देश में एम्स (AIIMS) को इलाज और मेडिकल शिक्षा का सर्वोच्च संस्थान माना जाता है. सब जगह से हिम्मत हारने वाले मरीजों के लिए एम्स आखिरी ठौर होता है. इसलिए कई राज्यों में AIIMS का विस्तार किया गया है. लेकिन AIIMS से जुड़े जो आंकड़े सामने आए हैं, वो चिंता बढ़ाने वाले हैं. देशभर के AIIMS फैकल्टी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं. आलम ये है कि 11 AIIMS में फैकल्टी डॉक्टरों के लिए स्वीकृत हर 10 में से लगभग चार पद खाली पड़े हैं.
कैसे होगा इलाज? देशभर के AIIMS में हर 10 फैकल्टी डॉक्टर्स के पदों में से 4 खाली
देश भर के एम्स में फैकल्टी डॉक्टर्स के लिए 4,099 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 1,600 पद यानी लगभग 39 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं.


टाइम्स ऑफ इंडिया ने राइट टू इंन्फॉर्मेशन (RTI) के जरिए ये जानकारी हासिल की है. इसके मुताबिक देश भर के एम्स में फैकल्टी डॉक्टर्स के लिए 4,099 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 1,600 पद यानी लगभग 39 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं.
किस एम्स में कितने पद खाली?AIIMS दिल्ली देश का सबसे पुराना और बड़ा AIIMS है. यहां फैकल्टी के लिए स्वीकृत 1,306 पदों में से 504 खाली हैं. यहां मेडिसिन, सर्जरी, एनेस्थीसिया, पीडियाट्रिक्स, न्यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी और इमरजेंसी केयर जैसे विभागों में स्वीकृत पद खाली हैं.
नए बने AIIMS की हालत तो और पतली है. रिपोर्ट के मुताबिक AIIMS जोधपुर में फैकल्टी की सबसे ज्यादा कमी है. यहां 405 स्वीकृत पदों में से 189 यानी 46.7 फीसदी पद खाली है. AIIMS गोरखपुर में 45.5 फीसदी पद खाली है. वहीं AIIMS जम्मू में 44.3 फीसदी फैकल्टी के पद खाली हैं. AIIMS कल्यानी और AIIMS बिलासपुर में भी 40 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं. वहीं AIIMS नागपुर में 373 स्वीकृत पदों में से 137 यानी 36.7 फीसदी पद खाली हैं.
इसके अलावा AIIMS बठिंडा में 37.4 फीसदी फैकल्टी के पद खाली हैं. AIIMS रायपुर में 34.8 फीसदी, AIIMS भुवनेश्वर में 26 फीसदी और AIIMS भोपाल में 25.6 फीसदी पद खाली है.
हेल्थ एक्सपर्टस क्या बता रहे?हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की लंबे समय तक कमी से आउटपेशेंट सर्विसेज, सर्जरी शेड्यूल, ICU सुपरविजन और अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों की ट्रेनिंग पर असर पड़ता है. क्योंकि सीनियर फैकल्टी क्लिनिकल, एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव तीनों तरह की भूमिकाएं निभाते हैं.
दिल्ली AIIMS की मीडिया सेल की इंचार्ज रीमा दादा ने फैकल्टी की कमी के बारे में पूछे जाने पर बताया कि भर्ती की कोशिशें जारी हैं. इंटरव्यू चल रहे हैं और खाली पदों को भरने की प्रक्रिया नियमित तौर से की जा रही है.
AIIMS अस्पताल हर साल लाखों मरीजों का इलाज करते हैं. इनमें से कई को जिला और राज्य के अस्पतालों से इलाज के लिए रेफर किया जाता है. RTI से मिले डेटा के मुताबिक, तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी भर्ती की गति में एक बड़ा अंतर है. इससे सवाल उठता है कि क्या भारत के प्रमुख मेडिकल संस्थानों में हेल्थकेयर के बढ़ते दबाव को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टाफ हैं.
वीडियो: दिल्ली एम्स और 6 बड़े अस्पतालों में प्रदूषण से पीड़ित 2 लाख मरीज पहुंचे, सरकार ने क्या बताया?


















.webp)


.webp)