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Strait of Hormuz बंद होने पर तेल की ज़रूरत कैसे पूरी करेगा भारत? कुछ ऐसी है तैयारी

Strait of Hormuz के बंद होने से क्या भारत के लिए भी ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा? इसका जवाब भारत के पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने दे दिया है. भारत का ज्यादातर कच्चा तेल अरब देशों से ही आता है.

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भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 फीसदी तेल दूसरे देशों से मंगाता है (फोटो: आजतक)

इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज की खाड़ी को बंद करने का फैसला लिया (Iran-Israel War). ईरान के इस कदम ने उन देशों को टेंशन में डाल दिया. जो अरब देशों से कच्चा तेल खरीदते हैं. भारत का भी ज्यादातर कच्चा तेल अरब देशों से ही आता है. ऐसे में सवाल ये है कि क्या भारत के लिए भी ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा? इसका जवाब भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने दिया है.

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भारत के पास कई हफ्तों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कई रास्तों से सप्लाई लेना जारी है. ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा,

हमने पिछले कुछ सालों में अपनी तेल आपूर्ति में विविधता ला दी है और अब हमारा ज्यादातर तेल होर्मुज की खाड़ी के रास्ते से नहीं आता है.

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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि हमारी कंपनियों को कई दूसरे रास्तों से सप्लाई हो रही है. उन्होंने कहा कि भारत में रोजाना खपत होने वाले 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल में से 1.5-2 मिलियन बैरल तेल होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है. बाकी दूसरे रास्तों से तकरीबन 4 मिलियन बैरल तेल आता है. हरदीप पुरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक है. ज्यादातर कंपनियां तो ऐसी है, जिनके पास करीब तीन हफ्ते का स्टॉक है.

भारत के लिए ‘होर्मुज स्ट्रेट’ का विकल्प

होर्मुज स्ट्रेट ईरान, UAE और ओमान के बीच मौजूद है और इसे तेल का सबसे बड़ा चेक पॉइंट कहा जाता है. ऐसे में अगर ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष की स्थिति बनी रहती है तो आशंका है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो. भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 फीसदी तेल दूसरे देशों से मंगाता है. जिसमें से 40 प्रतिशत से अधिक आयात मिडिल ईस्ट के देशों से होता है. ये तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है और भारत आता है.

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होर्मुज स्ट्रेट (फोटो: इंडिया टुडे)

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़े तेल आयातक और चौथा सबसे बड़ा गैस खरीदार है. इस 80 प्रतिशत तेल को मंगाने के लिए भारत ने 2024 में 132 अरब डॉलर खर्च किए. भारत की ये रणनीति बहुत पहले से ही रही है कि तेल और गैस के आयात में विविधता रहे. माने भारत एक नहीं, बल्कि कई देशों से तेल खरीदे. यही वजह है कि इस साल जून में भारत ने रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाया है. ग्लोबल ट्रेड एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आकंड़ों के मुताबिक, जून महीने में भारत ने रूस से रोजाना 2 से 2.2 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात किया. जो पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा है और इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत से खरीदी गई कुल मात्रा से भी ज्यादा है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, मई में रूस से भारत का तेल आयात 1.96 मिलियन बैरल प्रति दिन (BPD) था. जून में अमेरिका से आयात भी बढ़कर करीब 4 लाख BPD हो गया, जो पिछले महीने के 2 लाख 80 हजार BPD से बहुत ज्यादा है. वहीं, मिडिल ईस्ट से भारत ने तेल खरीदना कम कर दिया है. केप्लर की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट से इस पूरे महीने करीब 2 मिलियन BPD के हिसाब से तेल खरीदा गया, जो पिछले महीने की खरीद से कम है. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में भारत ने किस देश से कितना कच्चा तेल मंगाया? इस ग्राफ से समझिए

टॉप सप्लायरभारत को तेल निर्यात करने वाले देशमूल्य
1रूस 45.4 बिलियन डॉलर
2इराक28.5 बिलियन डॉलर
3सऊदी अरब23.5 बिलियन डॉलर
4UAE 8.6  बिलियन डॉलर
5अमेरिका6.9  बिलियन डॉलर

इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने कहा है कि हॉर्मुज स्ट्रेट बंद करना ईरान की सबसे बड़ी गलती होगी. ईरान ने ऐसा किया तो ये उसके लिए आर्थिक आत्महत्या होगी. उन्होंने कहा कि हमारे पास इससे निपटने के लिए विकल्प मौजूद है. वहीं, भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह का कहना है कि पिछले 50 सालों में हॉर्मुज स्ट्रेट कभी बंद नहीं हुआ है. कई देश नहीं चाहता कि ये रास्ता बंद हो.

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