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इंफोसिस ने इंजीनियर्स की भर्ती की, ढाई साल बाद नौकरी दी, 4 महीने बाद निकाल दिया

Infosys Layoffs: IT कंपनी इंफोसिस अपने मैसूर कैंपस से करीब 700 ट्रेनी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने जा रही है. जब ये बात इन कर्मचारियों को बताई गई तो कई सुनकर बेहोश हो गए. जब इस पर बवाल हुआ तो इंफोसिस का भी बयान आया, कंपनी ने ये संख्या 350 के आसपास बताई और नौकरी से निकालने की वजह भी बताई.

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Infosys अपने मैसूर कैंपस से करीब 700 ट्रेनी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने जा रही है. (तस्वीर-इंडिया टुडे)

इंडियन IT कंपनी Infosys अपने मैसूर कैंपस से करीब 700 ट्रेनी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने जा रही है. यह जानकारी नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (NITES) के माध्यम से सामने आई है. इन ट्रेनी कर्मचारियों को ढाई साल के लंबे इंतजार के बाद अक्टूबर 2024 में शामिल किया गया था. मामले में Infosys का भी बयान सामने आया है.

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इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक NITES के वकील और अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने बताया कि Infosys ने लगभग 700 कैंपस रिक्रूट को जबरन नौकरी से निकालना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि NITES इस मामले की शिकायत भारत सरकार के श्रम मंत्रालय में दर्ज करा रहा है. वहीं Infosys के कई कर्मचारियों ने बताया कि शुक्रवार, 7 फरवरी को लगभग 400 ट्रेनियों के एक बैच को बुलाया गया. इसके बाद उन्हें अल्टीमेटम लेटर दे दिया गया.

Infosys ने जारी किया बयान

मामले पर Infosys की ओर से बयान जारी किया गया है. कंपनी ने कहा कि कर्मचारियों की छंटनी की वास्तविक संख्या 350 से कम है. Infosys ने बताया कि उनकी एक सख्त भर्ती प्रक्रिया है. इसके तहत सभी फ्रेशर्स को मैसूर कैंपस में व्यापक प्रशिक्षण दिया जाता है. इसके बाद उन्हें इंटरनल असेसमेंट टेस्ट पास करना होता है. टेस्ट पास करने के लिए तीन मौके दिए जाते हैं. और तीनों बार फेल होने पर उन्हें निकाल दिया जाता है. Infosys ने कहा कि यह प्रक्रिया कई सालों से चली आ रही है.

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कंपनी ने आगे कहा कि इन निकाले गए कर्मचारियों में से अधिकतर 2022 के इंजीनियरिंग बैच से हैं. ये सभी बेंगलुरु के मैसूर कैंपस में प्रशिक्षण ले रहे थे. वहीं NITES का कहना है कि इन्हें ढाई साल के इंतजार के बाद अगस्त 2024 में कंपनी में शामिल किया गया था. इस बैच के लगभग 2,000 से अधिक कर्मचारियों को ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया में देरी का सामना करना पड़ा. क्योंकि Infosys ने सिस्टम इंजीनियर (SE) और डिजिटल SE पदों के लिए ऑफर लेटर जारी किए थे. इन कर्मचारियों का सालाना वेतन 3.2 लाख रुपये से 3.7 लाख रुपये तक था.

वहीं Infosys से निकाले गए ट्रेनी कर्मचारियों ने मनी कंट्रोल से बातचीत में बताया कि उनके साथ अन्याय हुआ है. उन्होंने कहा कि कंपनी ने टेस्ट को बहुत कठिन बना दिया था. उन्हें फेल होने के लिए मजबूर किया गया. ट्रेनियों ने आगे कहा कि कंपनी से निकाले जाने की खबर सुनकर कई कर्मचारी बेहोश हो गए. क्योंकि उन्हें अपना भविष्य अब अंधकारमय नजर आ रहा है.

NITES ने दावा किया कि Infosys ने कर्मचारियों को डराने के लिए बाउंसर और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया है. ताकि वे मोबाइल फोन अंदर न ले जा सकें. इस घटना का कोई दस्तावेजीकरण न कर सकें. इसके साथ ही ट्रेनी कर्मचारियों को 7 फरवरी की शाम 6 बजे तक कैंपस खाली करने का आदेश दिया गया है.

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