भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपियन यूनियन (EU) के लीडर्स मुख्य अतिथि हैं. लिहाजा 25 से 27 जनवरी तक यूरोप के नेता भारत में होंगे. इस दौरान भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एक बड़ी ट्रेड डील होने की संभावना है. इस संभावित डील से पहले यूरोपियन यूनियन की वाइस प्रेसिडेंट, विदेश नीति प्रमुख और एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री काजा कल्लास ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि भारत-EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एक बहुत ही रणनीतिक कदम साबित होगा. साथ ही इससे चीन और रूस पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए EU, रूस से कहीं अधिक भरोसेमंद पार्टनर होगा.
'भारत से बड़ी ट्रेड डील होगी, फिर चीन, रूस, अमेरिका की जरूरत कम पड़ेगी', यूरोपीय संघ का बड़ा बयान
यूरोपीय संघ की वाइस प्रेसिडेंट काजा कल्लास ने कहा कि भारत-EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एक बहुत ही रणनीतिक कदम साबित होगा. साथ ही इससे चीन और रूस पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए EU, रूस से कहीं अधिक भरोसेमंद पार्टनर होगा.
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इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए काजा कल्लास ने कहा है कि भारत और EU 27 जनवरी को एक सिक्योरिटी एंड डिफेंस पार्टनरशिप पैक्ट पर भी साइन करेंगे. काजा कल्लास भी उस समिट का हिस्सा होंगी. यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन 24 जनवरी को भारत पहुंचेंगी. वहीं यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा 25 जनवरी को पहुंचेंगे. दोनों लीडर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे और 27 जनवरी को समिट में हिस्सा लेंगे.
एक्सप्रेस ने काजा कल्लास से बातचीत में पूछा कि वो 2026 के गणतंत्र दिवस समारोह में EU के नेताओं को पहले इनविटेशन तक, भारत-EU द्विपक्षीय संबंधों के सफर को कैसे देखती हैं? इसके जवाब में EU वाइस प्रेसिडेंट कहती हैं कि हमने बातचीत और सहयोग से शुरुआत की और आज हम ट्रेड, सिक्योरिटी और टेक्नोलॉजी पर एक साथ काम करते हैं. EU लीडरशिप को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता एक बहुत बड़ा सम्मान है और यह सच्चे भरोसे को दिखाता है. भारत अब सिर्फ एक महत्वपूर्ण पार्टनर नहीं रहा, यह एक बड़ा स्ट्रेटेजिक पार्टनर भी है. यह एक अच्छा बदलाव है.
इसके अलावा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बात करते वो कहती हैं कि FTA से 2 अरब लोगों के लिए एक मार्केट बनेगा, जो ग्लोबल GDP का लगभग एक-चौथाई है. यह डील इन्वेस्टमेंट और ग्रोथ को बढ़ावा देगी, सप्लाई चेन को मजबूत करेगी और दोनों तरफ की कंपनियों के लिए नए-नए मौके खोलेगी. यह चीन, रूस और अमेरिका पर निर्भरता कम करने का भी एक मौका देता है. ऐसे समय में जब फ्री ट्रेड पर दबाव है और सप्लाई चेन को हथियार बनाया जा रहा है, हमारी आर्थिक पार्टनरशिप को गहरा करना बिल्कुल सही है. यह समझौता एक स्ट्रेटेजिक फैसला है.
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डिफेंस सेक्टर में पार्टनरशिपEU वाइस प्रेसिडेंट कहती हैं कि दुनिया अब पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही है, इसलिए EU-भारत रक्षा सहयोग को और गहरा करना एक स्वाभाविक कदम है. EU और भारत दोनों रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं क्योंकि वैश्विक हालात की यही मांग है. 27 जनवरी को, EU और भारत एक नई सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर साइन करेंगे. यह समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी और साइबर-रक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारे सहयोग का विस्तार करेगा. वो कहती हैं कि हम डिफेंस इंडस्ट्री में सहयोग को भी बढ़ाना चाहते हैं. भारत एक संप्रभु देश है और खरीद के बारे में अपने फैसले खुद लेगा. लेकिन एक बात साफ है कि यूरोप एक भरोसेमंद पार्टनर है, रूस नहीं.
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