावा राज्य सरकार ने 905 बाढ़ राहत शिविर बनाए हैं, जिनमें फिलहाल 11, 248 लोग अस्थायी तौर पर रह रहे हैं.

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