मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच एक और भयावह घटना सामने आई है. चुराचांदपुर जिले में मैतेई समुदाय के 38 वर्षीय शख्स का अज्ञात हथियारबंद लोगों ने अपहरण कर लिया और बाद में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना का एक भयावह वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर पीड़ित मौत से पहले अपनी जान की गुहार लगाते हुए दिखता है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
कुकी महिला से शादी करने वाले मैतई शख्स की बेरहमी से हत्या, गिड़गिड़ाने का वीडियो वायरल
वीडियो में देखा जा सकता है कि अंधेरे में एक कच्ची सड़क पर वह व्यक्ति बैठा है, हाथ जोड़कर कम से कम दो हथियारबंद लोगों से बार-बार अपनी जान बख्शने की गुहार लगा रहा है. उसकी अपील के बावजूद हमलावरों में से एक उसे बेहद नजदीक से गोली मार देता है, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो जाती है.


यह घटना चुराचांदपुर में हुई, जो लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा के प्रमुख केंद्रों में से एक रहा है. जिले के पुलिस अधीक्षक ने इंडिया टुडे को बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद ही अधिकारियों को इस अपराध की जानकारी मिली.
वीडियो में देखा जा सकता है कि अंधेरे में एक कच्ची सड़क पर वह व्यक्ति बैठा है, हाथ जोड़कर कम से कम दो हथियारबंद लोगों से बार-बार अपनी जान बख्शने की गुहार लगा रहा है. उसकी अपील के बावजूद हमलावरों में से एक उसे बेहद नजदीक से गोली मार देता है, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो जाती है.
पुलिस ने मृतक की पहचान मयांगलंबम ऋषिकांत के रूप में की है, जो काकचिंग जिले का रहने वाला था. मृतक की उम्र 38 साल थी. उनकी शादी चुराचांदपुर की एक कुकी महिला से हुई थी. उन्होंने एक आदिवासी नाम जिनमिनथांग भी अपना लिया था. अधिकारियों के मुताबिक, वह नेपाल में नौकरी करता था और छुट्टी लेकर कुछ समय के लिए चुराचांदपुर लौटा था. रात करीब 10.30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि ऋषिकांत का उसी शाम अज्ञात बदमाशों ने अपहरण कर लिया गया था. बाद में उन्हें गोली मार दी गई.
मैतेई संगठनों का दावा है कि ऋषिकांत का अपहरण उनकी पत्नी के साथ किया गया था. उनका यह भी कहना है कि ऋषिकांत की पत्नी ने अपने पति के चुराचांदपुर आने से पहले कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और तुइबूंग इलाके के स्थानीय अधिकारियों से अनुमति ली थी, क्योंकि वह नेपाल में काम करते थे और छुट्टी पर घर आए थे.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस अपहरण और हत्या के पीछे यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (यूएनकेए) के सदस्यों का हाथ होने का संदेह है. यह एक उग्रवादी संगठन है, जो मणिपुर सरकार और कई कुकी-जो सशस्त्र समूहों के बीच हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते का हिस्सा नहीं है.
हालांकि, KNO ने ऐसी कोई भी परमिशन देने से इनकार किया है.
सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के तहत कुकी विद्रोही समूहों की एक अम्ब्रेला बॉडी, KNO ने आज सुबह एक बयान में कहा,
“यह साफ किया जाता है कि न तो संगठन को मयांगलंबम के दौरे की कोई जानकारी थी और न ही वह इस घटना में शामिल था. संगठन साफ करता है कि किसी भी हालत में हमारे लोगों के किसी भी दूसरे समुदाय के जीवनसाथी को ऐसी किसी भी गतिविधि का सामना नहीं करना पड़ता है.”
मई 2023 से हिंसा शुरू होने के बाद से मैतेई और कुकी समुदाय के लोग आमतौर पर एक-दूसरे के इलाकों में जाने से बचते रहे हैं, जिससे मणिपुर जातीय आधार पर अंदर तक बंट गया है. इस लंबे संघर्ष में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं.
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