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राम मंदिर के चढ़ावे पर नहीं रुक रही तकरार, ट्रस्ट की सफाई के बाद अखिलेश ने फिर दागे सवाल

Ram Mandir Donation: राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर श्री राम जन्मभूमि न्यास समिति के महासचिव चंपत राय ने सफाई जारी की, लेकिन Akhilesh Yadav ने उस पर भी सवाल पूछ लिया है. चंपत राय के जवाब से AAP के संजय सिंह भी संतुष्ट नहीं हैं.

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राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन पर अखिलेश यादव ने फिर सवाल उठाए. (PTI/SRJTK)

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  • अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने 7 जून 2026 को चढ़ावे की रकम के गबन से संबंधित आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मंदिर का ऑडिट नियमित रूप से और पारदर्शी तरीके से किया जाता है।
  • समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मंदिर चढ़ावे के कथित गबन के आरोप लगाए, जिनके जवाब में ट्रस्ट ने ऑडिट प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी साझा की।
  • अखिलेश यादव समेत विपक्षी पार्टियों के आरोपों के बाद बीजेपी के प्रवक्ता अजय आलोक ने आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष की विनाशकारी आलोचना की और ट्रस्ट के बैंकिंग एवं ऑडिट प्रक्रियाओं की पुष्टि की।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर श्री राम जन्मभूमि न्यास समिति के महासचिव चंपत राय की सफाई आई है. उन्होंने मंदिर के ऑडिट का जिक्र करते हुए किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दानपात्र से करोड़ों रुपये की रकम गायब होने का दावा किया था.

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इन आरोपों पर चंपत राय ने ऑडिट की जानकारी दी और बताया कि यह कैसे किया जाता है, और इसमें कौन-कौन लोग शामिल होते हैं. 7 जून 2026 को एक बयान में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा,

“श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अपने भिन्न-भिन्न कार्यों का ऑडिट समय-समय पर करता रहता है. हुंडी काउंटिंग कमरे का ऑडिट भी होता है. हुंडी काउंटिंग कमरे का ऑडिट रामजन्म तीर्थ क्षेत्र के न्यासीगण कार्यकर्ता और स्टेट बैंक के कर्मचारी मिलकर करते हैं. यह कार्य कई दिनों तक चलता है. यही कार्य आजकल हो रहा है. कोई भी उल्लेखनीय बात किसी के भी ध्यान में अभी तक नहीं आई है.”

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस सफाई पर भी सवाल उठाए. 7 जून को उन्होंने X पोस्ट में लिखा,

"स्पष्टीकरण ही स्पष्ट नहीं है. लगता है ये इनके लिए हर हफ्ते की साधारण बात है, और इतनी अधिक साधारण है कि ये इसे अब 'उल्लेखनीय' भी नहीं मानते हैं. चेहरे के भाव और देह की भाषा हताशा और निराशा से भरी है."

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अखिलेश यादव का पोस्ट. (X)

अखिलेश ने आगे सवाल किया कि इस हेराफेरी की शंका के केंद्र में जब कोई एक व्यक्ति विशेष है ही नहीं, तो फिर किसी एक के स्पष्टीकरण का क्या महत्व है. अखिलेश यादव ने चंपत राय के बयान की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने लिखा,

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"ये भी स्पष्ट किया जाए कि 40 सेकंड का स्पष्टीकरण आने में इतने घंटे क्यों लगे और स्पष्टीकरण के नाम पर 1 मिनट बोलना भी भारी क्यों पड़ रहा है. प्रदेश सरकार की चुप्पी की तरह ये सफाई भी संदिग्ध है."

जिस तरह के आरोप अखिलेश यादव ने लगाए, उसी से मिलते-जुलते आरोप आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने लगाए. उन्होंने एक बयान में कहा,

“मैं पहले दिन से कह रहा हूं की भारतीय जनता पार्टी के लोगों को, भाजपाईयों को प्रभु श्रीराम में कोई आस्था नहीं है, कोई श्रद्धा नहीं है. ये फर्जी, खाली अपने आपको रामभक्त बताने का काम करते हैं. इनसे सावधान रहना होगा. ये चंदा चोर लोग हैं. मैं पहले दिन से कह रहा हूं. इनसे सावधान रहिए. ये करोड़ों की चंदा चोरी का जो मामला हुआ है, नया जो मामला सामने आया है. इसको लेकर आवाज उठाइए.”

उन्होंने चंपत राय के बयान पर भी ऐतराज जताया,

“हम अपने भगवान श्रीराम के नाम पर, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के नाम पर चंदा चोरी नहीं होने देंगे. उनके चढ़ावे में चोरी नहीं होने देंगे. इसके खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे. जो पदाधिकारी महोदय ने स्टेटमेंट जारी किया है, चंपत राय जी, मैं उनसे सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि आप प्रभु श्री राम की प्रतिमा पर हाथ रखकर, सौगंध खाकर ये कह दीजिए कि चंदा चोरी नहीं हुआ है. आपकी बात लोग मान लेंगे.”

BJP का पलटवार

विपक्ष ने करोड़ों के गबन का आरोप लगाया है. दावा किया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और सुरक्षा से जुड़े कर्मी भी दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से कोई कुछ भी बोलने से कतरा रहा है. विपक्ष के आरोपों के बीच सत्ता पक्ष की ओर से जवाब आया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने तो अखिलेश यादव को ‘निर्लज्ज’ तक कह दिया. अजय आलोक बोले,

“अखिलेश यादव निर्लज्ज हैं. दान के पैसे को गायब करने का ख्याल भी उन्हीं को आ सकता है, बाकी किसी सनातनी को तो नहीं आएगा. आज तक तो गए नहीं अयोध्या मंदिर दर्शन करने के लिए. 200 से ज्यादा बार अयोध्या क्रॉस कर चुके होंगे, लेकिन रामलला की याद नहीं आई. रामलला के पैसे की चिंता हो रही है इनको. निर्लज्जता की पराकाष्ठा है ये.”

चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया?

इन आरोपों के बीच अब ये जानते हैं कि राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था क्या है? ट्रस्ट ने सभी मंदिरों के सामने और पूरे दर्शन मार्ग पर लगभग चार दर्जन दान पात्र रखवाए हैं. चढ़ावे की धनराशि को रोज इकट्ठा करके गिनती कराई जाती है. इसके लिए ट्रस्ट ने स्टेट बैंक आफ इंडिया को अधिकृत किया है. चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारी, ट्रस्ट के लोगों की मौजूदगी में करते हैं. यह काम सीसीटीवी की निगरानी में होता है.

दान की रकम को रजिस्टर पर चढ़ाया जाता है. फिर उसे राम मंदिर परिसर में ही बने लॉकर में रख दिया जाता है. इसके बाद अगले दिन रुपये बैंक में जमा कर दिए जाते हैं. ट्रस्ट का खाता अयोध्या धाम के भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में है.

चढ़ावे की आखिरी जानकारी कब आई?

चढ़ावे की रकम के ऑडिट का पूरा काम TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) की निगरानी में किया जाता है. राम मंदिर में चढ़ावा कितना आता है, इसकी जानकारी ट्रस्ट की बैठक में ही दी जाती है. आखिरी बार दिसंबर 2025 में चढ़ावे की जानकारी दी गई थी. 13 दिसंबर, 2025 को मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जानकारी सामने आई थी कि अब तक ट्रस्ट को कुल 4,575 करोड़ रुपये मिले हैं.

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