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क्या होता है कल्पेबल होमीसाइड- नॉट अमाउंटिंग टू मर्डर, जिसका आरोप मौलाना साद पर है

मौलाना साद तबलीग़ी जमात के चीफ हैं.

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मौलाना साद दिल्ली के निज़ामुद्दीन में मार्च में जुटी तबलीग़ी जमात के चीफ हैं, उन पर IPC की धारा-304 के तहत केस चलेगा. (फोटो- India Today)
दिल्ली पुलिस ने तबलीग़ी जमात के चीफ मौलाना साद और मरकज़ के छह अन्य लोगों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड यानी IPC के सेक्शन-304 के तहत केस दर्ज किया है. ये सेक्शन है- culpable homicide not amounting to murder. यानी गैर-इरादतन हत्या, जो हत्या की श्रेणी में नहीं आती. क्या होता है कल्पेबल होमीसाइड – नॉट अमाउंटिंग टू मर्डर? कोई भी ऐसा काम, जो किसी की मौत का कारण बने. ऐसा काम, गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है. भले ही ऐसा फिज़िकल चोट करके किया गया हो या किसी और तरीके से. लेकिन जो भी नुकसान पहुंचाया गया है, उसके पीछे इरादा हत्या का नहीं हो. धारा 304 (ए) उन लोगों पर लगाई जाती है, जिनकी लापरवाही की वजह से किसी की जान जाती है. - सज़ा – आजीवन कारावास या 10 साल की कैद + ज़ुर्माना - ये ग़ैर-ज़मानती अपराध है. सेशन कोर्ट ज़मानत पर विचार कर सकता है. सेक्शन-299 से 304 तक हत्या का ज़िक्र IPC में सेक्शन-299 से 304 तक हत्या का ज़िक्र है. इसमें इरादतन, गैर-इरादतन, हत्या के लिए उकसाना जैसी तमाम धाराएं हैं. गैर-इरादतन हत्या, मर्डर से कैसे अलग है? मर्डर में कोई भी एक्शन सामने वाले को मार डालने के इरादे से ही किया जाता है. जबकि गैर-इरादतन हत्या में भी इस तरह का एक्शन तो हो सकता है, लेकिन वो इरादतन नहीं होता. मर्डर के केस में धारा-302 लगती है. जो धारा चर्चित शीना बोरा मर्डर केस में इंद्राणी मुखर्जी पर लगी थी. जेसिका लाल हत्याकांड में मनु शर्मा पर धारा-302 लगी थी. और गैर-इरादतन हत्या में धारा-304, जो हिट एंड रन केस में सलमान खान पर लगी थी. साल-1988 के एक लड़ाई-झगड़े के केस में उस वक्त के क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू पर भी धारा-304 लगी थी.  हालांकि सिद्धू 2018 में इस चार्ज से बरी हो गए. तब तक वो राजनेता बन चुके थे. मौलाना साद पर ये धारा क्यों लग रही है? मौलाना साद पर आरोप है कि उन्होंने जान-बूझकर हज़ारों लोगों को मरकज़ में रखा. इससे तमाम लोग कोरोना इंफेक्शन के शिकार हुए. कई लोगों की मौत भी हो चुकी है. कार्यक्रम में भाग लेने वाले कई लोग साइलेंट कैरियर के रूप में देश के कई इलाकों में गए हैं. उन्हें अभी तक ढूंढा जा रहा है, ताकि उन्हें क्वारंटीन किया जा सके.
तकरीर के नाम पर जाहिलियत परोस रहे तबलीगी जमात के मौलाना साद

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