पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी पर एफआईआर हो गई है. उन पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगा है. बीती 5 मई को यानी बंगाल चुनाव के नतीजे आने के अगले दिन राजीव सरकार नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बनर्जी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिषेक बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान 27 अप्रैल से 3 मई के बीच कई स्थानों पर भड़काऊ भाषण दिए थे. इसके अलावा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ धमकियां जारी की थीं.
'देखूंगा दिल्ली से कौन बचाने आएगा?', अभिषेक बनर्जी के बयान पर केस दर्ज
पश्चिम बंगाल में चुनाव खत्म हो गए. टीएमसी की सत्ता चली गई. बीजेपी सरकार में आ गई है. इसी बीच चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के खिलाफ केस दर्ज हो गया.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अपनी शिकायत में राजीव सरकार ने 7 अप्रैल को कोलकाता में बनर्जी के दिए एक कथित बयान का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि इस बयान में अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि ‘वह देखेंगे कि 4 मई को (बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद) उन्हें (बीजेपी कार्यकर्ताओं को) बचाने के लिए कौन आता है. दिल्ली से कौन-सा गॉडफादर उनकी मदद के लिए आता है.’
अभिषेक बनर्जी के भाषण में क्या था?अभिषेक बनर्जी के जिस भाषण का जिक्र शिकायत में किया गया है, वह उन्होंने हुगली जिले के आरामबाग से टीएमसी प्रत्याशी मिताली बाग पर कथित हमले के बाद दिया था. मिताली ने आरोप लगाया था कि अभिषेक बनर्जी की रैली में जाने के दौरान उन पर गोगहाट में हमला किया गया. टीएमसी का आरोप था कि ये हमला ‘बीजेपी के गुंडों’ ने किया है. इसकी खबर लगते ही अभिषेक बनर्जी आगबबूला हो गए. वह तत्काल मौके पर पहुंचे और कथित हमलावरों को कड़ी चेतावनी देते हुए कठोर शब्दों का प्रयोग किया.
बनर्जी ने कहा कि जिन लोगों ने मिताली पर हमला किया, उनके बारे में उनके पास पूरी जानकारी है. सीसीटीवी के सारे फुटेज खंगाले जाएंगे और एक-एक हमलावर की पहचान की जाएगी. बनर्जी ने आगे कहा था,
कितनी सजा हो सकती है?हमलावरों ने एक एससी महिला नेता पर हमला किया है. 4 मई को चुनाव के नतीजे जो भी होंगे. मैं देखूंगा कि किस बीजेपी नेता में हिम्मत है और दिल्ली से कौन सा नेता उन्हें बचाने के लिए आता है.
पुलिस ने बताया कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बीएनएस की धारा 196 (शत्रुता और नफरत को बढ़ावा देना), 351 (आपराधिक धमकी) और 353(1)(सी) (नफरत भड़काने के मकसद से झूठी सूचना और अफवाहें फैलाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. बीएनएस की धारा 196 गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 3 साल की कैद और जुर्माना हो सकता है. इसके अलावा, अभिषेक बनर्जी पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) और धारा 125 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.
शिकायत करने वाले राजीव सरकार ने इंडियन एक्सप्रेस को फोन पर बताया कि यह मामला सिर्फ अभिषेक बनर्जी का नहीं है. किसी भी नेता द्वारा दूसरे नेता के खिलाफ ऐसी भाषा और धमकियों का इस्तेमाल करना मंजूर नहीं है. उन्होंने कहा कि वह 5 मई को शिकायत लेकर बागूइयाटी पुलिस स्टेशन गए थे. वहां से उन्हें साइबर क्राइम ब्रांच से संपर्क करने को कहा गया. इसके बाद उन्होंने 5 मई को बिधाननगर साइबर क्राइम विभाग में बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. शुक्रवार, 15 मई को उन्हें पुलिस थाने से सूचना मिली कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है.
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