महाराष्ट्र की एक अदालत ने कलेक्टर की चल संपत्ति अटैच करने का वारंट जारी किया है. इसके मुताबिक आदेश न मानने पर कलेक्टर की गाड़ी और फर्नीचर भी कुर्क किया जा सकता है. सिविल कोर्ट ने अदालत का आदेश न मानने पर अब सख्ती जताई है. साथ ही स्पष्ट कहा है कि बिना देरी के इस पर कार्रवाई की जाए.
सरकार ने किसान को पैसे देने में देरी की, तो अदालत ने कलेक्टर की गाड़ी और फर्नीचर कुर्क करने का दिया आदेश
Sambhajinagar Civil Court order: सिविल कोर्ट ने आदेश दिया है कि वारंट का पालन सुनिश्चित किया जाए. साथ ही स्पष्ट कहा गया है कि जब तक हाई कोर्ट या किसी अन्य उच्च न्यायालय से नहीं कहा जाता, बिना देरी के कुर्की की कार्रवाई की जाए.


आजतक से जुड़े इसरार चिश्ती की रिपोर्ट के अनुसार पूरा मामला 2006 के भूमि अधिग्रहण के एक सिविल केस से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि जिला प्रशासन ने किसानों को सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित ज़मीन के लिए अतिरिक्त मुआवज़ा देने में देरी की. इस मामले में औरंगाबाद की सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन) ने बजरंग हरिचंद टाटू नाम के शख्स के पक्ष में फैसला सुनाया था.
‘वारंट ऑफ अटैचमेंट’ जारी कियाकोर्ट के आदेश के मुताबिक शख्स को शासन की ओर से 2 करोड़, 22 लाख 61 हजार 19 रुपये दिए जाने थे. हालांकि तीन साल बीत जाने के बाद भी शख्स को पैसे नहीं दिए गए. इसके बाद अदालत ने अब सख्त रुख अपनाया है. सिविल कोर्ट ने अब इस मामले में ‘वारंट ऑफ अटैचमेंट’ जारी किया है. इसका मतलब अगर सरकार हरिचंद को तुरंत पैसा नहीं देती है तो सरकार की चल संपत्ति कुर्क की जा सकती है. इसके तहत छत्रपति संभाजीनगर कलेक्टर के ऑफिस की गाड़ियां और ऑफिस के फर्नीचर तक अटैच किए जा सकते हैं.

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सिविल कोर्ट ने आदेश दिया है कि वारंट का पालन सुनिश्चित किया जाए. साथ ही स्पष्ट कहा गया है कि जब तक हाई कोर्ट या किसी अन्य उच्च न्यायालय से नहीं कहा जाता, बिना देरी के कुर्की की कार्रवाई की जाए. वहीं पूरे मामले पर लघु सिंचाई विभाग ने लिखित में आश्वासन दिया है कि आठ हफ्ते के अंदर किसानों को उसका बढ़ा हुआ मुआवजा मिल जाएगा. विभाग के एक इंजीनियर ने कोर्ट से अपील भी की है कि इस अवधि के दौरान सरकारी संपत्तियों के जब्ती पर रोक लगा दी जाए.
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