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अजित पवार की मौत की खबर ऑफिस तक पहुंची तो क्या हुआ?

Maharashtra के डिप्टी सीएम Ajit Pawar की 28 जनवरी को विमान हादसे में मौत हो गई. मौत से एक दिन पहले यानी 27 जनवरी को अजित पवार ने डिप्टी सीएम कार्यालय में सात घंटे बिताए. इस दौरान उन्होंने कई बैठके कीं और 30 फाइलों का निपटारा किया.

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अजित पवार के मंत्रालय में 28 जनवरी को सन्नाटा पसरा था. (फोटो- पीटीआई)

छह बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार की छवि एक सख्त प्रशासक की रही. उन्हें हार्ड टास्क मास्टर के तौर पर देखा जाता रहा. डिप्टी सीएम कार्यालय में अजित पवार का आखिरी दिन भी काफी व्यस्त रहा. उनके सात घंटे मंत्रालय में बीते. इसमें पुलिस ब्रीफिंग, राजस्व विभाग की समीक्षा, मंत्रिमंडल की बैठक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा और कई बैठकों की अध्यक्षता करना शामिल रहा.

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मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 जनवरी को अजित पवार अपने ट्रेडमार्क ड्रेस सफेद कुर्ता-पायजामा में सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर डिप्टी सीएम कार्यालय (DCMO) पहुंच गए. DCMO में उनके एक सीनियर सहयोगी ने बताया कि पवार समय की पाबंदी और अनुशासन को लेकर काफी सतर्क रहते थे. उन्होंने बताया, 

डिप्टी सीएम समय को लेकर काफी पाबंद थे. मैं ऑफिस में उनका स्वागत करने और मदद करने के लिए आया था, क्योंकि वो लगातार समीक्षा बैठकों और कैबिनेट बैठक में आवाजाही कर रहे थे.

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अजित पवार ने सुबह 9 बजे से 9.30 बजे तक पुलिस ब्रीफिंग दी. इसके बाद 9.30 से 11 बजे तक राज्य भर में किए जाने वाले राजस्व संग्रह की विस्तार से समीक्षा की. 28 जनवरी को छठी मंजिल पर स्थित DCMO ऑफिस में सन्नाटा पसरा था. पवार की मौत की खबर मिलते ही अधिकतर अधिकारी बारामती के लिए रवाना हो गए थे. आमतौर पर काफी अस्त व्यस्त रहने वाला गलियारा सुनसान पड़ा था. केवल मुट्ठी भर कर्मचारी एक छोटे से कमरे में चुपचाप बैठे टीवी पर खबर देख रहे थे.

एक अधिकारी ने मेज पर पड़ी फाइलों के ढेर की ओर इशारा करते हुए कहा, “27 जनवरी को हमेशा की तरह सर (अजित पवार) का दिन बहुत व्यस्त रहा. ये आखिरी फाइलें थीं जिनकी उन्होंने स्टडी की और मंजूरी दी. हमने अभी-अभी इन्हें बाहर निकाला है ताकि देख सकें कि कल (27 जनवरी) हमारा दिन कैसा रहा.”

अधिकारी ने बताया कि उन्हें पुरानी यादें सता रही हैं. फिर उनकी आंखों में आंसू आ गए और वे अपने ऑफिस की कुर्सी पर ही फूट-फूट कर रोने लगे. 28 जनवरी को DCMO से मिली जानकारी के मुताबिक, अजित पवार ने 27 जनवरी को 30 से ज्यादा फाइलों का निपटारा किया. फाइलों की ढेर में सबसे ऊपर रखी एक फाइल के पहले पन्ने के निचले हिस्से में अजित पवार के सिग्नेचर थे. एक अधिकारी ने उस फाइल की ओर इशारा करते हुए कहा, 

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हम इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि उन्होंने शायद सबसे आखिर में इसी फाइल पर सिग्नेचर किए हैं. वे इस मुद्दे की समीक्षा करना चाहते थे और जाते समय अपने आधिकारिक आवास पर उन्होंने यह फाइल मंगवाई थी.

DCMO ने बताया कि आश्रम स्कूल के शिक्षकों का वेतन छह महीने से लंबित था. अजित पवार ने उसके भुगतान की मंजूरी दे दी. भुगतान की कुल राशि 350 करोड़ रुपये है. अजित पवार की आखिरी मंजूरी के बारे में विस्तार से पूछने पर अधिकारी ने रोते हुए कहा, 

आपके लिए यह आपका काम है. लेकिन मैंने अपने बॉस को खो दिया है. हम उनका आदर करते थे और उनसे प्यार करते थे. यह एक गहरा सदमा है. आप किसी और दिन इस फैसले से जुड़ी जानकारी ले सकते हैं.

लेकिन 28 जनवरी की देर शाम एक अधिकारी ने पुष्टि कर दी कि फाइल वित्त विभाग को भेज दी गई है. वहां से धनराशि जारी कर दी  जाएगी. अजित पवार 27 जनवरी को दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकत के बाद मंत्रालय से अपने आधिकारिक आवास देवगिरी के लिए रवाना हो गए. 

एक अधिकारी ने बताया कि अजित पवार को बारामती में तीन रैलियां करनी थीं. उसके बाद उन्हें पुणे जाना था. उन्होंने आगे बताया कि 9 फरवरी को अजित पवार के फिर से मंत्रालय लौटने की उम्मीद थी. लेकिन नियति ने कुछ और तय कर रखा था.

वीडियो: अजित पवार का विमान उड़ा रही पायलट शाम्भवी पाठक पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने क्या कहा?

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