‘जब भी भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर खतरा आया. तब मॉस्को नई दिल्ली के साथ खड़ा रहा है.' ये बात भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कही है. यूरोपीय देशों की ओर से भारत-रूस के संबंधों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में रूस के साथ भारत की ‘दोस्ती’ पर जयशंकर की ये टिप्पणी काफी अहम है. विदेश मंत्री ने इतिहास के कई ऐसे मौके भी गिनवाए, जब रूस ने भारत का साथ दिया था.
रूस-भारत की दोस्ती पर एस जयशंकर ने वो बात कह दी, अमेरिका-यूरोप तिलमिला जाएंगे
भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar ने भारत-रूस संबंध पर टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि रूस ने भारत का उस समय साथ दिया था, जब दुनिया पाकिस्तान के समर्थन में थी.

विदेश मंत्री रविवार, 4 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंचे थे. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस के बीच ऐतिहासिक रूप से काफी अच्छे संबंध रहे हैं. दोनों देशों का वही अनुभव आज भी उनके रिश्तों को आकार दे रहा है. विदेश मंत्री ने कहा कि ‘लोग अच्छा या बुरा इतिहास नहीं भूलते हैं.’
रूस के समर्थन को किया यादजयशंकर ने रूस और सोवियत संघ से मिले सपोर्ट को भी याद किया. खासतौर पर वो समय, जब दुनिया का ज्यादातर हिस्सा पाकिस्तान के सैन्य शासन का समर्थन कर रहा था. जयशंकर का इशारा 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में मिले सोवियत समर्थन पर था. उस दशक में अमेरिका का पूरा समर्थन पाकिस्तान को मिल रहा था. वाशिंगटन ने इस्लामाबाद के समर्थन में बंगाल की खाड़ी में एक नौसैनिक बेड़ा तक उतार दिया था.
दरअसल, पश्चिमी देश लगातार भारत-रूस के संबंधों पर सवाल खड़े कर रहे हैं. इससे जुड़े सवालों पर विदेश मंत्री ने सीधा जवाब न देकर इशारों में कहा कि हर देश अपने अनुभव के आधार पर ही रिश्तों को परखता है. रूस से रिश्तों को लेकर भारत का अनुभव लगाातार सकारात्मक रहा है. जयशंकर ने भारत-रूस संबंध पर बात करते हुए आगे कहा,
‘दोनों देशों के बीच यह साझेदारी 1970 और 1980 के दशक में विकसित हुई. इसमें सैन्य और परमाणु सहयोग के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा और संसाधनों की भूमिका भी बढ़ रही है.
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जयशंकर की यह टिप्पणी पर ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और यूरोप भारत के रूस से तेल खरीदने की आलोचना कर रहे हैं. भारत के विदेश मंत्रालय ने इन आलोचनाओं को ‘अनुचित और बेबुनियाद’ बताया. मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने ही शुरू में वैश्विक बाजार में स्थिरता लाने के लिए भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए कहा था.
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