सोशल मीडिया पर टोल प्लाज़ा के शुल्क नियमों को लेकर बहस छिड़ी हुई है. एक वायरल वीडियो में दो लोग अपने-अपने तर्क देते हुए खुद को सही साबित करने में लगे हुए हैं. एक तरफ गाड़ी में सवार शख्स खुद को आर्मी अफसर बताते हुए नियमों के तहत छूट मांगता है. दूसरी तरफ टोलकर्मी बात काटते हुए कहते हैं कि आर्मी वाले को छूट सिर्फ ऑन ड्यूटी दी जा सकती है, ऑफ ड्यूटी नहीं. फिर इस बात पर बहस शुरू हो जाती है. क्या है पूरा मामला?
'मुझे टोल देने से छूट', सेनाधिकारी के दावे पर अड़ गए टोलकर्मी, नियमों के हिसाब से कौन सही?
Toll Plaza Row: मध्य प्रदेश में टोल के शुल्क नियमों को लेकर सेना के जवान और टोलकर्मी के बीच बहस छिड़ गई. इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसके बाद NHAI को भी पोस्ट कर नियमों पर रौशनी डालनी पड़ी. इस टोल पर कार का सिंगल जर्नी का रेट 95 रुपये का है, जिसपर बहस छिड़ी हुई है.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो मध्य प्रदेश के गढ़ा टोल प्लाजा का है जो बैतूल जिले में नेशनल हाईवे 47 (NH-47) पर पड़ता है. ये हाईवे मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र दोनों से बॉर्डर शेयर करता है.
वायरल वीडियो में गाड़ी सवार शख्स आईडी दिखाते हुए नियमों के तहत छूट मांगता है. जवाब में टोलकर्मी अपना तर्क रखता है. फिर कथित आर्मी अफसर बताता है कि वो ड्यूटी पर जा रहा है और छुट्टी पीरियड को भी ऑन ड्यूटी ही माना जाता है. इसका जवाब देते हुए टोलकर्मी कहते हैं कि इसके लिए मूवमेंट लेटर दिया जाता है. आर्मी अफसर के साथ गाड़ी में एक महिला हैं. वो भी टोलकर्मी से बहस करती हुई नज़र आ रही है.
इस वायरल वीडियो पर NHAI RO (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया रीजनल ऑफिस) भोपाल की प्रतिक्रिया भी आई. X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा,
“NHAI ये साफ़ करना चाहता है कि नेशनल हाईवे पर टोल में छूट और डिस्काउंट, National Highways Fee Rules, 2008 के हिसाब से हैं. नियमों के मुताबिक, सेना में काम करने वाले लोगों को छूट तभी मिलेगी जब गाड़ी का इस्तेमाल ऑफिशियल कामों के लिए किया जाएगा. NH यूजर्स को इन बताए गए नियमों का पालन करना होगा.

बता दें कि इस टोल पर कार का सिंगल जर्नी का रेट 95 रुपये का है, जिसके लिए ये पूरी बहस छिड़ी हुई है. बहस तो हो गई, अब जानते हैं कि नियम क्या कहता है.
NHAI के नियम क्या हैं?जिस नियम का जिक्र NHAI की ओर से किया जा रहा है, उसके मुताबिक 25 तरह के लोगों को ले जाने या उनके साथ जाने वाली गाड़ी से कोई टोल नहीं लिया जा सकता है. इनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और जज, सांसद, राज्य के विधानसभा सदस्य, सरकार के सचिव, परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र विजेता शामिल हैं.
साथ ही रक्षा मंत्रालय की गाड़ियां, सशस्त्र बलों, Executive Magistrate, NHAI या किसी सरकारी काम में लगी गाड़ियों को भी टोल टैक्स में छूट है. इसके अलावा एंबुलेंस, फ्यूनरल वैन और मैकेनिकल गाड़ियों के तौर पर इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों को भी छूट दी गई है.
आर्मी के नियम क्या कहते हैं?NHAI के नियमों के बाद अब भारतीय सेना के नियम भी जान लेते है. The Indian Tolls (Army and Air Force) Act, 1901 के मुताबिक अगर कोई सैनिक ड्यूटी पर है और सरकारी आर्मी व्हीकल में सफर कर रहा है, तो उसे टोल टैक्स नहीं देना पड़ता.
ऐसे मामलों में सैनिकों को टोल प्लाजा पर अपना आईडी कार्ड और ड्यूटी से रिलेटेड डॉक्यूमेंट दिखाने पड़ते हैं. ये डॉक्यूमेंट सैनिक ड्यूटी ऑर्डर या ट्रांजिट पास, आर्मी ID और यूनिट का authorized letter हो सकता है. अगर ये दस्तावेज मौजूद हैं और सफर सरकारी काम से हो रहा है, तो टोल नहीं लिया जाता.
लेकिन अगर कोई सैनिक अपनी पर्सनल कार या बाइक से सफर कर रहा है और वह ड्यूटी पर नहीं है, तो उसे आम नागरिकों की तरह टोल टैक्स देना होता है. उस समय उसे सिर्फ अपना आईडी कार्ड दिखाने से छूट नहीं मिलती. ये नियम National Highways Fee Rules, 2008 में साफ तौर पर बताया गया है.
नियमों के मुताबिक रिटायर्ड सैनिकों को टोल टैक्स में कोई छूट नहीं दी जाती.
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