कर्नाटक में इन दिनों चुनाव आयोग वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कर रहा है. इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्यभर में घर-घर जाकर स्थाई निवास प्रमाण पत्र (PRC) और जाति प्रमाण पत्र बांटने का अभियान शुरू कर दिया है. BJP और JD(S) का आरोप है कि ये पूरी कवायद कांग्रेस के कथित अवैध वोट बैंक को बचाने के लिए की जा रही है.
कर्नाटक में CM शिवकुमार ने SIR के दौरान सर्टिफिकेट दिए, BJP ने 'घुसपैठिया वोट बैंक' बताया
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया चल रही है. 21 जुलाई को डीके शिवकुमार ने इस डोर-टू-डोर अभियान की शुरुआत की. लेकिन अब भाजपा ने इसी अभियान पर निशाना साधा है. कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस के पास राज्य में घुसपैठियों का वोट बैंक है.


इंडिया टुडे के पत्रकार अविनाश कटील की रिपोर्ट के मुताबिक़, 21 जुलाई को डीके शिवकुमार ने इस डोर-टू-डोर अभियान की शुरुआत की. उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक अभियान बताया. इसकी अहमियत इसलिए भी है क्योंकि SIR के दौरान पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेज़ों की जांच की जा रही है. PRC भी उन्हीं दस्तावेज़ों में शामिल है, बशर्ते वह सक्षम प्राधिकारी की ओर से क़ानूनी तरीके से जारी किया गया हो.
CM शिवकुमार पर विपक्ष ने निशाना साधाइसी अभियान को लेकर BJP ने सरकार पर हमला बोला. कर्नाटक विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलावडी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया,
‘कांग्रेस के पास राज्य में घुसपैठियों का वोट बैंक है. डीके शिवकुमार की सरकार उसी वजह से स्थाई निवास प्रमाण पत्र जारी कर रही है. कांग्रेस के ऐसे वोटर अपना नाम साबित नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए सरकार उनकी मदद कर रही है.’
नारायणस्वामी ने इस अभियान को असंवैधानिक बताते हुए दावा किया कि राज्य सरकार के पास सिर्फ़ मूल निवासी प्रमाण पत्र (डोमिसाइल सर्टिफिकेट) जारी करने का अधिकार है, स्थाई निवास प्रमाण पत्र देने का नहीं.
हालांकि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा,
‘ये जनता की सरकार है. आपका वोट, आपका अधिकार. आपका वोट, आपकी ज़िंदगी. हमारी सरकार इसकी गारंटी देती है.’
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अब तक कितने सर्टिफिकेट जारी किए?मुख्यमंत्री ने बताया कि 4.85 करोड़ डिजिटल कास्ट सर्टिफिकेट प्रिंटिंग के लिए भेजे जा चुके हैं. एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है, जिसमें आधार, मोबाइल नंबर और लाभार्थी रसीद दर्ज होंगे. उनके मुताबिक़, लोग आरडी नंबर, राशन कार्ड नंबर या आधार नंबर के ज़रिए पोर्टल से सर्टिफिकेट मुफ़्त डाउनलोड कर सकेंगे. अब तक करीब 57 लाख जाति प्रमाण पत्र मोबाइल नंबर्स से लिंक किए जा चुके हैं.
उधर, कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने भी इस अभियान को संवैधानिक सीमा पार करने वाला ख़तरनाक कदम बताया. उन्होंने पूछा कि राज्य सरकार को स्थाई निवास प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार संविधान के किस प्रावधान से मिला है. BJP ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार पीछे नहीं हटती है तो इस फैसले को राजनीतिक, कानूनी और संवैधानिक, तीनों स्तरों पर चुनौती दी जाएगी.
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