The Lallantop

Waqf Amendment Bill को जेपीसी की भी मंजूरी, ये संशोधन सामने आए

समिति की बैठक में संशोधन के पक्ष में 16 सांसदों ने वोट किया जबकि विरोध में 10 सांसदों ने वोट किया. वक्फ विधेयक को लेकर पिछले 6 महीने में तीन दर्जन से अधिक बैठकें हुई हैं. इनमें विधेयक को लेकर कुछ प्रमुख बदलाव हुए हैं.

Advertisement
post-main-image
संसदीय समिति ने NDA सांसदों के संंशोधन को स्वीकार कर लिया, विपक्ष के सांसदों ने जताई नाराजगी. (तस्वीर:इंडिया टुडे)

वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने मंजूरी दे दी है. विधेयक में 44 संशोधनों को लेकर चर्चा हुई थी. चर्चा के बाद वोटिंग हुई जिसके आधार पर NDA के सुझाए 14 संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया है. वहीं, विपक्षी सांसदों ने जिन संशोधनों को सुझाया था उन्हें खारिज कर दिया गया है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
वक्फ संशोधन विधेयक में बदलाव

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति की बैठक में संशोधन के पक्ष में 16 सांसदों ने वोट किया जबकि विरोध में 10 सांसदों ने वोट किया. वक्फ विधेयक को लेकर पिछले 6 महीने में तीन दर्जन से अधिक बैठकें हुई हैं. इनमें विधेयक को लेकर कुछ प्रमुख बदलाव हुए हैं. 

वक्फ काउंसिल/बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या
अब कमेटी में दो सदस्य हिंदू या किसी अन्य धर्म से हो सकते हैं. साथ ही इसमें राज्य सरकार का एक और अधिकारी शामिल किया जाएगा. वक्फ के चेयरपर्सन को गैर-मुस्लिम सदस्यों की गिनती से बाहर रखा जाएगा. 

Advertisement

इस्लाम की प्रैक्टिस
सांसद तेजस्वी सूर्या ने इस संशोधन को पेश किया जिसके तहत कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति वक्फ को तभी दे सकता है जब उसने पांच साल तक इस्लाम की प्रैक्टिस की हो और संपत्ति से संबंधित कोई धोखाधड़ी नहीं की हो.

वक्फ ट्रिब्यूनल में बढ़ेगी सदस्यों की संख्या
अब वक्फ ट्रिब्यूनल में दो की जगह तीन सदस्य होंगे. तीसरा शख्स इस्लामिक स्कॉलर होगा. पहले ट्रिब्यूनल में केवल दो सदस्यों का प्रावधान था.

पहले से रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी पर लागू नहीं
अगर कोई संपत्ति पहले से ही रजिस्टर है तो संशोधित वक्फ कानून उस पर लागू नहीं होगा. हालांकि, इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि एक अनुमान के मुताबिक, 90 प्रतिशत वक्फ संपत्तियां वास्तव में पंजीकृत नहीं हैं.

Advertisement

इसके अलावा वक्फ की शक्तियां कलेक्टर से हटाकर अब ऐसे अधिकारी के हाथों में होंगी जिसे राज्य सरकार ने नियुक्त किया हो. पहले के प्रावधान में कलेक्टर वक्फ संपत्ति का सर्वेक्षण करने के लिए अधिकृत होता था. लेकिन अब राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई भी अधिकारी वक्फ संपत्ति की देखरेख और निगरानी करेगा.

जेपीसी का मसौदा 28 जनवरी को सर्कुलेट किया जाएगा जबकि 29 जनवरी को इसे आधिकारिक तौर पर अडॉप्ट किया जाएगा.

यह भी पढ़ें:वक्फ आखिर है क्या? शुरुआत कैसे हुई? और वक्फ बोर्ड एक्ट में बदलाव पर बवाल क्यों मचा है?

विपक्ष के सांसदों ने किया विरोध

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि JPC में उन्हें बोलने तक का मौका नहीं दिया गया. उन्होंने कहा,

“आज जो हुआ, वो पहले से तय था. हमें बोलने तक का समय नहीं दिया गया. किसी तरह के नियम का पालन नहीं किया गया.”

इसके अलावा सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि संसदीय तरीके का पालन नहीं किया गया. उन्होंने कहा,

“यह देश के अल्पसंख्यकों के साथ एक मज़ाक है. वक्फ बोर्ड के प्रावधान को जिस तरह से लागू किया जा रहा है उससे देश के संविधान को बुलडोजर से कुचल दिया गया है. इससे यह साफ पता लग रहा कि जिस विधेयक को लाया गया वो केवल मजाक है.”

वक्फ संशोधन विधेयक पर JPC बजट सत्र के दौरान अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. बजट सत्र एक फरवरी से शुरू हो रहा है.

वीडियो: JPC की बैठक में भिड़े सांसद, कल्याण बनर्जी के हाथ में 4 टांके क्यों लगाने पड़े?

Advertisement