मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहे हैं और तीसरी बार चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है. इसके पीछे की वजह बताते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी राज्य में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहती है.
दिग्विजय सिंह नहीं लड़ेंगे एक और राज्यसभा चुनाव, वजह- RSS विवाद या कुछ और?
Digvijaya Singh ने कई बार RSS और BJP पर निशाना साधा है. लेकिन पिछले महीने, उन्होंने बीजेपी और RSS की तारीफ करके सबको चौंका दिया. अब उन्होंने तीसरी बार राज्यसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया है.


कांग्रेस के अनुसूचित जाति विंग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मंगलवार, 13 जनवरी को दिग्विजय सिंह को एक पत्र लिखा. उन्होंने अपील की इस बार राज्यसभा में अनुसूचित जाति समुदाय का एक प्रतिनिधि भेजा जाए. इससे पहले, दिग्विजय ने भी कहा था कि अगर भविष्य में कोई अनुसूचित जाति समुदाय का व्यक्ति मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बने तो उन्हें खुशी होगी.
अहिरवार के पत्र के बारे में पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से कहा,
यह मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि मैं अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहा हूं.
दिग्विजय सिंह का मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है. वे 2014 से राज्यसभा सांसद हैं, दो लोकसभा चुनाव (2019, 2024) हार चुके हैं और इससे पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (1993-2003) रह चुके हैं.
‘संगठन को मजबूत करेंगे दिग्विजय’
इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े आनंद मोहन जे की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर नेता ने बताया कि राहुल गांधी, युवा नेताओं को बढ़ावा देकर कांग्रेस को फिर से मजबूत करना चाहते हैं. उन्होंने कहा,
दिग्विजय के सामने चुनौतियांदिग्विजय सिंह को जमीनी स्तर के संगठन को और मजबूत करने के लिए भेजा जाएगा और साथ ही वे चुनाव से पहले एक और नर्मदा परिक्रमा भी करेंगे, ताकि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया जा सके.
अगर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को जमीनी स्तर पर फिर से तैनात किया जाता है तो उनके सामने कई चुनौतियां होंगी. दो दशकों तक विपक्ष की राजनीति करने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठनात्मक रूप से खोखली हो चुकी है, बूथ समितियां एक्टिव नहीं हैं, गुटों में दरारें हैं और संसाधनों की कमी है.
साथ ही, 2020 में हुए दलबदल का असर अभी भी बना हुआ है. इससे पार्टी को न केवल विधायकों का नुकसान हुआ बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी चकनाचूर हो गया.
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जब RSS की तारीफ की
दिग्विजय सिंह वहीं शख्स हैं, जिन पर 'हिंदू आतंकवाद' और 'भगवा आतंक' जैसे शब्द गढ़ने के आरोप लगते रहे हैं. राज्यसभा में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कई बार RSS और बीजेपी पर निशाना साधा. लेकिन उनके हालिया बयानों ने सबका ध्यान खींचा.
पिछले महीने, उन्होंने बीजेपी और RSS की संगठन शक्ति की तारीफ करके सबको चौंका दिया था. बाद में उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वे RSS की विचारधारा और PM मोदी की नीतियों के सबसे कड़े आलोचकों में से एक हैं.
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