उत्तराखंड में कथित लैंड जिहाद विवाद में एक नया मोड़ आ गया है. मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने खुलासा किया कि प्रस्तावित मुस्लिम विश्वविद्यालय विवाद के केंद्र में रही जमीन कई बार मालिक बदलने के बाद आखिरकार हिंदू खरीददारों को बेच दी गई. देहरादून में शेखुल-हिंद ट्रस्ट के मालिकाना हक वाली लगभग 20 एकड़ जमीन की जांच के बाद यह मामला सामने आया है. प्रशासन ने भूमि कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए 4.192 बीघा जमीन को सील करने की कार्रवाई शुरू कर दी है.
देहरादून जमीन विवाद में नया मोड़, विवादित जमीन हिंदुओं को बेची गई
बीजेपी ने भारतीय सैन्य अकादमी को खतरा बताते हुए सरकार से इस जमीन के आवंटन को रद्द करने की मांग की थी. यह जमीन कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल के दौरान साल 2004 में अलॉट की गई थी.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित यह जमीन मूल रूप से साल 2004 में एक मदरसा स्कूल चलाने की अनुमति मिलने के बाद खरीदी गई थी. अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में भूमि कानूनों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा. हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सरकार इस जमीन को अपने नाम नहीं कर सकती. लेकिन साथ में ये भी कहा कि ट्रस्ट इस जमीन को केवल कृषि भूमि के तौर पर ही बेच सकता है.
साल 2016 में ट्रस्ट ने सरकार से जमीन बेचने की अनुमति मांगी. सरकार ने जवाब दिया कि इसे केवल खेती से जुड़े उद्देश्यों के लिए ही बेचा जा सकता है. प्रशासन ने बताया कि ट्रस्ट ने उस जमीन को कृषि संपत्ति के तौर पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े 15 लोगों को बेच दिया. आरोप है कि साल 2022 में इन खरीददारों ने जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर उन्हें 70 से 80 हिंदू खरीददारों को बेच दिया.
अधिकारियों का तर्क है कि यह जमीन का ट्रांसफॉर्मेशन और प्रचलित भूमि कानूनों का उल्लंघन है. देहरादून प्रशासन ने इस मामले में UPZA और LR एक्ट (जमीन से जुड़े कानून) की धारा 166 और 167 के तहत कार्यवाही शुरू कर दी है. प्रशासन ने नोटिस जारी करके जमीन को सरकारी कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि जमीन के उपयोग और ट्रांसफर से जुड़े कानूनों के उल्लंघन के आधार पर ये कार्रवाई की जा रही है.
बीजेपी ने की आवंटन रद्द करने की मांग
बीजेपी ने भारतीय सैन्य अकादमी को खतरा बताते हुए सरकार से इस जमीन के आवंटन को रद्द करने की मांग की थी. यह जमीन कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल के दौरान साल 2004 में अलॉट की गई थी. बीजेपी विधायक और पार्टी प्रवक्ता विनोद चमोली ने सवाल उठाया कि क्या तिवारी सरकार द्वारा दी गई जमीन हरीश रावत की देख रेख में इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए थी? उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी के विरोध और साल 2022 में जनता द्वारा कांग्रेस को नकारने की वजह से यह इरादा पूरा नहीं हो सका और अब लैंड माफिया जमीन पर कब्जा कर रहे हैं.
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