बांग्लादेश में रविवार, 11 जनवरी को दो हिंदुओं की मौत हो गई. पहली घटना में 28 साल के ऑटो ड्राइवर हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. ये घटना रविवार 11 जनवरी की रात को चटगांव के डागनभुइयां में हुई. हमलावरों ने युवक की हत्या करने के बाद उसका बैटरी से चलने वाला रिक्शा भी लूट लिया. वहीं, एक अन्य घटना में राजशाही शहर में एक हिंदू गायक की पुलिस हिरासत में मौत हो गई. वह आवामी लीग के नेता भी थे और पिछले साल उन्हें उनकी पार्टी के कई अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था. परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस की लापरवाही और बदसलूकी से उनकी जान गई.
बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या
Bangla Desh hindu man killed: पुलिस ने बताया कि चटगांव के डागनभुइयां में ऑटो चालक समीर दास को अज्ञात लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला. वह 28 साल के थे.


एनडीटीवी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि चटगांव के डागनभुइयां में ऑटो चालक समीर दास को अज्ञात लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला. वह 28 साल के थे. डागनभुइयां के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि समीर की हत्या देसी हथियारों से की गई और उसे पीट-पीटकर मारा गया. पहली नजर में यह एक सुनियोजित हत्या लगती है. उन्होंने आगे बताया,
हत्या के बाद अपराधियों ने उसका ऑटो-रिक्शा भी लूट लिया. पुलिस दोषियों की पहचान कर रही है. वो फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है.
वहीं एक अन्य हिंदू गायक और आवामी लीग के नेता प्रोले चाकी की पुलिस हिरासत में मौत की खबर है. इंडिया टुडे से जुड़े आशुतोश मिश्रा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोले चाकी की मौत रविवार, 11 जनवरी की देर शाम राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संदिग्ध हालत में हुई. उनके परिवार ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और प्रशासन पर हिरासत के दौरान लापरवाही और बदसलूकी का आरोप लगाया है.
प्रोले चाकी एक जाने-माने संगीतकार थे और अवामी लीग की पबना जिला इकाई के सांस्कृतिक सचिव थे. इसके अलावा वह बनमाली शिल्पकला केंद्र में संस्कृति से जुड़े कार्यों के संयुक्त सचिव भी थे. करीब एक महीने पहले उन्हें दिसंबर में पबना से गिरफ्तार किया गया था. पिछले साल जुलाई में आंदोलन के दौरान विस्फोट के एक मामले में कई अवामी लीग नेताओं के साथ उन्हें भी गिरफ्तार किया गया था.
बताया जा रहा है कि प्रोले चाकी को पहले से ही कई गंभीर बीमारियां थीं, जिनमें दिल से जुड़ी समस्या भी शामिल थी. रविवार 11 जनवरी की शाम उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई. उस वक्त वो पुलिस हिरासत में थे.
बता दें कि 17 करोड़ की आबादी वाला मुस्लिम बहुल बांग्लादेश 2024 के विद्रोह के बाद से उथल-पुथल के दौर में है. इस दौरान यहां सूफी मुसलमानों और हिंदुओं समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है. ये लोग बांग्लादेश की आबादी में 10 प्रतिशत से भी कम हैं.
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