09 जनवरी को Thalapathy Vijay की Jana Nayagan रिलीज़ होने वाली थी. मगर सेंसर सर्टिफिकेट पर हुए विवाद ने फिल्म को सिनेमाघर की जगह अदालत में पहुंचा दिया. 09 जनवरी को सुबह कोर्ट ने इस मामले में अपना फ़ैसला सुनाया था. शुरुआत में ये फ़ैसला फिल्म बनाने वाली KVN Productions के पक्ष में आया था. मगर फिर कोर्ट ने एक बार फिर फिल्म को लटका दिया.
'जन नायगन' को पहले राहत मिली, फिर कोर्ट ने एकदम से खेल पलट दिया!
09 जनवरी की सुबह कोर्ट ने 'जन नायगन' के पक्ष में फ़ैसला सुनाया था. मगर फिर अचानक से मेकर्स पर गाज गिरा दी.


सेंसर बोर्ड ने 'जन नायगन' को सेंसर सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था. वो भी तब, जब फिल्म की रिलीज़ में दो दिन का समय बाकी था. इस वजह से मेकर्स ने मामले को हाई कोर्ट में उठाया था. 07 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस पीटी आशा ने केस की सुनवाई की थी. मगर उन्होंने अपना फ़ैसला 09 जनवरी की सुबह तक के लिए सुरक्षित रखा. इस वजह से ‘जन नायगन’ पोस्टपोन हो गई. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस पीटी आशा ने दोनों तरफ़ की बात सुनने के बाद KVN प्रोडक्शंस के पक्ष में फ़ैसला सुनाया है. अपने आदेश में जज ने कहा,
“सारे दस्तावेज़ देखने के बाद ये साफ़ है कि शिकायत करने वाले की शिकायत बाद में सोचकर बनाई गई है. वो किसी असली समस्या पर आधारित नहीं है.”
बता दें कि 'जन नायगन' की जांच कर रही सेंसर बोर्ड समिति के अधिकतर मेंबर्स इसे U/A सर्टिफिकेट देने को तैयार थे. हालांकि इस दौरान फिल्म में 27 कट्स करवाए गए. मेकर्स ने ऐसा कर भी दिया. मगर फिर उन्हें बताया गया कि फिल्म को अब एक दूसरी कमिटी दोबारा चेक करेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि किसी ने ये शिकायत कर दी कि फिल्म के कुछ सीन्स लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं. पता चला कि ये शिकायत भी एक कमिटी मेम्बर ने ही की है. शिकायत में ये भी कहा गया कि फिल्म में सेना को सही तरह से नहीं दिखाया गया है. इस बात ने मेकर्स को बेहद नाराज़ कर दिया. इसी वजह से वो ये मामला लेकर मद्रास हाईकोर्ट पहुंच गए.
खैर, 09 जनवरी को कोर्ट ने कहा कि जांच समिति के किसी मेम्बर के लिए ऐसी शिकायत करना ठीक नहीं है. खासकर तब जब उनकी बातें ध्यान में रखते हुए मेकर्स ने फिल्म में ज़रूरी बदलाव कर दिए थे. कोर्ट ने साफ़ शब्दों में कहा,
"जांच समिति के किसी मेम्बर का फिल्म देखकर, समझकर और सिफ़ारिश करने के बाद इस तरह पलट जाना एक ख़तरनाक परंपरा की शुरुआत हो सकती है. इससे आगे चलकर सदस्य अपनी ही सिफ़ारिशों से मुकरने लगेंगे. इससे सेंसर बोर्ड की जांच समिति के फ़ैसलों की अहमियत और भरोसा दोनों कमज़ोर पड़ जाएंगे."
कोर्ट ने सेंसर बोर्ड को आदेश दिया कि वो फिल्म को तुरंत U/A सर्टिफिकेट देने का प्रोसेस शुरू करे. बोर्ड की तरफ़ से इस फ़ैसले के खिलाफ़ अपील की बात उठाई गई है. मगर जज ने कहा कि वो उस अपील को तभी स्वीकार करेंगी, जब उसे सही ढंग से फ़ाइल कर दिया जाएगा.
ये जानकर सेंसर बोर्ड ने कोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ़ तुरंत नई अपील कर दी और उसी दिन सुनवाई की मांग की. बोर्ड की तरफ़ से कहा गया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया है. जज ने बिना उनकी बात सुने ही फ़िल्म को U/A सर्टिफ़िकेट देने का आदेश दे दिया. उन्होंने बताया कि सेंसर बोर्ड के पास फिल्म को दूसरी कमिटी को भेजने का अधिकार है. इस पर मेकर्स की तरफ़ से सवाल उठाया गया कि जब कमिटी पहले ही फ़िल्म देख चुकी थी, तो उसका ही एक सदस्य बाद में शिकायत कैसे कर सकता है.
चीफ़ जस्टिस ने इस पूरे मामले में दोनों पक्षों से सवाल किए हैं. उन्होंने कहा कि बिना सेंसर बोर्ड की बात सुने ऐसा आदेश देना ठीक नहीं है. साथ ही उन्होंने ये भी दोहराया कि मेकर्स को सेंसर सर्टिफ़िकेट मिलने से पहले फिल्म की रिलीज़ डेट घोषित नहीं करनी चाहिए थी. कोर्ट ने मेकर्स से कहा है कि वो अपनी सुविधा के लिए उन पर दबाव न बनाएं. उन्हें अपने हिसाब से काम करने दें.
कुलमिलाकर, 'जन नायगन' के मुंह में निवाला देकर एक बार फिर छीन लिया गया है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी. यानी तब तक इसके रिलीज़ होने के कोई आसार नहीं हैं. संभावना जताई जा रही है कि मेकर्स इस मामले को सुप्रीम कोर्ट भी ले जा सकते हैं. जो भी हो, इस पूरे विवाद में मेकर्स को काफ़ी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. फिल्म पोस्टपोन होने के कारण भारत और ओवरसीज़ मार्केट में उन्हें एडवांस बुकिंग का पैसा रिफंड करना पड़ा है. बताया जा रहा है कि ये आंकड़ा 50 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है.
वीडियो: थलपति विजय की फिल्म 'जन नायगन' के ट्रेलर ने कौन-सा रिकॉर्ड तोड़ दिया?













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