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'जाति पूछी, बाल काटे, पेशाब फेंका...', यूपी कथावाचकों के साथ हुए बर्ताव पर अखिलेश ने क्या चेतावनी दी?

Akhilesh Yadav ने घटना पर सवाल उठाए. कहा- 'हमारा संविधान जातिगत भेदभाव की अनुमति नहीं देता है. ये व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा से जीवन जीने के मौलिक अधिकार के ख़िलाफ़ है.' उन्होंने क्या चेतावनी दी है?

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अखिलेश यादव ने घटना पर सवाल उठाए हैं. (फ़ोटो- PTI/आजतक)

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का दादरपुर गांव. कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहायक संत कुमार यादव कथा कहने पहुंचे थे. लेकिन वहां जो हुआ, उसने यूपी की सियासत तेज गर्मा दी. आरोप है कि कथावाचकों की जाति के चलते उनसे मारपीट की गई. कथावाचकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया, बाल काटे गए और जबरन महिला के पैर छुआए गए. उनका हारमोनियम भी तोड़ दिया गया और उन पर पेशाब भी फेंका गया. 

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दादरपुर गांव, उत्तर प्रदेश का इटावा ज़िले में बकेवर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है. जहां शनिवार, 21 जून को ये घटना घटी थी.

इसे लेकर अखिलेश यादव ने क्या सवाल उठाए और पुलिस ने क्या बताया. और क्या है पूरी कहानी, सब बारी-बारी से जानेंगे. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर लिखा,

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पहले कथावाचकों से उनकी जाति पूछी गई. उन्होंने अपनी जाति PDA (पिछड़ा-दलित-आदिवासी) बताए जाने पर, कुछ वर्चस्ववादी और प्रभुत्ववादी लोगों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया. उनके बाल कटवाए, नाक रगड़वाई और इलाक़े की शुद्धि कराई.

हमारा संविधान जातिगत भेदभाव की अनुमति नहीं देता है. ये व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा से जीवन जीने के मौलिक अधिकार के ख़िलाफ़ है. सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ़्तारी हो और संबंधित धाराओं में मुक़दमा दर्ज़ किया जाए.

अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि अगर अगले 3 दिनों में कड़ी कार्रवाई नही हुई, तो ‘PDA के मान-सम्मान की रक्षा’ के लिए एक बड़े आंदोलन की अपील की जाएगी. उन्होंने कहा कि PDA के मान से बढ़कर कुछ नहीं.

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आजतक से जुड़े अमित तिवारी की ख़बर के मुताबिक़, इस मामले में चार लोगों की गिरफ़्तारी हुई है. इटावा के SSP बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो संज्ञान में आया. जिसमें एक व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध उसके बाल काटे जा रहे हैं. घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए.

पुलिस के मुताबिक़, दादरपुर गांव के निवासियों को इस बात से ऐतराज था कि कथावाचक ने कथा का आयोजन करने से पहले अपने आप को ब्राह्मण बताया था. जबकि वो अन्य जाति के हैं. इस बात को लेकर गांव वालों ने कथावाचक के साथ अभद्रता की और उनके बाल कटवा दिये.

बाद में पीड़ित व्यक्तियों की पहचान की गई. फिर उनकी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया. मामले में चार आरोपियों को जेल भी भेज दिया गया है. SSP बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आगे जो भी तथ्य मिलेंगे, उसके आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. एडिशनल SP के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर दी गई है. जो आगे की जांच कर रही है.

इधर पीड़ित कथावाचकों का कहना है कि उन्होंने शुरू में ही सब कुछ बता दिया था. लेकिन उसके बावजूद मारपीट की गई.

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