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जोहरान ममदानी ने उमर खालिद को भेजे लेटर में ऐसा क्या लिखा, जो वायरल हो गया?

New York शहर के मेयर Zohran Mamdani ने ये नोट दिसंबर 2025 में उमर खालिद के माता-पिता साहिबा खानम और सैयद कासिम रसूल इलियास को सौंपा था. अब ये सामने आया है.

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2023 में न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान, ममदानी ने उमर खालिद का एक लेटर पढ़ा था. (फोटो- X)

न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी ने दिल्ली की जेल में बंद उमर खालिद को एक हाथ से लिखा नोट भेजा है. जिसमें उन्होंने लिखा, ‘हम सब तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं’. ये नोट 1 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर तब वायरल हुआ, जब ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के 112वें मेयर के रूप में शपथ ली. वो शहर के पहले मुस्लिम और भारतीय मूल के मेयर बने हैं.

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ममदानी ने ये नोट दिसंबर 2025 में उमर खालिद के माता-पिता साहिबा खानम और सैयद कासिम रसूल इलियास को सौंपा था. वो एक शादी के मौके पर अमेरिका गए थे, जहां वो अपनी बेटी से मिले थे. इस दौरान उन्होंने ममदानी से मुलाकात की और काफी समय साथ बिताया. उमर खालिद की सहयोगी बनोज्योत्स्ना लाहिरी ने लेटर की तस्वीर X पर शेयर करते हुए बताया कि यहीं पर ममदानी ने ये संदेश लिखा. ममदानी ने अपने नोट में लिखा,

"प्रिय उमर, मैं तुम्हारे नफरत वाले शब्दों को अक्सर सोचता हूं, और ये कि किसी को भी नफरत को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए. तुम्हारे माता-पिता से मिलकर बहुत अच्छा लगा. हम सब तुम्हारे बारे में सोच रहे हैं.”

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ममदानी का लेटर.

उमर खालिद साल 2020 से UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) की धाराओं के तहत जेल में हैं. दिसंबर 2025 में उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत मिली थी. लाहिरी ने बताया कि जमानत की शर्तों के कारण वो पूरे समय घर पर ही रहे और परिवार के सदस्यों के साथ वक्त बिताया, फिर जेल वापस लौट गए.

2023 में न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान, ममदानी ने उमर खालिद का एक लेटर पढ़ा था. जिसमें उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर नफरत न अपनाने पर विचार व्यक्त किए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सांसद जेम्स पी मैकगवर्न ने अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को एक पत्र लिखकर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में आरोपित लोगों की लंबी अंडर-ट्रायल हिरासत (pre-trial detention) को लेकर गहरी चिंता जताई है. लेटर में मैकगवर्न ने खालिद का जिक्र करते हुए कहा कि कई मानवाधिकार संगठनों और कानूनी एक्सपर्ट्स ने इस जांच और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने लिखा कि अलग-अलग अधिकार संगठनों की जांच में खालिद को किसी आतंकी गतिविधि से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं मिला.

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मैकगवर्न ने पत्र में अंतरराष्ट्रीय नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार संधि (ICCPR) के तहत भारत के दायित्वों का भी हवाला दिया.

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