भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील पर रूस ने चिंता जाहिर कर दी है. रूस ने कहा है कि डील से भारत-रूस के पुराने और मजबूत रिश्तों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए. ये बयान रूस के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर सर्गेई रयाबकोव ने भारत में दिया है. उन्होंने अमेरिका के एकतरफा रवैये की आलोचना भी की है.
रूस को चिंता, अमेरिका के साथ डील भारत-रूस रिश्तों को नुकसान न पहुंचाए!
भारत-रूस रिश्तों की बात करते हुए रूस के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच इतिहास बहुत गहरा है. कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं. रूस भारत के साथ जितना आगे जाना चाहे, जा सकता है.


सर्गेई रयाबकोव नई दिल्ली में BRICS शेरपा मीटिंग के लिए आए हुए थे. इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में रयाबकोव ने कहा,
“मैं उम्मीद करता हूं कि इस डील से भारत-रूस के रिश्ते खराब न हों या हमारे बीच कोई दिक्कत न आए. भारत और रूस के बीच व्यापार पहले से ही काफी अच्छा चल रहा है, लेकिन इसमें अभी भी बहुत ज्यादा गुंजाइश है. मुझे पूरा यकीन है कि भारत के पास सबके लिए जगह है और हर किसी के साथ अच्छे संबंध बनाने की ताकत है. सबसे बड़ी समस्या अमेरिका की मौजूदा नीति में ये है कि वो सब कुछ खुद के लिए चाहते हैं, दूसरों के लिए कुछ भी नहीं छोड़ना चाहते. ये एकतरफा रवैया सबसे खराब तरीका है.”
टैरिफ को लेकर सवाल पर रयाबकोव ने कहा,
“टैरिफ और तरह-तरह की जबरदस्ती वाली नीतियां बिल्कुल गलत है, इनसे एक देश दुनिया पर हावी होने की कोशिश करता है. मैं बहुत सीधे बात करता हूं, क्योंकि जो कुछ हो रहा है उसे समझने का कोई और तरीका नहीं है. दूसरे देश, जो बहुपक्षीयता (मल्टीलेटरलिज्म) में विश्वास रखते हैं, मानते हैं कि सहयोग और सबके फायदे से ही तरक्की होती है. इससे हम मिलकर समस्याएं सुलझाते हैं और चुनौतियों का सामना करते हैं.”
रयाबकोव ने आगे बताया कि इसी वजह से हमें आत्मनिर्भर होना होगा. पुराने सिस्टम के विकल्प बनाने होंगे. उन्होंने कहा,
“राष्ट्रपति पुतिन ने कई बार कहा है कि अगर रूस को डॉलर इस्तेमाल करने से नहीं रोका जाता, तो हम आज भी डॉलर के साथ ही होते. लेकिन जब ऐसा नहीं होने दिया जा रहा, तो हमें इसका विकल्प खोजना होगा. हमें अपने हित के हिसाब से काम करना चाहिए.”
डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि किसी भी देश को BRICS से डरने की जरूरत नहीं है. न ही ब्रिक्स को तोड़ने की कोशिश करनी चाहिए.
इससे पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि भारत अपनी ऊर्जा (एनर्जी) जरूरतों को राष्ट्रीय हित के आधार पर पूरा करेगा. यानी सस्ता, भरोसेमंद और पर्याप्त तेल कहां से आएगा, ये भारत खुद तय करेगा.
यूक्रेन युद्ध पर भी सफाई दीरयाबकोव ने कहा कि BRICS कभी पश्चिम-विरोधी नहीं रहा. ये सिर्फ बहुपक्षीय सहयोग का मंच है. अमेरिका BRICS को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसमें सफल नहीं होगा. BRICS देश अपनी मुद्राओं में व्यापार बढ़ाना चाहते हैं ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो. रूस ने कहा कि अगर डॉलर का इस्तेमाल नहीं करने दिया जाता, तो वैकल्पिक रास्ते ढूंढने पड़ते हैं.
उन्होंने यूक्रेन युद्ध पर भी सफाई दी. रयाबकोव ने कहा कि रूस इसे 'स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन' कहता है, जिसका मकसद रूसी और रूसी-भाषी लोगों की सुरक्षा है. अमेरिका इसे युद्ध कहकर रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर दबाव डालता है, जो गलत है. रयाबकोव ने उम्मीद जताई कि भारत जैसे समझदार देश इसे समझेंगे.
भारत-रूस रिश्तों की बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इतिहास बहुत गहरा है. कई बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं. रूस भारत के साथ जितना आगे जाना चाहे, जा सकता है. इस साल BRICS समिट में नेता फिर मिलेंगे, तो और मजबूती आएगी.
रयाबकोव ने भारत की BRICS अध्यक्षता की तारीफ की. कहा कि भारत बहुत अच्छा काम करेगा. भारत की कूटनीति, प्रोफेशनलिज्म और बैलेंस बनाने की क्षमता दुनियाभर में सराही जाती है. BRICS को और व्यावहारिक बनाना है ताकि लोग जानें कि ये क्या कर सकता है.
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