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EVM के मुद्दे पर उमर अब्दुल्ला क्या बोल गए जो कांग्रेस को बहुत चुभ गया?

लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मणिकम टैगोर ने उमर अब्दुल्ला को फैक्ट्स चेक करने की नसीहत दी है.

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जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला. (फोटो - पीटीआई)

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद कई विपक्षी नेताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को सवाल उठाए थे. शरद पवार ने भी सवाल उठाया था कि ईवीएम को वोटों में कुछ अंतर है. हालांकि तब उन्होंने कहा था कि उनके पास कोई सबूत नहीं है. अब ईवीएम को लेकर विपक्षी दलों के 'INDIA' गठबंधन में ही खींचतान शुरू हो गई है. हाल में एक इंटरव्यू के दौरान जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईवीएम के मुद्दे पर कांग्रेस को घेर लिया था. अब कांग्रेस ने उन पर पलटवार करते हुए पूछा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सहयोगियों के प्रति उनका ऐसा बर्ताव क्यों है. अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस INDIA गठबंधन का हिस्सा है.

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लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मणिकम टैगोर ने अब्दुल्ला को फैक्ट्स चेक करने की नसीहत दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा है, 

"समाजवादी पार्टी, एनसीपी और शिवसेना (उद्धव गुट) ने EVMs के खिलाफ बोला है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जी, कृपया अपने फैक्ट्स को चेक करें. कांग्रेस की वर्किंग कमिटी ने अपने प्रस्ताव में सिर्फ चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने सहयोगियों के लिए इस तरह का बर्ताव क्यों?"

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क्या कहा था अब्दुल्ला ने?

उमर अब्दुल्ला ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को एक इंटरव्यू दिया है. इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें लगता है कि विपक्ष, खास तौर पर कांग्रेस ईवीएम पर ध्यान केंद्रित करके गलत रास्ता अपना रही है. अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर कोई दिक्कत नहीं है अगर आप जीतने पर भी सवाल उठाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि जब आप चुनाव जीतें तो परिणाम स्वीकार कर लें और जब हार जाएं तो ईवीएम पर आरोप लगा दें.

अब्दुल्ला ने कहा, 

"जब इसी ईवीएम के इस्तेमाल से (हुए चुनाव के बाद) संसद में आपके 100 से अधिक सदस्य पहुंच जाते हैं और आप इसे अपनी पार्टी के लिए जीत का जश्न मनाते हैं. फिर, आप कुछ महीने बाद पलटकर यह नहीं कह सकते कि... हमें ये ईवीएम पसंद नहीं हैं क्योंकि अब चुनाव के परिणाम उस तरह नहीं आ रहे हैं जैसा हम चाहते हैं."

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अब्दुल्ला ने कहा कि अगर पार्टियों को वोटिंग सिस्टम पर भरोसा नहीं है तो उन्हें चुनाव नहीं लड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर आपको ईवीएम से दिक्कत है, तो उस पर आपका रुख एक जैसा रहना चाहिए.

TMC ने भी प्रतिक्रिया दी

इसी तरह तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी ईवीएम को लेकर एक बयान दिया है. 16 दिसंबर को संसद भवन परिसर में उन्होंने मीडिया से कहा, 

"मुझे लगता है कि जो लोग ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं, अगर उनके पास कुछ है तो चुनाव आयोग के पास जाकर डेमो दिखानी चाहिए. क्योंकि चुनाव आयोग ने सबको बुलाया था. आप अगर EVM रैंडमाइजेशन (ईवीएम चुनने की प्रक्रिया) के समय ठीक से काम करेंगे, मॉक पोल के समय अगर चेक करेंगे और काउंटिंग के समय ठीक से चेक करेंगे तो मुझे नहीं लगता है कि ये जो आरोप लग रहे हैं, उसमें कोई तथ्य है."

बनर्जी ने आगे कहा कि अगर फिर भी किसी को लगता है कि ईवीएम हैक हो सकता है, तो उन्हें चुनाव आयोग से मिलकर डेमो दिखाना चाहिए कि कि किस सॉफ्टवेयर या तकनीक से ईवीएम हैक हो सकता है, सिर्फ टिप्पणी करने से कुछ नहीं हो सकता है.

चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज किया 

ये पहली बार नहीं है, जब ईवीएम को लेकर इस तरह की बहस हो रही है. महाराष्ट्र चुनाव के बाद लगे आरोपों को चुनाव आयोग ने खारिज किया था. आयोग ने कहा था कि कई जगहों पर वेरिफिकेशन कर इसकी पुष्टि की गई है कि ईवीएम में पड़े वोटों और VVPAT स्लिप की गिनती में कोई अंतर नहीं है.

ये भी पढ़ें- कैसी होती है भारत की EVM मशीन? पेपर ट्रेल के कारण अमेरिकियों को अपने ईवीएम पर नहीं है भरोसा

जून 2017 में केंद्रीय चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को खुला न्योता दिया था. कहा था कि वे चाहें तो आयोग के पास आकर बता सकते हैं कि ईवीएम में छेड़छाड़ कैसे होती है. उसी साल अगस्त महीने में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया. बताया कि उसने हैकिंग के डेमो के लिए न्योता दिया था, लेकिन कोई राजनीतिक दल आया ही नहीं.

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