भाजपा के विधायक नीतेश राणे की उद्धव ठाकरे परिवार से सियासी प्रतिद्वंद्विता पुरानी है. वह न सिर्फ उद्धव ठाकरे बल्कि उनके बेटे आदित्य ठाकरे पर भी तीखे जुबानी हमले करते हैं. बीएमसी चुनाव में भाजपा की जीत और उद्धव सेना की हार के बाद उन्हें एक बार और आदित्य और उद्धव ठाकरे पर वार करने का मौका मिल गया है. शुक्रवार, 16 जनवरी को नतीजों में शिवसेना की हार दिखी तो एक वीडियो बनाकर नीतेश राणे ने ठाकरे पिता-पुत्र का मजाक उड़ाया. इस वीडियो में नीतेश कुछ नहीं कहते हैं, सिर्फ ‘खीखी’ करके हंस रहे हैं.
BMC चुनाव के बाद नीतेश राणे की ये 'खीखी' ठाकरे पिता-पुत्र से सहन नहीं होगी!
भाजपा विधायक नीतेश राणे ने बीएमसी चुनाव के नतीजे आने के बाद उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे को निशाना बनाया है. उन्होंने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर कहा, उद्धव जी और पेंग्विन को 'जय श्रीराम'.


एक्स पर पोस्ट किए गए इस वीडियो के साथ बस एक कैप्शन लिखा है-
उद्धव जी और पेंग्विन को जय श्रीराम.
नीतेश राणे आदित्य ठाकरे को ‘पेंग्विन’ बुलाते हैं. इस 'संबोधन' का सिरा उद्धव ठाकरे सरकार के एक प्रोजेक्ट से जुड़ता है, जिसके तहत भायखला के जू में पहली बार हंबोल्ट पेंग्विन लाया गया था. यह भारत का पहला ऐसा जू है, जहां पेंग्विन देखा जा सकता है. हम्बोल्ट प्रजाति के ये पेंग्विन दक्षिण अमेरिका में पेरू और चिली के तटीय इलाकों में पाए जाते हैं. इस प्रोजेक्ट को लेकर तत्कालीन ठाकरे सरकार की काफी आलोचना हुई थी. कहा जाता है कि यह आदित्य ठाकरे का ड्रीम प्रोजेक्ट था. इसके बाद से नीतेश राणे समेत कई विपक्षी नेताओं ने उद्धव ठाकरे को ‘पेंग्विन’ और आदित्य ठाकरे को ‘बेबी पेंग्विन’ बुलाना शुरू कर दिया था.
हालांकि, नीतेश राणे इससे पहले भी आदित्य ठाकरे का कई बार मजाक बना चुके हैं. उनकी आवाज को लेकर उन्होंने एक बार कहा था कि आदित्य ठाकरे ‘बुर्के में छिपकर’ भारत-पाकिस्तान का मैच देख सकते हैं. उनकी आवाज ऐसी है कि फायदा मिलेगा. वो 'पाकिस्तान जिंदाबाद' के नारे भी लगा सकते हैं. ये बताते हुए नीतेश राणे ने आदित्य ठाकरे के आवाज की नकल भी उतारी थी.
हालांकि, राणे परिवार का उद्धव ठाकरे से पुराना बैर है. साल 1999 में जब उनके पिता नारायण राणे शिवसेना में रहते हुए भाजपा के साथ गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री बने थे, तब कहा जाता था कि उद्धव ठाकरे उनके काम में कुछ ज्यादा ही दखल देते थे. ये वो वक्त है जब उद्धव ठाकरे अपने पिता बाला साहेब ठाकरे की जगह के लिए दावेदारी कर रहे थे. 9 महीने तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान उद्धव ठाकरे से उनकी काफी खींचतान होती रही. सीनियर राणे को शिवसेना का ‘रिमोट कंट्रोल से चलने वाला सीएम’ कहा जाने लगा. नतीजा ये हुआ कि भाजपा-शिवसेना का गठबंधन अगला चुनाव हार गया. फिर 2005 में नारायण राणे को बाल ठाकरे ने ये कहकर पार्टी से निकाल दिया कि ‘शिवसेना में नेता हटाने और चुनने का अधिकार सिर्फ उन्हें है’.
इसके बाद नारायण राणे पहले कांग्रेस में गए. फिर 2018-19 में भाजपा जॉइन कर ली. उनके 43 साल के बेटे नीतेश राणे भी भाजपा से ही विधायक हैं.
बीएमसी चुनाव का हाल
बता दें कि बीएमसी चुनाव की कुल 227 सीटों में से भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने अभी तक 118 सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है. इसके मुकाबले शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और एमएनएस का गठबंधन केवल 67 सीटों पर आगे चल रहा है.
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