The Lallantop

सिलेबस में जिन्ना 'अल्पसंख्यकों के नेता', जम्मू यूनिवर्सिटी में बवाल मच गया

जम्मू यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में पाकिस्तान (Pakistan) के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना (Muhammad Ali Jinnah) से जुड़े एक चैप्टर को लेकर विवाद हो गया.

Advertisement
post-main-image
जम्मू यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल डिपार्टमेंट में जिन्ना के नाम पर चैप्टर होने से बवाल. (फोटो- इंडिया टुडे/ सोशल मीडिया)

जम्मू यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना को लेकर विवाद छिड़ गया है. यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को अल्पसंख्यकों का नेता बताए जाने पर आपत्ति जताई गई है. इसे लेकर कैंपस में विरोध प्रदर्शन भी हुए. आपत्ति जताने वालों का कहना है कि अल्पसंख्यकों के नेता के तौर पर सिलेबस में बीआर अंबेडकर और खान अब्दुल गफ्फार खान जैसी शख्सियतों को पढ़ाया जाना चाहिए, जिन्होंने सच में अल्पसंख्यकों के लिए काम किया था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने एक जांच कमेटी का गठन किया है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के एमए पॉलिटिकल साइंस के विवादित चैप्टर को लेकर शुक्रवार, 20 मार्च को ABVP जम्मू-कश्मीर के स्टेट सेक्रेटरी सन्नक श्रीवत्स ने प्रदर्शन किया था. श्रीवास्तव ने कहा कि इससे पहले भी जिन्ना को किताब के एक चैप्टर में ‘भारत विभाजन’ के पीछे की सोच बताया गया था. अब पीजी के पॉलिटिकल साइंस के रिवाइज्ड सिलेबस में फिर जिन्ना का नाम है. इसमें ‘अल्पसंख्यक और राष्ट्र’ विषय से जुड़े एक चैप्टर में उन्हें शामिल किया गया है. 

श्रीवत्स का आरोप है कि इस चैप्टर में जिन्ना को भारत के ‘अल्पसंख्यकों के नेता’ के तौर पर दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि चैप्टर में जिन्ना का नाम होने से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन अगर अल्पसंख्यकों के नेताओं पर कोई चैप्टर होना ही चाहिए तो सिलेबस में BR अंबेडकर या 'सीमांत गांधी' अब्दुल गफ्फार खान को शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने सचमुच उनके (अल्पसंख्यकों) लिए काम किया था.

Advertisement

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर उमेश राय ने मामले का संज्ञान लिया है. उन्होंने फिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर नरेश पाधा की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी छात्रों की ओर से उठाई गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए "विवादित पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस" की जांच करेगी.

हालांकि, पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के प्रमुख बलजीत सिंह मान ने विवादित सिलेबस का बचाव किया. उन्होंने कहा कि जिन्ना सहित अन्य विचारकों का नाम सिलेबस में शामिल करना एकेडमिक मामला है. यह सिलेबस University Grants Commission (UGC) के नियमों के मुताबिक ही है. मान ने इस पूरे मामले को 'बेवजह का विवाद' बताया. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी किसी भी विचारधारा को बढ़ावा नहीं देती. बल्कि, सभी दृष्टिकोणों को छात्रों के सामने रखती है. ताकि छात्र अपने विवेक से इनका आलोचनात्मक मूल्यांकन कर सकें.

बता दें कि यह पहली दफा नहीं है, जब जम्मू यूनिवर्सिटी का पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट का नाम विवादों से जुड़ा हो. इससे पहले साल 2018 में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक प्रोफेसर ने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह को ‘आतंकवादी’ बताया था.

Advertisement

यह भी पढ़ें: '48 घंटे में होर्मुज खोल दो वरना...', ट्रंप की खुली धमकी, ईरान ने भी पलटकर जवाब दे दिया

हालांकि, संबंधित प्रोफेसर के सस्पेंड कर जांच की गई. बाद में प्रोफेसर ने सफाई दी कि पढ़ाने के दौरान वो ब्रिटिश नजरिए से भगत सिंह के बारे में छात्रों को बता रहे थे.

वीडियो: मथुरा में फरसा बाबा की मौत के बाद बवाल, सीएम योगी ने क्या आदेश दिया?

Advertisement